उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  गौतमबुद्धनगर ने  26 निमार्ण कार्य इकाईयांं को एंटी स्मोग गन लगाने के लिए नोटिस जारी किए 

 




एंटी स्मोग गन एक ऐसी डिवाइस है, जो वातावरण में पानी की बौछार करती है, जिससे प्रदूषण कम होता हैः डा0 अर्चना द्विवेदी

 





 गौतमबुद्धनगर में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए 15 अक्टूबर-2020 से 15 मार्च-2021 तक है, जीआरएपी लागू

 


मौहम्मद इल्यास/गौतमबुद्धनगर


गौतमबुद्धनगर में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना यानी जीआरएपी (ग्रेप) 15 अक्टूबर-202 से लागू है और जो आगामी 15 मार्च-2020 तक प्रभावी रहेगा। गौतमबुद्धनगर की उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी डा0 अर्चना द्विवेदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार गौतमबुद्धनगर में सख्त निगरानी कर रहा है। जो भी जिले में प्रदूषण फैला रहा है उन पर जुर्माना लगाकर दंडित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्धनगर में 15 अक्टूबर-2020 से डीजल जेनरेटर चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब सिर्फ अस्पतालों में ही जरनेटर का इस्तेमाल होगा। उन्होंने बताया कि सभी सोसायटी और उद्योगों में कहीं भी डीजल जरनेटर नहीं चलेंगे, किसी विशेष परिस्थिति के लिए अनुमति लेनी होगी। साथ ही उद्योग और ढाबों पर कोयले का प्रयोग नहीं होगा। ढाबे के तंदूर पर भी रोक लगाई गई। इस दौरान कूड़ा जलाने व फेंकने और धूल उड़ाने पर भी रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और अलग.अलग विभाग की टीमें लगातार जगह.जगह जाकर निरीक्षण करेंगी। अगर कहीं पर नियमों का उल्लंघन मिला तो, सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही एंटी.स्मॉग गन लगाने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। एंटी स्मोग गन एक ऐसी डिवाइस है, जो वातावरण में पानी की बौछार करती है, जिससे प्रदूषण कम होता है। पानी के टैंक से कनेक्ट इस मशीन को ट्रक के जरिए शहर के किसी भी हिस्से में ले जाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस गन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह काफी ऊपर तक पानी का छिड़काव कर सकती है, जिससे धूल कण साफ हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि एंटी स्मोग गन निमार्ण कार्य स्थलों पर लगाए जाने हैं। इनमें 26 निमार्ण कार्य इकाईयांं को एंटी स्मोग गन लगाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं और जिनमें से करीब 25 निमार्ण कार्य स्थलों पर एंटी स्मोग गन लगाए भी जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि परिवहन, उद्योग और निमार्ण कार्य स्थलों पर अलग अलग निगरानी के लिए टीमें गठित की गई हैं। यदि पॉल्यूशन सीवियर कैटेगरी में पहुंचता है तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में उद्योग और निमार्ण कार्य को पूरी तरह से बंद करा दिया जाता है। साथ ही परिवहन व्यवस्था पर भी कडी निगरानी रखी जाती है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण मापक यंत्र ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय और वहीं दूसरी ओर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज में लगे हैं। जब कि नोएडा में विभिन्न स्थानों पर 4 प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं।

प्रदूषण की श्रेणी
0-50 -
ठीक व सामान्य
50-100 -
संतोषजनक
100-200 -
सीमित
200-300 -
खराब (येलो कैटेगरी)
300-400 -
अति खराब (रेड कैटेगरी)
400-500 -
गंभीर (ब्राउन कैटेगरी)
500
से अधिक - इमरजेंसी