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बिसरख धाम में गुरुदीक्षा समारोह का दिव्य और भव्य आयोजन — गुरु–शिष्य परंपरा का अलौकिक पर्व




Vision Live –/  श्री मोहन दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट, बिसरख धाम, रावण जन्मस्थली, सेक्टर-1, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश

बिसरख धाम की पवित्र भूमि पर रविवार को गुरुदीक्षा समारोह अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। मार्गशीर्ष के इस शुभ माह में गुरु–शिष्य परंपरा के दिव्य मिलन को समर्पित यह आयोजन पूर्ण धार्मिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ, जिसने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत : श्रद्धा और परंपरा के साथ

शुभ दिवस रविवार की मंगल बेला में कार्यक्रम का प्रारम्भ प्रातः 10 बजे अतिथि स्वागत के साथ हुआ।
संतजनों, भक्तों और गणमान्य अतिथियों ने मंदिर प्रांगण में पहुँचकर गुरुदेव के दर्शन–सत्संग का लाभ लिया।

दोपहर 1 बजे सभी भक्तों को प्रसाद वितरण प्रारम्भ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ प्रसाद ग्रहण किया।


मार्गशीर्ष माह का पावन महत्व — गीता उपदेश की स्मृति

मार्गशीर्ष माह हिंदू सनातन संस्कृति में अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि —
इसी मार्गशीर्ष माह में भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया था।

उसी दिव्य ऊर्जा और परंपरा को आत्मसात करते हुए गुरुदीक्षा समारोह का आयोजन किया गया, जिससे यह दिवस और भी पावन और ऐतिहासिक बन गया।


संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति — आध्यात्मिक आभा का संचार

समारोह में वरिष्ठ संतजनों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को अत्यंत दिव्य बना दिया।
विशेष रूप से उपस्थित रहे —

  • महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज
  • महामंडलेश्वर स्वामी राजेशानंद योगेश्वर गिरि जी महाराज
  • साध्वी पूर्णिमा गिरि
  • तथा अन्य सम्मानित संतजन

संतों के आगमन से वातावरण में दिव्यता, शांति और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार हुआ।


पटाभिषेक, नामकरण एवं दीक्षा — दिव्य अनुष्ठानों का भव्य आयोजन

इस समारोह में बनारस से आई गुरुदेव की शिष्या
देवी विद्या गौतम
को गुरुदेव द्वारा—

  • पटाभिषेक,
  • नामकरण संस्कार,
  • दिव्य दीक्षा संस्कार

पूर्ण वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ प्रदान किये गए।

सभी संतजनों ने मिलकर देवी विद्या गौतम को सन्ताई चादर भेंट व आशीर्वाद प्रदान किया।

देवी विद्या गौतम ने गुरु-चरणों में नतमस्तक होकर गुरु पूजन, विशेष संकल्प तथा गुरु परंपरा को आगे बढ़ाने का दृढ़ निश्चय व्यक्त किया।


आचार्य अशोकानंद जी महाराज के पावन आशीर्वचन

पीठाधीश्वर अनंतश्रीविभूषित श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज ने अपने परम शिष्य स्वामी राजेशानंद योगेश्वर गिरि, साध्वी पूर्णिमा गिरी एवं अन्य भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा—

“गुरु-शिष्य परंपरा सदैव सद्बुद्धि, सदाचरण और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। दीक्षा केवल एक संस्कार नहीं, जीवन परिवर्तन का आरंभ है।”

महाराज जी के आशीर्वचन सुनकर उपस्थित भक्तगण भाव-विभोर हो उठे।


भक्तों और गणमान्यजनों की विशाल उपस्थिति

समारोह में बिसरख धाम व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे।
मुख्य रूप से उपस्थित रहे—

रामवीर शर्मा (उपाध्यक्ष ट्रस्ट),
नरेंद्र भाटी, नरेश भाटी,
अनिरुद्ध गांगुली, राकेश शर्मा,
संदीप शर्मा, गोपाल शर्मा,
देवेंद्र नागर (दुजाना),
पं. सुशील पांडे, पं. कृष्ण भारद्वाज,
दीपांशु शर्मा, अमर त्यागी,
संजय जैन, संजय भाटी,
हरेंद्र चैंपियन,
इंद्रपाल भाटी, विनोद कुमार,
सुधा गांगुली, सुनीता नागर,
गुड्डी आर्य (एडवोकेट),
रागनी सिंह, सरिता सती,
प्रीति अग्रवाल, क्षमा शर्मा,
प्रियंका त्यागी

आदि अनेकों श्रद्धालु एवं गणमान्यजन।

सभी ने मिलकर इस दिव्य आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।


समापन — आशीर्वाद और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ

कार्यक्रम के अंत में महाराज श्री ने सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए सुख, शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक प्रगति की मंगल कामना की।

पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में—
🕉️ ओम की ध्वनि,
🕯️ मंत्रोच्चार,
🌸 भजन-कीर्तन
की गूंज निरंतर सुनाई देती रही।

यह दिव्य दिन सभी भक्तों के लिए जीवनभर की पावन स्मृति बन गया।