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जब रंग बोल उठे — Art for Hope की कहानी बसंत पंचमी की सुबह, वंचित बच्चों ने कैनवास पर लिख दिया भविष्य

🎨  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा की उस सुबह हवा में बसंत की खुशबू थी। सरस्वती वंदना की धुन वातावरण को पवित्र कर रही थी और नॉलेज पार्क स्थित आईआईएमटी कॉलेज परिसर में एक अलग ही ऊर्जा थी। हाथों में ब्रश, आँखों में सपने और दिल में उम्मीद लिए 100 से अधिक बच्चे चुपचाप अपने कैनवास के सामने बैठे थे — जैसे कोई बड़ा सपना जन्म लेने ही वाला हो।
यह कोई साधारण प्रतियोगिता नहीं थी।
यह था Art for Hope — एक ऐसा मंच, जहाँ वंचित बच्चों की प्रतिभा को पहली बार खुलकर सांस लेने का अवसर मिला।
🌼 जहाँ रंग बने आवाज़
जैसे ही प्रतियोगिता शुरू हुई, सफेद काग़ज़ पर रंग उतरने लगे।
किसी ने नीला आसमान बनाया, किसी ने हरी धरती।
किसी ने स्कूल बनाकर उसमें अपने सपने टांके, तो किसी ने पेड़ों और पक्षियों से भरी दुनिया रच दी।
यह सिर्फ चित्र नहीं थे — ये बच्चों के मन के भीतर पल रही उम्मीदों की भाषा थी।
नन्हक फाउंडेशन ने बसंत पंचमी के दिन इस आयोजन को इसलिए चुना, क्योंकि यह दिन ज्ञान, कला और सृजन का प्रतीक है। और यही सृजन इन बच्चों की उंगलियों से बह रहा था।
🌟 जब समाज ने बच्चों के साथ बैठकर भविष्य देखा
इस आयोजन में समाज के कई जाने-पहचाने चेहरे बच्चों के बीच ज़मीन पर बैठे, उनके चित्र देखे, बातें कीं, मुस्कराए — और शायद पहली बार महसूस किया कि प्रतिभा कभी भी गरीबी से हारती नहीं है।
मुख्य अतिथि संध्या गौतम (मिसेज इंडिया 2025) जब बच्चों को सम्मानित कर रही थीं, तो मंच पर तालियों की गूंज सिर्फ जीत की नहीं, आत्मसम्मान की थी।
उनके शब्द साधारण नहीं थे —
“इन बच्चों की कला, हमारे समाज का आईना है।”
🤝 जो साथ आए, वही कहानी बने
कार्यक्रम में एक्टिव सिटीजन टीम के अध्यक्ष मनजीत सिंह, आलोक सिंह, हरेन्द्र भाटी, जी.एस. चंचलानी, आशीष शर्मा, संजय सिन्हा, आदित्य गिरियाल, संजय श्रीवास्तव, विकास गुप्ता, शुभ्रा गुप्ता, आराधना, विद्या, संतोष वर्मा जैसे समाजसेवियों की मौजूदगी ने आयोजन को एक सामूहिक आंदोलन का रूप दे दिया।
आईआईएमटी कॉलेज ने सिर्फ परिसर नहीं दिया, बल्कि अपने छात्र–छात्राओं के ज़रिए बच्चों का मनोबल बढ़ाया।
फेलिक्स हॉस्पिटल के डॉ. अंकित और उनकी टीम ने स्वास्थ्य सहयोग देकर यह संदेश दिया कि सेवा सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं होती।
अक्षरधाम मंदिर पाठशाला की प्रिंसिपल लक्ष्मी सूर्यकला ने बच्चों को आशीर्वाद दिया — जैसे कोई गुरु अपने शिष्य को दे।
🌸 साधना सिन्हा — एक सोच, जो मंच बन गई
इस पूरी कहानी की सूत्रधार थीं साधना सिन्हा, नन्हक फाउंडेशन की फाउंडर प्रेसिडेंट।
उन्होंने कहा:
“हम बच्चों को प्रतियोगिता नहीं, पहचान देना चाहते हैं। जब समाज उन्हें देखेगा, तभी वे खुद को देख पाएंगे।”
उनकी यह सोच ही Art for Hope बनी — एक दिन का आयोजन, लेकिन जीवन भर का असर।
🌺 जब पूजा बनी प्रार्थना, और प्रार्थना बनी संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर मां सरस्वती की पूजा की।
यह पूजा सिर्फ धार्मिक नहीं थी, यह एक सामाजिक प्रार्थना थी —
कि ये बच्चे आगे बढ़ें, पढ़ें, रचें और एक बेहतर समाज बनाएं।
प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ, लेकिन बच्चों के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह बताती थी —
यह अंत नहीं, शुरुआत है।
विजन लाइव का निष्कर्ष
Art for Hope एक इवेंट नहीं, एक एहसास है।
यह कहानी है उन हाथों की, जो खाली नहीं थे — बस देखे नहीं गए थे।
और उस दिन, ग्रेटर नोएडा में, समाज ने उन्हें देख लिया।