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बाराही मेला-2026: परंपरा और आधुनिकता का संगम बना सूरजपुर, रागनी की गूंज और झूलों के रोमांच में उमड़ा जनसैलाब

 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ सूरजपुर (ग्रेटर नोएडा )
सूरजपुर का ऐतिहासिक बाराही मेला-2026 इस वर्ष सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते समाज की जीवंत तस्वीर बनकर उभर रहा है। यहां एक ओर रागनी, भक्ति और लोक परंपराएं लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ रही हैं, तो दूसरी ओर आधुनिक झूले, आकर्षक खेल-तमाशे और मंचीय प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी ओर खींच रही हैं। यही संतुलन इस मेले को खास बनाता है और हर दिन बढ़ती भीड़ इसकी सफलता की गवाही दे रही है।
मंगलवार को मेले का सांस्कृतिक मंच पूरी तरह लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया, जब प्रसिद्ध रागनी कलाकार तरुण बलियान एंड पार्टी ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवन दर्शन और आध्यात्मिक संदेशों का माध्यम भी बना।
प्रवीण राजपुरिया ने रामायण के लंका कांड से जुड़ी रागनी “तीनों लोकों में डंका बाजे, रावण सा बलशाली…” प्रस्तुत कर न केवल तालियां बटोरीं, बल्कि धर्म और शक्ति के प्रतीकों को भी प्रभावी ढंग से मंच पर जीवंत किया। उनकी प्रस्तुति ने यह दर्शाया कि लोक कला आज भी धार्मिक कथाओं को जनमानस तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
मुख्य कलाकार तरुण बलियान ने अपने उपदेशात्मक गीतों के जरिए आधुनिक जीवन की सच्चाइयों को उजागर किया। “इंसान तेरा इस दुनिया में कुछ नहीं…” और “सज-धज के जिस दिन मौत की शहजादी आएगी…” जैसे गीतों ने भौतिकवाद में उलझे समाज को आईना दिखाया। वहीं “उमर तेरी धोखे में बीत गई…” भजन ने यह संदेश दिया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में आध्यात्मिकता को नजरअंदाज करना कितना बड़ा नुकसान है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि पारंपरिक लोककथाओं को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। तरुण बलियान और टीना पटौदी की जोड़ी ने पूरणमल के प्रसंग को सवाल-जवाब और हल्के-फुल्के व्यंग्य के साथ पेश कर दर्शकों को न केवल हंसाया, बल्कि लोक विरासत को जीवंत बनाए रखने का संदेश भी दिया।
सांस्कृतिक मंच के साथ-साथ मेले का मनोरंजन क्षेत्र भी युवाओं और बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ड्रैगन रेल, नाव झूला, ब्रेक डांस और भूत बंगला जैसे रोमांचक झूलों पर उमड़ती भीड़ यह दर्शाती है कि मेला अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक संपूर्ण पारिवारिक उत्सव बन चुका है।
यही वह विशेष एंगल है जो बाराही मेले को अलग पहचान देता है—जहां दादी-नानी की पीढ़ी रागनी और भजन में डूबी नजर आती है, वहीं युवा पीढ़ी आधुनिक झूलों और डिजिटल दौर के मनोरंजन में उत्साह से भाग ले रही है। दोनों पीढ़ियों का यह संगम मेले को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बनाता है।
नृत्य प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार किया। पायल चौधरी (पलवल) और यूट्यूब कलाकार शुभांगी की प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि लोक मंच अब डिजिटल युग के कलाकारों के लिए भी एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। वहीं विपिन पंडित, सुमित भाटी, शिवम मावी और वाई.सी. गुर्जर जैसे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से स्थानीय प्रतिभाओं को भी नई पहचान दी।
मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा के अनुसार, आने वाले दिनों में भी मेले में इसी तरह के विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे हर वर्ग के लोगों को अपनी रुचि के अनुसार कुछ न कुछ देखने और अनुभव करने को मिलेगा।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में शिव मंदिर सेवा समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी (प्रधान), महासचिव ओमवीर बैसला, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिजेंद्र ठेकेदार, जगदीश भाटी (एडवोकेट), अनिल भाटी, विनोद (सिकंदराबाद), रवि भाटी, टेकचंद प्रधान, भीम खारी, अज्जू भाटी, अनिल कपासिया सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
विजन लाइव का विश्लेषण:
बाराही मेला-2026 आज के बदलते सामाजिक परिदृश्य में परंपरा और आधुनिकता के संतुलन का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है। जहां एक ओर लोक संस्कृति, रागनी और भक्ति कार्यक्रम लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रहे हैं, वहीं आधुनिक झूले और मनोरंजन के साधन नई पीढ़ी को भी इस आयोजन से जोड़ने में सफल हो रहे हैं। यह मेला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामूहिक सहभागिता का जीवंत मंच बन चुका है, जो क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।