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शारदा मेडिकल कॉलेज में वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे पर जागरूकता सेमिनार, विशेषज्ञों ने दी जरूरी सलाह


Vision Live / ग्रेटर नोएडा
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च एवं सामान्य चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय परिसर में किया गया, जिसका उद्देश्य हेपेटाइटिस जैसे गंभीर लिवर रोग के प्रति जनसामान्य को सचेत करना और इससे बचाव के उपायों को प्रमुखता देना था।

इस वर्ष विश्व हेपेटाइटिस दिवस की थीम "चलो इसे तोड़ दें (Let's Break the Silence)" रखी गई है, जो इस बीमारी से जुड़े भ्रम और चुप्पी को तोड़कर जागरूकता की ओर कदम बढ़ाने का संदेश देती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता शारदा अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राममूर्ति शर्मा ने की। उन्होंने कहा,
"वर्तमान समय में लिवर से जुड़ी बीमारियाँ, विशेषकर हेपेटाइटिस, तेजी से बढ़ रही हैं। यह चिंता का विषय है कि अब युवा भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं। खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और समय पर जांच न कराना इसके प्रमुख कारण हैं। लिवर शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करता है, अतः इसकी देखभाल अत्यंत आवश्यक है।"

सेमिनार में शारदा अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. भूमेश त्यागी ने बताया,
"हेपेटाइटिस लिवर को कमजोर कर देता है जिससे पाचन क्रिया बाधित होती है। यदि छह महीने तक इसका उपचार नहीं किया गया, तो यह बीमारी गंभीर और जानलेवा रूप ले सकती है। हालांकि विशेष डाइट की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन खान-पान में संयम और स्वच्छता जरूरी है।"

इस अवसर पर डॉक्टरों ने हेपेटाइटिस के लक्षण, पहचान, जांच के तरीके और समय रहते उपचार की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि संक्रमण से बचाव के लिए साफ पानी, सुरक्षित भोजन और टीकाकरण अहम भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. ए.के. अग्रवाल, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. निखिल गुप्ता सहित ग्रेटर नोएडा और आसपास के विभिन्न अस्पतालों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने विचार साझा किए।

सेमिनार में मेडिकल छात्रों, आम नागरिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और शहर के चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं भी जागरूक रहेंगे और दूसरों को भी समय रहते लक्षण पहचानने और इलाज के लिए प्रेरित करेंगे।