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नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री से स्वतंत्र जांच की मांग

 Vision Live  / नोएडा
नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (NOIDA Authority) में वरिष्ठ प्रबंधक पद पर तैनात अधिकारी गौरव बंसल पर भ्रष्टाचार, अवैध उगाही और गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। खतौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक मदन भैया ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
विधायक द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि गौतमबुद्धनगर के दादरी क्षेत्र के निवासी गौरव बंसल ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए किसानों, आम नागरिकों और प्राधिकरण से जुड़े कार्यों में अवैध हस्तक्षेप किया। पत्र में यह भी कहा गया है कि अधिकारी की कथित दबंग कार्यशैली के कारण शिकायतकर्ता और स्थानीय लोग भयवश खुलकर सामने आने से कतरा रहे हैं।
पत्र के अनुसार, आरोपित अधिकारी पर स्थानीय कॉलोनाइजरों और भूमाफिया तत्वों से मिलीभगत कर अवैध कॉलोनियों को बसाने में सहयोग करने के आरोप हैं। इसके साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिये अवैध कमाई करने और प्राधिकरण को आर्थिक क्षति पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है। विधायक का दावा है कि नोएडा के सेक्टर-145 स्थित डंपिंग ग्राउंड में रात के समय कचरे की अवैध बिक्री कर हर महीने लाखों रुपये की अवैध आय अर्जित की जा रही है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2022 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान भी गौरव बंसल पर भूखंड आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें निलंबित किया जा चुका है। इसके बावजूद, वर्तमान में उन पर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
विधायक मदन भैया ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, जांच अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी का तबादला किसी अन्य प्राधिकरण में किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो, और उनकी कथित नामी-बेनामी संपत्तियों की भी गहन जांच कराई जाए।
मामला सार्वजनिक होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर अभी तक न तो नोएडा प्राधिकरण की ओर से और न ही आरोपित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं कि इस गंभीर मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।