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टेक्नोलॉजी से टकराती सड़क सुरक्षा की बड़ी चुनौती


आवारा पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम — आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज का एआई पेटेंट बनेगा “लाइफ सेवर टेक्नोलॉजी”
  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
देश की सड़कों और हाईवे पर हर साल हजारों लोग आवारा पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। यह समस्या सिर्फ यातायात नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा एक राष्ट्रीय संकट बन चुकी है। इसी गंभीर चुनौती का तकनीकी समाधान सामने लाया है ग्रेटर नोएडा स्थित आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज ने, जिसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा महत्वपूर्ण पेटेंट प्रदान किया गया है।
🔹 जहाँ समस्या बड़ी, वहाँ समाधान स्मार्ट
आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज को मिला पेटेंट नंबर 577503 —
“AI Based System to Evade Stray Livestocks on Roads and Highways” —
दरअसल, एक ऐसा इंटेलिजेंट सिस्टम है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सड़क पर मौजूद आवारा पशुओं की पहचान करता है और समय रहते वाहन चालकों को अलर्ट करता है। इससे न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि अनगिनत जानें बचाई जा सकती हैं।
यह पेटेंट 5 मार्च 2022 को दाखिल किया गया था और अब इसे 20 वर्षों के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, जो इस तकनीक की उपयोगिता और नवाचार की मजबूती को दर्शाता है।
🔹 अकादमिक कैंपस से निकला जमीनी समाधान
इस पेटेंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल शोध पत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि रीयल लाइफ इम्पैक्ट पैदा करने की क्षमता रखता है। भारत जैसे देश में, जहाँ हाईवे पर आवारा पशु एक आम दृश्य हैं, यह तकनीक ट्रैफिक सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन सकती है।
🔹 इन इनोवेटर्स ने बदली तस्वीर
इस पेटेंट को विकसित करने वाली टीम में शामिल हैं:
श्री आगा असीम हुसैन
श्री मंवेन्द्र यादव
डॉ. मयंक गर्ग
श्री शाश्वत पांडेय
सुश्री दिव्या वर्मा
इन सभी ने मिलकर यह साबित किया कि भारतीय शिक्षण संस्थान भी वैश्विक स्तर की समस्या का समाधान दे सकते हैं।
🔹 आई.टी.एस बना इनोवेशन हब
यह उपलब्धि आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज में मौजूद मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और निरंतर मेंटरशिप का परिणाम है। यहाँ छात्रों और फैकल्टी को सिर्फ पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि सोचने, खोजने और पेटेंट कराने तक की पूरी यात्रा कराई जाती है।
🔹 निदेशक का विज़न
आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा के निदेशक डॉ. मयंक गर्ग ने इस उपलब्धि पर कहा:
“यह पेटेंट केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि समाज के लिए नवाचार करने की हमारी सोच का प्रतीक है। परिवहन सुरक्षा में एआई को शामिल कर हमारी टीम ने यह सिद्ध किया है कि अकादमिक रिसर्च भी राष्ट्रीय समस्याओं के ठोस समाधान दे सकती है।”
🔹 भविष्य की सड़कें होंगी सुरक्षित
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस एआई सिस्टम को स्मार्ट सिटी, नेशनल हाईवे अथॉरिटी और ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाए, तो यह भारत में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित हो सकता है।
👉 आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज की यह उपलब्धि न सिर्फ संस्थान के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश के लिए एक सुरक्षित और स्मार्ट भविष्य की ओर बढ़ता कदम भी है।