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जिलेभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया छठ महापर्व


        विवेक जैन / बागपत
जिलेभर में आस्था, परंपरा और उल्लास के प्रतीक छठ महापर्व को सोमवार को बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया।
महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और अपने पुत्रों की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
पूर्वी समुदाय सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भी एक-दूसरे को छठ पर्व की शुभकामनाएँ दीं और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में भाग लिया।


ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मनाई गई आस्था की उत्सवधारा

बागपत शुगर मिल कॉलोनी स्थित माँ दुर्गा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
सुबह से ही महिलाएँ पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर एकत्र हुईं और ढोल-नगाड़ों की ताल पर मंगल गीतों के साथ छठ मैया की पूजा-अर्चना की।
सूर्य देव को विधि-विधानपूर्वक अर्घ्य अर्पित करने के बाद उन्होंने परिवार और समाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।


महिलाओं ने रखा निर्जल व्रत, मांगी संतान और परिवार की खुशहाली की कामना

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध समाजसेविका एवं हर्बल न्यूट्रिशन ट्रेनर श्रीमती मनोरमा श्रोती ने बताया कि छठ व्रत महिलाओं के अटूट विश्वास और संयम का पर्व है।
उन्होंने कहा —

“महिलाओं ने निर्जल रहकर सूर्य देव और छठ मैया से अपने बच्चों की लंबी आयु, परिवार की समृद्धि और सभी की मनोकामना पूर्ति की कामना की।”

व्रत के दौरान श्रद्धालुओं ने फल, मिठाई और ठेकुए का भोग लगाकर छठ मैया को प्रसन्न किया। व्रत पूर्ण होने के पश्चात सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाओं ने व्रत खोला और उपस्थित जनों में प्रसाद का वितरण किया।


पूरे जनपद में दिखा उत्सव का रंग

छठ पर्व की रौनक केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रही।
जिले के कल-कारखानों, कॉलोनियों और ग्रामीण अंचलों में भी लोगों ने उत्साहपूर्वक यह पर्व मनाया।
परिवारों ने अपने घरों में विविध पकवान तैयार किए और छठ की खुशियाँ साझा कीं।

इसके अतिरिक्त अनेक श्रद्धालु बागपत यमुना नदी तट और गौरीपुर पुल घाट पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और सूर्य उपासना की परंपरा को निभाया।


समापन

छठ महापर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था, अनुशासन और सामूहिकता भारतीय संस्कृति की जड़ में बसते हैं।
बागपत जिले में इस पर्व ने न केवल धार्मिक उत्साह जगाया, बल्कि समाज में एकता, ऊर्जा और सकारात्मकता का वातावरण भी निर्मित किया।