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बजट के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच बढ़ती दूरी


 चौधरी शौकत अली चेची
हर वर्ष की तरह इस बार भी केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने-अपने बजट को “ऐतिहासिक” और “विकासोन्मुखी” बताते हुए प्रस्तुत किया। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये बजट वास्तव में आम जनता, किसानों, युवाओं और महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव ला पा रहे हैं, या फिर यह केवल आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित हैं?
बढ़ता बजट, बढ़ता कर्ज
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹8,08,736.06 करोड़ का बजट पेश किया था। इसके साथ ही लगभग ₹91,000 करोड़ का अतिरिक्त ऋण लेने की बात भी सामने आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उस बजट का लगभग 60% ही व्यय हो सका। राजस्व प्राप्तियां ₹6,62,690.93 करोड़ और पूंजी प्राप्तियां लगभग ₹1,16,551.72 करोड़ बताई गईं।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश पर लगभग ₹9 लाख करोड़ का कर्ज बताया जा रहा है, जबकि वर्ष 2017-18 में यह करीब ₹4 लाख करोड़ था। यह अंतर राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
अब 11 फरवरी 2026 को प्रस्तुत 2026-27 का बजट ₹9,12,696.35 करोड़ का है, जो योगी सरकार का दसवां बजट है। इसमें पूंजीगत व्यय को 19.5%, शिक्षा को 12.4%, कृषि को 9% और स्वास्थ्य को 6% आवंटित किया गया है। विकास व्यय ₹2.52 लाख करोड़ बताया गया है, जिसमें हाई-स्पीड रेल, फ्रेट कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी, डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप और एआई हब जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
कृषि और किसान: सबसे बड़ा सवाल
लेखक के अनुसार, कृषि क्षेत्र को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है। किसानों की प्रमुख समस्याएं—
समय पर यूरिया और डीएपी की उपलब्धता
फसलों का उचित समर्थन मूल्य
गेहूं, धान और गन्ने की समय पर खरीद और भुगतान
प्राकृतिक आपदा और आवारा पशुओं से नुकसान पर पर्याप्त मुआवजा
कृषि यंत्रों पर पर्याप्त सब्सिडी
इन मुद्दों पर सरकार की नीतियां प्रभावी नहीं दिखतीं। कृषि लागत में वृद्धि और आय में गिरावट को लेकर किसानों में असंतोष है। साथ ही, अमेरिका-भारत संभावित ट्रेड डील का प्रभाव भी किसानों के लिए चिंता का विषय बताया जा रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: प्राथमिकता या औपचारिकता?
सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर व्यय का दावा किया है, परंतु ज़मीनी स्तर पर लगभग 27,000 सरकारी स्कूलों के बंद या विलय होने की खबरें चिंता पैदा करती हैं। वहीं 16 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई है, लेकिन लेखक का मानना है कि शिक्षा और चिकित्सा का क्षेत्र धीरे-धीरे व्यावसायिक केंद्रों में बदलता जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण: घोषणाएं बनाम आवंटन
बजट में “राम राज्य” की थीम के साथ महिला सशक्तिकरण का उल्लेख किया गया है, परंतु अलग से व्यापक महिला बजट का अभाव दिखाई देता है।
कन्या सुमंगला योजना: ₹400 करोड़
कार्यरत महिलाओं के हॉस्टल: ₹100 करोड़
मेधावी छात्राओं के लिए स्कूटी योजना: ₹400 करोड़
बेटियों की शादी सहायता: ₹1 लाख प्रति लाभार्थी
महिला एवं बाल विकास योजनाओं के लिए लगभग ₹18,620 करोड़
लेखक का तर्क है कि इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव और पहुंच पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक होनी चाहिए।
उद्योग बनाम आमजन
लेख में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकार का मुख्य फोकस बड़े उद्योगपतियों और व्यापारिक घरानों को लाभ पहुंचाने पर है, जबकि किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। बढ़ती बिजली दरें, टोल टैक्स, महंगे कृषि उपकरण और कीटनाशक किसानों की कमर तोड़ रहे हैं।
लोकतांत्रिक अधिकार और आंदोलन
लेखक का कहना है कि जब किसान अपने अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करते हैं, तो उन पर कठोर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का खाका होता है। यदि बजट से आमजन को राहत, किसान को सम्मानजनक आय, युवाओं को रोजगार और महिलाओं को वास्तविक सुरक्षा व अवसर नहीं मिलते, तो उसके “ऐतिहासिक” होने के दावे अधूरे रह जाते हैं।
आज आवश्यकता है पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित आधारित नीतियों की—ताकि बजट सचमुच जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके।
लेखक परिचय
चौधरी शौकत अली चेची
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, किसान एकता संघ
पिछड़ा वर्ग सचिव, समाजवादी पार्टी (उत्तर प्रदेश)
किसान, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय वक्ता एवं लेखन के माध्यम से जनहित के विषयों को उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता।
कानूनी डिस्क्लेमर
यह लेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों और राजनीतिक दृष्टिकोण को व्यक्त करता है। इसमें उल्लिखित आंकड़े एवं दावे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं और लेखक की समझ पर आधारित हैं। इस लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार की मानहानि करना नहीं है, बल्कि नीतिगत मुद्दों पर लोकतांत्रिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।