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समाजवादी पार्टी ने प्रदेश सरकार के बजट को बताया ‘विदाई बजट’, किसानों और युवाओं की अनदेखी का आरोप

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“योगी सरकार का बजट पूरी तरह खोखला, जनता को फिर किया गुमराह” — सुधीर भाटी
Vision Live  / गौतमबुद्धनगर
उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए राज्य सरकार के बजट पर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के गौतम बुद्ध नगर जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी ने योगी सरकार के बजट को “पूरी तरह खोखला” करार देते हुए कहा कि यह बजट फर्जी आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है और प्रदेश की जनता को एक बार फिर गुमराह करने का प्रयास किया गया है।
सुधीर भाटी ने जारी बयान में कहा कि प्रदेश की जनता पहले से ही बेरोजगारी और महंगाई की दोहरी मार झेल रही है, लेकिन सरकार ने बजट में इन ज्वलंत मुद्दों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन की कोई स्पष्ट और प्रभावी योजना दिखाई नहीं देती, जबकि बेरोजगारी प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है।
किसानों की अनदेखी का आरोप
समाजवादी पार्टी ने बजट में किसानों की उपेक्षा का भी आरोप लगाया। भाटी ने कहा कि प्रदेश का किसान बढ़ती लागत, फसल के उचित दाम और कर्ज के बोझ से परेशान है, लेकिन बजट में किसानों को राहत देने के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूत किए बिना प्रदेश के विकास की बात करना केवल दिखावा है।
महंगाई पर सरकार घिरी
भाटी ने कहा कि रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महंगाई चरम पर है तो सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं?
“यह विदाई का बजट है”
अपने बयान में सुधीर भाटी ने कहा कि यह बजट जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में पूरी तरह विफल है और यह भाजपा सरकार की विदाई का बजट साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है और आगामी चुनावों में इसका असर साफ दिखाई देगा।
राजनीतिक माहौल गर्म
राज्य बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी का दौर जारी है। जहां सरकार इसे विकासोन्मुख और जनकल्याणकारी बजट बता रही है, वहीं विपक्ष इसे आंकड़ों की बाजीगरी और जमीनी हकीकत से दूर बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
प्रदेश की राजनीति में बजट को लेकर बढ़ता टकराव आने वाले समय में चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि बजट घोषणाएं जमीन पर कितना असर दिखाती हैं।