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भक्ति से सामाजिक एकता तक – बिरौडा में भागवत कथा बना जन-आस्था का उत्सव

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के ग्राम बिरौडा, सेक्टर पाई-1 स्थित बाबा मोहन राम मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का महापर्व बना दिया। व्यास पीठ से कथावाचक संगीता शास्त्री के मुखारविंद से जैसे ही राम जन्मोत्सव और सीता स्वयंवर का प्रसंग प्रारंभ हुआ, पूरा पंडाल भक्ति, आनंद और मंगल भावनाओं से भर उठा।
इस कथा का सबसे विशेष पहलू यह रहा कि श्रद्धालु केवल श्रोता नहीं बने, बल्कि भावनाओं से स्वयं कथा का हिस्सा हो गए। महिलाओं द्वारा गाए गए मंगल गीत, पुरुषों के जयघोष और बच्चों की उत्सुक आंखों ने स्वयंवर प्रसंग को सजीव कर दिया। पंडाल में बैठे हर व्यक्ति के चेहरे पर वही आनंद था, जो अयोध्या और मिथिला में उस युगांतकारी क्षण के समय रहा होगा।
राम जन्मोत्सव के प्रसंग पर जैसे ही प्रभु के अवतरण का वर्णन हुआ, पूरा वातावरण “जय श्री राम” के नारों से गूंज उठा। यह केवल धार्मिक उत्साह नहीं था, बल्कि उस विश्वास का प्रकटीकरण था कि आज भी भगवान राम की मर्यादा, सत्य और धर्म समाज को दिशा देने का काम करती है। कथा ने यह संदेश दिया कि प्रभु का अवतरण केवल इतिहास नहीं, बल्कि हर युग में अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
इस अवसर पर चैनपाल प्रधान, राकेश नंबरदार, प्रशांत, नरेंद्र मावी, ओमवीर प्रधान, रवि भाटी, कंवर सिंह भाटी, धर्मवीर नंबरदार, गोपी नंबरदार, अशोक भाटी, प्रमोद मुखिया, जितेंद्र भाटी, महावीर, रतिराम और संतराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को सामूहिक आस्था का रूप दे दिया। सभी ने एक स्वर में कथा को समाज में संस्कार, सद्भाव और एकता का माध्यम बताया।
बिरौडा की यह भागवत कथा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का जीवंत मंच बन चुकी है, जहां रामकथा सुनते हुए लोग अपने भीतर भी मर्यादा, प्रेम और कर्तव्य के भाव को अनुभव कर रहे हैं।