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“आस्था से अर्थव्यवस्था तक: बाराही मेला-2026 में ‘मीना बाजार’ बना जनजीवन का केंद्र, होली संगीत प्रतियोगिता ने जगाई लोक संस्कृति की चेतना”


   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा)
प्राचीनकालीन एवं ऐतिहासिक बाराही मेला-2026 इस वर्ष अपने भव्य, बहुआयामी और जनसमावेशी स्वरूप के कारण केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनकर उभर रहा है। मेले का प्रत्येक दिन नई ऊर्जा, नए रंग और नए आयाम लेकर सामने आ रहा है। मंगलवार को आयोजित होली संगीत प्रतियोगिता और ‘मीना बाजार’ की चहल-पहल ने इस उत्सव को एक जीवंत लोक महाकुंभ का रूप दे दिया।
लोक संस्कृति की गूंज: होली संगीत प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र
सांस्कृतिक मंच पर आयोजित होली संगीत प्रतियोगिता ने ब्रज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं को सजीव कर दिया। महाशय पंडित रामकुमार घरबरा, गौरव भाटी डाबरा और कैप्टन रिछपाल नागर (तिगांव, हरियाणा) एंड पार्टी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।
प्रत्येक राउंड 30 मिनट का रखा गया, जिसमें होली रसिया, पौराणिक कथाओं पर आधारित गायन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े गीतों ने कार्यक्रम को बहुआयामी बना दिया।
महाभारत के वीर अभिमन्यु वध प्रसंग की प्रस्तुति ने जहां दर्शकों को भावुक कर दिया, वहीं “सती निहाल दे” और भक्त पूरणमल जैसे किस्सों ने लोकगाथाओं की परंपरा को पुनर्जीवित किया।
गौरव भाटी एंड पार्टी द्वारा दहेज प्रथा पर आधारित रसिया ने कार्यक्रम को सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि लोक कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम भी है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी कलाकारों को शिव मंदिर सेवा समिति द्वारा पारितोषिक एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया—यह सम्मान न केवल कलाकारों के लिए प्रेरणा बना, बल्कि लोक संस्कृति के संरक्षण के प्रति समिति की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
महिला सशक्तिकरण की मजबूत आवाज
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश कबड्डी टीम की कप्तान सोनिका नागर ने अपने संबोधन में समाज के एक महत्वपूर्ण पहलू—बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता—को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि “जब तक बेटियां शिक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होंगी, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।”
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे खेल और सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
उनका संदेश मेले में उपस्थित युवाओं, विशेषकर बालिकाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और कार्यक्रम को एक सकारात्मक सामाजिक दिशा प्रदान कर गया।
मीना बाजार: मेले की आर्थिक धड़कन और सामाजिक दर्पण
यदि बाराही मेले के सबसे जीवंत और प्रभावशाली पहलू की बात करें, तो ‘मीना बाजार’ इस बार केंद्र में नजर आता है।
यह बाजार केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का सशक्त स्तंभ और सामाजिक जीवन का आईना बन चुका है।
शाम होते ही पूरा मीना बाजार रोशनी, रंग-बिरंगी दुकानों और ग्राहकों की चहल-पहल से गुलजार हो उठता है।
यहां सबसे अधिक सक्रियता महिलाओं की देखने को मिलती है, जो परिवार की आवश्यकताओं के अनुरूप सामान खरीदती नजर आती हैं—यह दृश्य ग्रामीण और शहरी जीवन के संगम को भी दर्शाता है।
यहां उपलब्ध वस्तुएं:
दैनिक उपयोग की वस्तुएं
प्लास्टिक उत्पाद
पारंपरिक मिट्टी के बर्तन
घड़ियां, चश्मे, खिलौने
आर्टिफिशियल ज्वैलरी और कॉस्मेटिक्स
चाबी के छल्ले, बैलून, हुक्का आदि
10 रुपये से 100 रुपये तक के किफायती दामों पर उपलब्ध सामान इस बाजार को हर वर्ग के लिए सुलभ बनाते हैं।
मोलभाव की परंपरा इस बाजार को और भी जीवंत बनाती है, जहां ग्राहक और दुकानदार के बीच संवाद सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करता है।
इतिहास से वर्तमान तक: एक विकसित होती परंपरा
शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी, महासचिव ओमवीर बैसला, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल और मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा के अनुसार, मीना बाजार की शुरुआत वर्षों पहले छोटी दुकानों से हुई थी।
समय के साथ मेले के विस्तार ने इस बाजार को भी विकसित किया और आज यह दर्जनों दुकानों के साथ एक व्यवस्थित बाजार के रूप में स्थापित हो चुका है।
बर्फखाना मार्ग से लेकर बाराही मंदिर, सांस्कृतिक मंच और मल्ल स्थल तक फैला यह बाजार मेले की भौगोलिक और सामाजिक संरचना को भी परिभाषित करता है।
जनप्रतिनिधियों और समाज के सक्रिय सहयोग से सफल आयोजन
कार्यक्रम में शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मपाल प्रधान, महासचिव ओमवीर बैसला, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल, सुभाष शर्मा (जींस वाले), रुपेश चौधरी, विनोद पंडित (तेल वाले), तोलाराम, के.डी. गुर्जर, देवा शर्मा, पवन जिंदल, योगेश अग्रवाल, हरिकिशन सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इन सभी के सक्रिय सहयोग और सहभागिता ने मेले के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं और दर्शकों ने इस आयोजन को जन-उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
आने वाले कार्यक्रमों को लेकर उत्साह चरम पर
मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा के अनुसार, आगामी दिनों में भी मेले में रागनी, भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मनोरंजन कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी।
विशेष रूप से 9 अप्रैल को बलराम बैसला एंड पार्टी की प्रस्तुति को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
विजन लाइव विश्लेषण: परंपरा, अर्थव्यवस्था और समाज का त्रिकोण
बाराही मेला-2026 यह साबित करता है कि पारंपरिक मेले केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज के आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को जोड़ने का कार्य करते हैं।
‘मीना बाजार’ के माध्यम से जहां स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं होली संगीत प्रतियोगिता जैसे मंच लोक संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं।
महिला भागीदारी, युवा उत्साह और सामाजिक संदेश—ये सभी पहलू मिलकर इस मेले को एक आदर्श सामुदायिक आयोजन बनाते हैं।
यदि ऐसे आयोजनों को योजनाबद्ध तरीके से प्रोत्साहित किया जाए, तो यह न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता को भी नई दिशा देंगे।