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आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में पाइथन प्रोग्रामिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न



SOFTPRO INDIA के सहयोग से छात्रों को मिला प्रायोगिक और उद्योग आधारित प्रशिक्षण

   

Vision Live / ग्रेटर नोएडा
आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा संबद्ध विभागों द्वारा SOFTPRO INDIA के सहयोग से दो दिवसीय पाइथन प्रोग्रामिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को पाइथन की गहन अवधारणाओं, आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के निदेशक डॉ. मयंक गर्ग और डीन अकादमिक्स एवं प्रोफेसर, सीएसई–संबद्ध विभाग डॉ. विष्णु शर्मा के करकमलों द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।


रोहित कुमार (CTO, SOFTPRO INDIA) ने कराया प्रायोगिक प्रशिक्षण

कार्यशाला का संचालन SOFTPRO INDIA के मुख्य तकनीकी अधिकारी श्री रोहित कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने सहज और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को पाइथन की मूलभूत अवधारणाओं तथा उद्योग में इसके उपयोग से अवगत कराया।


कार्यशाला की प्रमुख विशेषताएँ

  • पाइथन का परिचय एवं आधुनिक तकनीकी वातावरण में इसकी भूमिका
  • हैंड्स-ऑन सेशंस:
    • पाइथन सिंटैक्स
    • डेटा टाइप्स
    • फंक्शन्स
    • लूप्स
    • फाइल हैंडलिंग
  • लघु परियोजनाएँ:
    • ऑटोमेशन
    • डेटा मैनिपुलेशन
    • NumPy, Pandas, Matplotlib का उपयोग
  • करियर मार्गदर्शन: उद्योगों में पाइथन के अवसर, उपयोग और भविष्य की संभावनाएँ

कार्यशाला में बी.टेक द्वितीय वर्ष के छात्र–छात्राओं तथा सीएसई विभाग के संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने विशेष रूप से हैंड्स-ऑन अभ्यास और रियल-टाइम उदाहरणों को अत्यंत उपयोगी बताया।


समापन समारोह और प्रमाणपत्र वितरण

कार्यक्रम का समापन डॉ. जया सिन्हा (एचओडी, सीएसई–एआईएमएल एवं डीएस) तथा डॉ. संध्या उमराव (प्रोफेसर, सीएसई) की उपस्थिति में हुआ। कार्यशाला पूर्ण होने पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
अंत में डॉ. जया सिन्हा द्वारा औपचारिक वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत किया गया।


यह दो दिवसीय कार्यशाला विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी सिद्ध हुई, जिसने अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम स्थापित किया।