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हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर पश्चिमी यूपी में तेज होगी निर्णायक लड़ाई, 16 मई को मेरठ में महाबैठक; गौतमबुद्धनगर बार की भूमिका होगी अहम


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की करीब पांच दशक पुरानी मांग को अब निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। अधिवक्ताओं ने आंदोलन को नए सिरे से संगठित और प्रभावी बनाने का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट बेंच स्थापना केन्द्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चेयरमैन एडवोकेट अनुज कुमार शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, गौतमबुद्धनगर पहुंचा।

प्रतिनिधिमंडल में संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट परवेज आलम सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल रहे। उन्होंने गौतमबुद्धनगर दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज भाटी (बोड़ाकी) और सचिव एडवोकेट शोभाराम चंदीला को औपचारिक निमंत्रण-पत्र (ज्ञापन) सौंपते हुए 16 मई 2026 (शनिवार) को मेरठ में आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में विशेष रूप से शामिल होने का अनुरोध किया।
गौतमबुद्धनगर बार को सौंपी जा सकती है बड़ी जिम्मेदारी
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट संकेत दिए कि गौतमबुद्धनगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे जनपद की बार एसोसिएशन इस आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। अध्यक्ष एडवोकेट मनोज भाटी और सचिव एडवोकेट शोभाराम चंदीला से आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, अधिवक्ताओं को एकजुट करने और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित कराने का आग्रह किया गया।

दोनों पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट बेंच की स्थापना केवल अधिवक्ताओं की सुविधा नहीं, बल्कि आम जनता के न्याय के अधिकार से जुड़ा विषय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि गौतमबुद्धनगर बार इस आंदोलन में पूरी सक्रियता और मजबूती के साथ भागीदारी करेगा।
50 साल पुरानी मांग को मिलेगा नया रोडमैप

ज्ञापन में बताया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को आज भी न्याय के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) जाना पड़ता है, जो समय, धन और संसाधनों की दृष्टि से बेहद कठिन है। इस समस्या के समाधान के लिए पिछले लगभग 50 वर्षों से अधिवक्ता लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है।

16 मई को मेरठ कचहरी स्थित पंडित नानक चंद सभागार में सुबह 11 बजे आयोजित होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर व्यापक रणनीति बनाई जाएगी। इसमें आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने, बड़े स्तर पर जनसमर्थन जुटाने और सरकार पर प्रभावी दबाव बनाने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

आंदोलन को मिलेगा संगठित रूप

बैठक में प्रस्तावित रणनीतियों में धरना-प्रदर्शन, रैली, कार्य बहिष्कार, जनजागरण अभियान और प्रदेश स्तर पर समन्वय स्थापित करने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। साथ ही, सभी जिलों की बार एसोसिएशनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि आंदोलन को एकजुट और प्रभावी बनाया जा सके।

अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सम्मान भी प्रमुख मुद्दा

संघर्ष समिति ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा को भी प्रमुख एजेंडे में शामिल किया है। बैठक में प्रदेश में जल्द से जल्द एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू कराने की मांग को लेकर ठोस निर्णय लिया जा सकता है।

इसके अलावा, पुलिस प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार, अनावश्यक चालान, झूठे मुकदमे दर्ज करने और बिना पर्याप्त जांच कार्रवाई करने जैसे मामलों पर भी गंभीर चर्चा होगी। प्रस्ताव रखा गया है कि किसी भी अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई से पहले संबंधित बार एसोसिएशन के अध्यक्ष या सचिव को विश्वास में लिया जाए, ताकि अनावश्यक टकराव से बचा जा सके।

नेताओं के बयान से दिखा गंभीर रुख

चेयरमैन एडवोकेट अनुज कुमार शर्मा ने कहा कि अब आंदोलन को निर्णायक रूप देने का समय आ गया है और इसके लिए सभी बार एसोसिएशनों की एकजुटता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को प्रदेश स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

संयोजक एडवोकेट परवेज आलम ने भी बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि आंदोलन की नई दिशा तय करने का मंच है। उन्होंने सभी जिलों के अधिवक्ताओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
16 मई की बैठक पर टिकी निगाहें

अब पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं की निगाहें 16 मई को मेरठ में होने वाली इस महत्त्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं। खासतौर पर गौतमबुद्धनगर दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज भाटी (बोड़ाकी) और सचिव एडवोकेट शोभाराम चंदीला की सक्रिय भूमिका को इस आंदोलन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मेरठ की इस बैठक से निकलने वाली रणनीति किस तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को नया आयाम देती है।