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"भोजपुरी को उसका हक दिलाकर ही रहेंगे!"


भोजपुरी भाषा को संविधानिक दर्जा दिलाने की मांग तेज — जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन
“भीख चाही ना कर्जा चाही, भोजपुरी के दर्जा चाही” का नारा गूंजा दिल्ली में

 असलम परवेज | नई दिल्ली

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और उसे संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर रविवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर भोजपुरी जनजागरण अभियान के बैनर तले एक विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और वक्ताओं ने सरकार से दो टूक सवाल किया — “देश में लगभग 20 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं, फिर भी इसे अब तक संवैधानिक मान्यता क्यों नहीं मिली?”

सभा को संबोधित करते हुए संगठन के पूर्व महासचिव डॉ. जनार्दन सिंह ने कहा,

"भोजपुरी सिर्फ भाषा नहीं, हमारी अस्मिता है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली-मुंबई तक हमारी मेहनतकश आबादी फैली है, लेकिन आज भी सरकार भोजपुरी को नजरअंदाज कर रही है।"

डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना (चंपारण), जो एक प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं, ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा,

"भोजपुरी बोलने वाली इतनी बड़ी आबादी को संवैधानिक दर्जा न देना भोजपुरी भाषी जनता के साथ क्रूर मजाक है।"

कार्यक्रम का संचालन कर रहे राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पुष्कर ने कहा कि यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है, और जब तक भोजपुरी को उसका हक नहीं मिल जाता, यह आंदोलन चलता रहेगा।

धरने में विशिष्ट अतिथियों और भोजपुरी समाज के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही, जिनमें शामिल थे:

  • डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह (नई दिल्ली)
  • धनंजय सिंह (संरक्षक, भोजपुरी जनजागरण अभियान)
  • बी.के. सिंह पटेल
  • प्रो. पी. राज सिंह (छपरा)
  • मूंगा लाल शास्त्री
  • मनीष श्रीवास्तव (कुशीनगर)
  • तौफीक अहमद खान (नोएडा)
  • डॉ. राकेश श्रीवास्तव
  • मणि भूषण शर्मा (गायक)
  • प्रभात त्रिपाठी, राहुल सिंह (गाजीपुर), संतोष यादव, दामोदर पांडेय, मेवालाल (बलिया), नूरैन आंसारी (गोपालगंज) समेत दर्जनों महिला कार्यकर्ता और सैकड़ों समर्थक।

धरना प्रदर्शन का मुख्य संदेश यही था —

"भोजपुरी को उसका हक दिलाकर ही रहेंगे!"