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डूंगरपुर रीलका गांव में सपेरा समुदाय को मिली बड़ी सौगात, शव दफनाने के लिए जमीन चिन्हित



मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
डूंगरपुर रीलका गांव में सपेरा (नाथ) समुदाय की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई। लंबे समय से समुदाय के लोग शव दफनाने के लिए जमीन चिन्हित न होने से परेशान थे। रविवार को 90 वर्षीय महिला धनवंती पत्नी बिच्छू नाथ के निधन के बाद समुदाय ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक कब्रिस्तान के लिए जगह नहीं मिलेगी, तब तक शव दफनाया नहीं जाएगा।

आंदोलन के बाद प्रशासन हरकत में

पूर्व में भी समुदाय कई बार धरना-प्रदर्शन कर कब्रिस्तान की मांग उठाता रहा था। मामला सामने आने पर किसान एकता महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश कसाना ने अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद दनकौर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच वार्ता

सूचना मिलते ही यमुना विकास प्राधिकरण के एसडीएम शिव अवतार सिंह, तहसीलदार मनोज कुमार, एसएम बीपी सिंह, सदर तहसील के लेखपाल जितेंद्र भाटी सहित प्रशासनिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। करीब दो घंटे तक चली वार्ता और समझाइश के बाद प्राधिकरण ने गांव के पूर्व दिशा में, सेक्टर-18 के समीप 2200 वर्गमीटर जमीन शव दफनाने के लिए चिन्हित की।

खुशी की लहर

जमीन मिलने के बाद सपेरा समुदाय ने मृतका के अंतिम संस्कार के लिए सहमति दी। इस मौके पर गांव के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें राजेंद्र प्रधान, देवेंद्र प्रधान, मास्टर नेपाल सिंह, उमेद कसाना, इंद्रजीत कसाना, संजय कसाना, ओमकार नाथ, पीतम नाथ, राजू नाथ, मंत्रर नाथ, बद्रीनाथ, महावीर नाथ आदि शामिल थे।

ग्रामीणों ने इसे समुदाय के लिए “बड़ी राहत और ऐतिहासिक निर्णय” बताया।