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ग्रामीण अस्तित्व की लड़ाई बना मनरेगा: आकलपुर से उठी हक़ की आवाज़

 
🔴 “मनरेगा पर संकट बनाम ग्रामीण अस्तित्व की लड़ाई”
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ आकलपुर (दादरी विधानसभा)
गाँवों में रोजगार नहीं, खेतों में मुनाफा नहीं और शहरों में काम की कोई गारंटी नहीं—ऐसे दौर में मनरेगा आज केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए जीने का आख़िरी सहारा बन चुका है। इसी हक़ की लड़ाई को आवाज़ देने आकलपुर पहुँचा जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर का “मनरेगा बचाओ संग्राम”।
पंचायत स्तरीय जागरूकता अभियान के तहत आयोजित इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि यह अब केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और सम्मानजनक रोजगार को बचाने की जंग है।
बैठक के संयोजक जिला कांग्रेस महासचिव दयानन्द नागर रहे, अध्यक्षता चरण सिंह आर्य ने की और संचालन मुकेश शर्मा ने किया।
🔥 “मनरेगा खत्म हुई तो गाँव उजड़ेंगे” – दीपक भाटी चोटीवाला
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने अपने संबोधन में भाजपा सरकारों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मनरेगा को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है ताकि गरीब अपनी आवाज़ न उठा सके।
उन्होंने कहा कि—
“मनरेगा गरीब, मजदूर, किसान और बेरोजगार युवाओं के लिए जीवन रेखा है। अगर यह योजना खत्म हुई तो गाँव से पलायन और गरीबी दोनों बढ़ेंगे।”
दीपक भाटी ने आरोप लगाया कि काम के दिन घटाए जा रहे हैं, मजदूरी समय पर नहीं दी जा रही और अब नाम बदलकर योजना को समाप्त करने की साजिश चल रही है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पंचायत से संसद तक इस लड़ाई को ले जाएगी।
⚠️ 100 दिन का काम नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा
दीपक भाटी चोटीवाला ने चेतावनी दी कि यदि बकाया मजदूरी का भुगतान, 100 दिन का रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था बहाल नहीं हुई, तो कांग्रेस को सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
🧱 “मनरेगा गरीब का हक़ है, भीख नहीं” – दयानन्द नागर
कार्यक्रम संयोजक दयानन्द नागर ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों को सम्मानजनक रोजगार देता है, लेकिन आज इसे पंचायत स्तर पर उलझाकर गरीबों को इससे दूर करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा—
“काम नहीं दिया जा रहा, मजदूरी नहीं मिल रही, यह गरीब के हक़ पर डाका है।”
👥 ग्रामीणों की खुली पीड़ा
बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर बताया कि कैसे काम न मिलने, भुगतान में देरी और भ्रष्टाचार ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। ग्रामीणों ने कांग्रेस के संघर्ष को समर्थन देने का भरोसा दिया और कहा कि मनरेगा बचेगी तो गाँव बचेगा।
📌 यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं, चेतावनी है
आकलपुर की इस पंचायत चौपाल ने साफ कर दिया कि मनरेगा को कमजोर करना अब सीधा ग्रामीण भारत के अस्तित्व पर हमला है। कांग्रेस का यह अभियान आने वाले दिनों में जिले के हर गांव में पहुंचकर सरकार के लिए चुनौती बनने वाला है।