भारत देश महान मिलकर, सोच, बदलो चमन में बहार आ जाएगी जाति धर्म की द्वेष भावना हम सबको नरक में और बर्बादी में ले जाएगी



विपक्षी पार्टियों को, बुद्धिजीवियों को समाज को घर गृहस्ती चलाने वालों को नींद और नशा से जाग जाना चाहिए



चौधरी शौकत अली चेची

-----------------------------------------
देशवासियों को गहरे समंदर में गोता लगाने की जरूरत है। देश में  जाति धर्म की द्वेष भावना वाली राजनीति होती रहेगी।  वह दिन दूर नहीं जब हर इंसान बर्बादी के एक किनारे पर खड़ा नजर आएगा। गोदी मीडिया गुलामी और बर्बादी की तरफ ले जा रहा हैं। देश में हर जाति धर्म में लाखों त्यौहार हर साल मनाए जाते हैं जो त्याग, बलिदान, खूबसूरती, संस्कृति भाईचारे सहयोग के प्रतीक होते हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा आगे भी जारी रहेगी। ै  देश में करोड़ों धर्म स्थल बने हैं, आगे भी बनते रहेंगे। देश आजाद होने के बाद लगभग 1200 लड़ाकू विमान खरीदे गए और लगभग 520 करोड रुपए का राफेल विमान 1620 करोड़ रुपए में खरीद कर बीजेपी और गोदी मीडिया ने देश में डंका बजा दिया। हमारे पूर्वजों ने सरकारी संस्थाओं का निर्माण कर हम सभी देशवासियों को सुविधा और तरक्की का जरिया बनाया।  सरकार इन्हें बेचने पर तुली है, सबसे पहले लाल किले को ही गिरवी रखा दिया। लाल किला और ताजमहल न केवल ऐतिहासिक धरोहर हैं बल्कि इस देश की पहचान का शो विंडो भी है। समझ में नहीं आता पढ़े-लिखे लोग हमारे देश में मूर्खता की तरफ जा रहे हैं। अंगूठा छाप कम पढ़े लिखे सत्ता चला रहे हैं। बुद्धिजीवी काबिल इंसान दर दर की ठोकर खा रहे हैं और उन्हें मूरख समझा जा रहा है। जहरीले बयान देने वालों को लोकप्रिय बनाया जा रहा है। मतदान करने के समय एक दारु की बोतल या एक मिठाई का डिब्बा या 200 की एक साड़ी या 100 रुपए या जाति धर्म विशेष की गंदी मानसिकता से अपने वजूद को ही व्यक्ति खो देता है। मत देते समय भूल जाते हैं कि पेड़ पर फल फीका, खट्टा, कड़वा या फिर मीठा होगा या नहीं होगा। मंदी की मार बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, अत्याचार, बलात्कार, अपहरण, जाति धर्म के नाम से नफरत झूठ गुमराह सभी अपने फुल शबाब पर हैं, किसकी जान कब चली जाए अंदाजा लगाना मुश्किल है? आम इंसान घर या बाहर सुरक्षित नहीं कामकाज रोजगार कब समाप्त हो जाए अंदाजा लगाना मुश्किल है? धर्मस्थल, पाठ पूजा, कर्म फल का मूल्यांकन व इबादत के लिए होते हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं तरक्की रोजगार अच्छी सोच अच्छी शिक्षा अच्छे कानून से मिलते हैं। ऐसा लग रहा है कि देशवासियों के अधिकार समाप्ति की तरफ जा रहे हैं। राफेल आने से  पड़ोसी देश डर जाएंगे, भारत की  विदेशों में धूमिल इमेज बहाल हो जाएगी संभव नहीं। हां सत्ता पक्ष और गोदी मीडिया की दुकान खूब फल-फूल रही है। किसान, मजदूर, गरीब, बेसहारा बर्बादी की तरफ जा रहा है। कानून का सहारा लेकर पावरफुल, चतुर चालाक विरोधियों को नष्ट करता जा रहा है। सच और झूठ को पहचानना मुश्किल हो गया है। पवित्र धर्मस्थल, पवित्र धर्म ग्रंथ, औलिया, पैगंबर, देवी देवता, महापुरुष, शूरवीर और यहां तक की संविधान का अपमान करने से लोग चूक नही रहे है। भारत देश अनेक तरह के फूलों के गुलदस्ते जैसा कहा गया है। हम सभी भारतवासी एक दूसरे के सहयोगी होने चाहिए, लेकिन निजी स्वार्थ में सब कुछ उथल-पुथल हो रहा है। विश्वास की डोर लेकर चलने वाला इंसान अपनी किस्मत को ऊपर वाले को दोषी मानकर रो रहा है। कर्म फल की सोचने वाला अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर दौड़ रहा है। देशवासियों को समझने की जरूरत है कि झूठ, गुमराह, नफरत देश में आग की तरह फैल रही है। इस निजी स्वार्थ को समझने की जरूरत है। एकता व जागरूकता में बड़ी ताकत होती है। बीता हुआ कल दोबारा नहीं आता। आशा निराशा यादें रह जाती है। विपक्षी पार्टियों को, बुद्धिजीवियों को समाज को घर गृहस्ती चलाने वालों को नींद और नशा से जाग जाना चाहिए। कोई नाच रहा है कोई देख रहा है कोई रो रहा है कोई हंस रहा है। जय जवान जय किसान हम सबका भारत देश महान मिलकर, सोच, बदलो चमन में बहार आ जाएगी जाति धर्म की द्वेष भावना हम सबको नरक में और बर्बादी में ले जाएगी।
लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज  ) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।

>