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‘हैक द बिगिनिंग’26 का भव्य आगाज़: आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज में नवाचार, एआई और इंडस्ट्री कनेक्ट का अनोखा संगम


   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए आयोजित फ्लैगशिप हैकाथॉन “हैक द बिगिनिंग’26” का भव्य शुभारंभ उत्साह, ऊर्जा और नवाचार के माहौल के बीच संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल एक तकनीकी प्रतियोगिता रहा, बल्कि युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने वाला एक प्रेरणादायक मंच भी साबित हुआ।
एप्लाइड साइंस एवं ह्यूमैनिटीज विभाग द्वारा नवाचार विकास संस्था नव रचना फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा और अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई।
🚀 नई सोच के साथ करियर की शुरुआत
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रथम वर्ष के छात्रों को शुरुआत से ही इनोवेशन, प्रॉब्लम सॉल्विंग और तकनीकी सोच की ओर प्रेरित करना रहा। कॉलेज के निदेशक डॉ. मयंक गर्ग ने अपने स्वागत भाषण में संस्थान की “थिंकिंग प्रोफेशनल्स” तैयार करने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण ही असली पहचान बनाते हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. ओ.पी. चौधरी ने छात्रों को तकनीकी ढांचे और हैकाथॉन की संरचना से अवगत कराते हुए उन्हें रचनात्मक और व्यावहारिक सोच अपनाने का आह्वान किया।
🤖 एआई और भविष्य की तकनीक पर फोकस
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण न्यूरापेक्स एआई के संस्थापक जयवर्धन त्यागी की प्रेरणादायक प्रस्तुति रही। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को यह समझाया कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य केवल नवाचार नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से एआई के नैतिक पहलुओं पर भी चर्चा की और कहा कि “टेक्नोलॉजी तभी सार्थक है, जब वह मानवता के हित में काम करे।”
💡 इनोवेशन में ‘एम्पैथी’ की भूमिका
ट्रायम्बक की संस्थापक ईशा शर्मा ने “एम्पैथी-ड्रिवन डिजाइन” की अवधारणा को सामने रखते हुए बताया कि किसी भी तकनीकी समाधान को सफल बनाने के लिए उसमें मानवीय दृष्टिकोण का होना बेहद जरूरी है।
वहीं ASSOCHAM की सहायक महासचिव डॉ. अंबिका शर्मा ने भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की अहम भूमिका को रेखांकित किया।
🤝 शिक्षा और उद्योग का मजबूत जुड़ाव
कार्यक्रम के दौरान आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज, ASSOCHAM और ट्रायम्बक के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। यह समझौता छात्रों को इंडस्ट्री एक्सपोजर, इंटर्नशिप और वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने के अवसर प्रदान करेगा, जिससे उनकी व्यावहारिक समझ और रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।
🎯 विजन लाइव विश्लेषण
“हैक द बिगिनिंग’26” केवल एक हैकाथॉन नहीं, बल्कि शिक्षा के बदलते स्वरूप का संकेत है। आज इंजीनियरिंग कॉलेज पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर इनोवेशन, स्टार्टअप कल्चर और इंडस्ट्री कनेक्ट पर जोर दे रहे हैं।
प्रथम वर्ष से ही छात्रों को इस तरह के मंच देना यह दर्शाता है कि अब फोकस ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘प्रॉब्लम सॉल्वर’ और ‘क्रिएटर’ तैयार करने पर है।
अगर ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो आने वाले समय में यही युवा भारत को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के वैश्विक मानचित्र पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।