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श्रद्धा, स्मृति और संस्कारों की अमिट मिसाल बना मूर्ति स्थापना महोत्सव

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
विशेष रिपोर्ट | ग्राम डूंगरपुर रीलखा
ग्राम डूंगरपुर रीलखा में आज का दिन गांव के इतिहास में एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब स्वर्गीय रामचंद्र मुखिया, प्रेमवती देवी एवं गजेंद्र की स्मृति में भव्य मूर्ति स्थापना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली परंपरा, परिवार की एकता और संस्कारों की विरासत का जीवंत उदाहरण बन गया।
सुबह से ही गांव में विशेष उत्साह देखने को मिला। घर-घर में तैयारियां हुईं, मंदिर परिसर और कार्यक्रम स्थल को फूल-मालाओं, ध्वजाओं और रंगोली से सजाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंडितों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसमें गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक शामिल हुए। जैसे ही मूर्तियों का अनावरण हुआ, पूरे परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल छा गया।
इस पावन अवसर पर अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया। यमुना प्राधिकरण के ओएसडी मेहराम सिंह भी कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए पुष्प अर्पित कर प्रार्थना की। उनके साथ क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्राम प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने परिवार के इस पुनीत प्रयास की सराहना की।
इस आयोजन में आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोगों ने मूर्तियों के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और परिवार के प्रति संवेदना व सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम स्थल पर भावुक क्षण तब देखने को मिले, जब परिवार के सदस्यों ने अपने पूर्वजों के संघर्ष, संस्कार और योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम की अगुवाई परिवार के पुत्र महेंद्र कसाना, हेमराज कसाना ने की। उनके साथ पोते दिनेश कसाना, उधम कसाना, कपिल कसाना, संदीप कसाना, कैलाश कसाना, पंकज कसाना, अनुज कसाना तथा परपोते हर्ष कसाना, सुललड कसाना, हार्दिक कसाना, कालु कसाना, पुनित कसाना, गारविक कसाना ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया। तीन पीढ़ियों की सामूहिक सहभागिता ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, कथा-वाचन और प्रसाद वितरण हुआ। दोपहर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। गांव की महिलाओं ने भी सेवा और व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ग्रामीणों व अतिथियों ने इस आयोजन को संस्कारों की जीवंत मिसाल बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ते हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
डूंगरपुर रीलखा में संपन्न यह मूर्ति स्थापना कार्यक्रम श्रद्धा, एकता और स्मृति का ऐसा संगम बना, जो वर्षों तक लोगों के मन में प्रेरणा बनकर जीवित रहेगा।