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तिरंगे की हर लहर में संकल्प: खांबी की तिरंगा यात्रा ने गांव को बना दिया चलता-फिरता गणतंत्र


 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ खांबी (हरियाणा)
जब राजधानी दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस की परेड राष्ट्र की सैन्य, सांस्कृतिक और तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन कर रही थी, उसी समय हरियाणा के खांबी गांव में राष्ट्रभक्ति का एक ऐसा दृश्य आकार ले रहा था, जो यह साबित करता है कि भारत का गणतंत्र केवल राजपथ पर नहीं, बल्कि गांव की गलियों में भी उतनी ही मजबूती से सांस लेता है। हिंदू जनजागृति मंच, खांबी के तत्वावधान में आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा ने पूरे गांव को राष्ट्रबोध के रंगों से सराबोर कर दिया।
यह आयोजन केवल एक परंपरागत यात्रा नहीं, बल्कि शहीदों की स्मृति, वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य के संकल्प का जीवंत संगम बन गया।
शहीद की भूमि से राष्ट्रभक्ति की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह शहीदी स्थल पर हुई, जहां संगठन के सभी कार्यकर्ता और ग्रामीण एकत्रित हुए। अमर शहीद युधिष्ठिर को पुष्पांजलि अर्पित कर, दीप प्रज्वलन किया गया और विधिवत तिरंगा ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान गूंज उठा। यह क्षण भावुक भी था और प्रेरणादायक भी — क्योंकि यहीं से यह संदेश गया कि गणतंत्र केवल उत्सव नहीं, बल्कि बलिदान की विरासत है, जिसे संभालना हम सभी का दायित्व है।
मढ़ी मंदिर से निकली राष्ट्रयात्रा
इसके पश्चात मढ़ी मंदिर से तिरंगा यात्रा का शुभारंभ हुआ। हाथों में लहराते तिरंगे, बच्चों की देशभक्ति गीतों से भरी आवाजें और युवाओं के गगनभेदी जयघोष — पूरे गांव को जैसे राष्ट्रमंच में बदल दिया गया। यात्रा बस स्टैंड, राम मंदिर, होली चौक, मथुरादास मंदिर और बी. वी. एन. स्कूल होते हुए पुनः मढ़ी मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
रास्ते भर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा की, घरों की छतों से तिरंगे लहराए गए और बुजुर्गों ने हाथ जोड़कर यात्रा का स्वागत किया। यह दृश्य बता रहा था कि राष्ट्रप्रेम किसी मंच का मोहताज नहीं होता — वह दिल से निकलता है।
एनसीसी कैडेट्स बने अनुशासन की मिसाल
तिरंगा यात्रा के अग्रिम मोर्चे पर बी. वी. एन. स्कूल के एनसीसी कैडेट्स की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। दया किशन, हैप्पी, दुष्यंत, मोनू और दिनेश के नेतृत्व में कैडेट्स ने अनुशासन, समर्पण और सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया। यह स्पष्ट संकेत था कि राष्ट्र की मशाल सुरक्षित हाथों में है।
इनकी रही प्रमुख भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में हिंदू जनजागृति मंच के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी रही। इनमें प्रमुख रूप से
बिशन, मोहन श्याम, मोहित मनोहर, लालचंद, सागर, संजय प्रजापति, राजेश, ताराचंद, गुरुदत्त, शिव, अनिल, पवन, धर्मेंद्र, मोनू, कुलदीप, जोगेंद्र राठौर, खेमचंद, पुनीत, रोहताश गोला, विनीत, रवि, रिंकू और सुनील सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
गणतंत्र का अर्थ: अधिकार नहीं, कर्तव्य
कार्यक्रम के समापन पर मीडिया प्रभारी भगवत प्रसाद शर्मा ने कहा कि भारत का गणतंत्र वीर शहीदों के त्याग से खड़ा हुआ है। आज आवश्यकता है कि हम अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी उतनी ही गंभीरता से निभाएं। उन्होंने मंच की ओर से संकल्प लिया कि राष्ट्र, संस्कृति और शहीदों के सम्मान में ऐसे आयोजन आगे भी निरंतर किए जाते रहेंगे।
दिल्ली की झाँकियों से गांव की चेतना तक
वक्ताओं ने इस अवसर पर दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड की झाँकियों का उल्लेख करते हुए कहा कि “विकसित भारत” केवल बड़ी इमारतों, तकनीक और योजनाओं से नहीं बनेगा, बल्कि गांव-गांव में जागरूक, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार होने से बनेगा। खांबी की तिरंगा यात्रा उसी विकसित भारत की जड़ में पानी देने जैसा प्रयास है।
"विजन लाइव" का विश्लेषण
खांबी की यह तिरंगा यात्रा एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संदेश थी —
कि जब तक गांवों में तिरंगा सम्मान के साथ लहराता रहेगा,
तब तक भारत का गणतंत्र अडिग, अचल और अमर बना रहेगा।