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भारतीय किसान यूनियन (कृषक) का गठन: ‘नीतियों के खिलाफ नाराज़गी से संगठन तक’—कृष्ण नागर के नेतृत्व में किसानों की नई लामबंदी


✍️ मौहम्मद इल्यास "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर सिग्मा-2 में हुई एक अहम बैठक ने क्षेत्रीय किसान राजनीति को नई दिशा दे दी है। भारतीय किसान यूनियन (कृषक) के गठन के साथ ही यह स्पष्ट संकेत मिला है कि प्राधिकरणों की नीतियों से असंतुष्ट किसान अब बिखरे रहने के बजाय संगठित होकर दबाव की राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं। सर्वसम्मति से कृष्ण नागर (जगनपुर) को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना इस नई दिशा का केंद्र बिंदु माना जा रहा है।
बैठक की अध्यक्षता हरवीर सिंह और संचालन हरेंद्र नागर ने किया। बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह पहल केवल औपचारिक नहीं, बल्कि जमीनी असंतोष से उपजी एक संगठित प्रतिक्रिया है।
नया संगठन, पुरानी पीड़ा—मुद्दे वही, तेवर नए
नव-नियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण नागर ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन का उद्देश्य सिर्फ एक और यूनियन बनाना नहीं, बल्कि गांव, गरीब और किसान की वास्तविक आवाज़ को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना है। उन्होंने खुलकर कहा कि क्षेत्र के कई किसान पहले के संगठनों से निराश होकर अलग हुए हैं और अब सैकड़ों की संख्या में इस नए मंच से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से गौतमबुद्ध नगर के तीनों प्राधिकरणों (ग्रेटर नोएडा, नोएडा, यमुना प्राधिकरण) की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, आबादी निस्तारण, प्लॉट आवंटन और विकास में असमानता जैसे मुद्दों पर किसानों की लंबे समय से अनदेखी हो रही है।
“हमारी पहली प्राथमिकता इन सभी लंबित समस्याओं का ठोस समाधान कराना होगी,” — कृष्ण नागर
आंदोलन की आहट: ‘बात नहीं बनी तो सड़क पर उतरेंगे’
संगठन ने अपने शुरुआती रुख में ही साफ कर दिया है कि वह केवल ज्ञापन और बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। कृष्ण नागर ने बड़े आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन और प्राधिकरणों ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो जल्द ही व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
यह बयान इस बात का संकेत है कि संगठन संवाद और संघर्ष—दोनों रास्तों पर एक साथ चलने की रणनीति अपना सकता है।
संगठनात्मक ढांचा: अनुभवी चेहरों और नए कार्यकर्ताओं का मिश्रण
नई कार्यकारिणी में अनुभव और जमीनी पकड़ दोनों को संतुलित करने की कोशिश दिखती है।
हरवीर सिंह – राष्ट्रीय संगठन मंत्री
ऋषि पाल कसाना – राष्ट्रीय सचिव
हरेंद्र नागर – राष्ट्रीय महासचिव
एडवोकेट जीतू प्रधान – राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
पूनम भाटी – राष्ट्रीय सचिव (महिला प्रकोष्ठ)
प्रमोद चौधरी – जिला संयोजक
सभी पदाधिकारियों ने किसानों के हित में समर्पित होकर काम करने और संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने का संकल्प लिया।
जमीनी समर्थन: भीड़ नहीं, संकेत है बदलाव का
बैठक में क्षेत्र के कई प्रभावशाली और सक्रिय ग्रामीण चेहरों की मौजूदगी रही, जिनमें धर्मवीर नेता जी, हरवीर सिंह, ऋषि पाल कसाना, सतपाल नागर, लीलू गुरु जी, हरेंद्र नागर, शैलेश शर्मा, विकास नागर, संत मावी, कपिल कसाना, नरेश जाट, राजवीर कसाना, सरजीत नागर, रविन्द्र भाटी, प्रदीप कसाना, सुमित खानपुर, सौरव वर्मा, संजय नागर, देवेंद्र कसाना, विपिन भाटी, गौरव कपासिया, राहुल बादलपुर, सौरव मसौता, सोविंदर चेची, मोहित भाटी, दिनेश बंसल, भगवान शर्मा, मनीष भडाना, विनीत करहाना, पिंटू भाटी, धर्मेंद्र भाटी, अजीत घघौला, अमित चावड़ा, नीरज मावी, ओपी गुर्जर, प्रवीण नागर, आयुष भाटी सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।
यह उपस्थिति महज संख्या नहीं, बल्कि सामूहिक असंतोष के संगठित रूप में बदलने का संकेत मानी जा रही है।
विशेष एंगल: ‘स्थानीय मुद्दों से उभरती नई किसान राजनीति’
इस गठन को केवल एक संगठन की शुरुआत मानना अधूरा होगा। दरअसल, यह स्थानीय किसान राजनीति में नेतृत्व के पुनर्गठन और एजेंडा-शिफ्ट का संकेत है।
पहले जहां आंदोलन छिटपुट और नेतृत्व विभाजित था,
वहीं अब एक केंद्रित नेतृत्व और स्पष्ट एजेंडा उभरता दिख रहा है।
यदि यह संगठन अपने वादों पर कायम रहता है और गांव-स्तर पर नेटवर्क मजबूत करता है, तो यह न केवल प्राधिकरणों पर दबाव बनाएगा, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
विजन लाइव का विश्लेषण:
भारतीय किसान यूनियन (कृषक) का गठन मौजूदा हालात में किसानों की संगठित नाराज़गी का राजनीतिक और सामाजिक रूपांतरण प्रतीत होता है। जिस तरह से बड़ी संख्या में किसान पुराने संगठनों से अलग होकर इस नए मंच से जुड़े हैं, वह यह दर्शाता है कि किसानों को अब परिणाम देने वाले नेतृत्व की तलाश है, केवल आश्वासन नहीं।
आने वाले समय में यह संगठन कितना प्रभावी होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह आंदोलन को रणनीति में और रणनीति को परिणाम में कितना बदल पाता है। यदि नेतृत्व जमीनी मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहता है, तो यह संगठन गौतमबुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी किसानों की आवाज़ का मजबूत केंद्र बन सकता है।
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