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अमर शहीद मंगल पांडे की जयंती पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि, आज़ादी के संघर्ष की दी प्रेरणादायक सीख



Vision Live/ Greater Noida 
जिला कांग्रेस कमेटी गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में आज ग्राम सादुल्लापुर स्थित बिसरख ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय पर भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत अमर शहीद मंगल पांडे की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामवासियों ने मंगल पांडे के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें कृतज्ञतापूर्वक याद किया।

कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वर्ष 1857 की क्रांति में मंगल पांडे की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 10 मई 1857 को मेरठ छावनी में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर स्वतंत्रता आंदोलन की पहली चिंगारी जलाई थी, जिसने आगे चलकर आजादी की ज्वाला का रूप लिया।

✳️ मंगल पांडे स्वतंत्रता आंदोलन की नींव थे: निशा शर्मा

जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष निशा शर्मा ने कहा,

"बचपन से किताबों और कहानियों में वीर मंगल पांडे की बहादुरी सुनी है। वे भारत की आज़ादी की नींव रखने वाले सच्चे सेनानी थे। हमें गर्व है कि हमारी धरती ने ऐसे सपूत को जन्म दिया।"

✳️ उनकी वीरता से लाखों क्रांतिकारी प्रेरित हुए: विजय नागर

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय नागर ने अपने संबोधन में कहा,

"स्वर्गीय मंगल पांडे आज़ादी के लिए प्राण देने वालों के आदर्श बन गए। उनकी प्रेरणा से न जाने कितने बलिदानी आगे आए और देश को आज़ाद कराने के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।"

✳️ तानाशाही और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना होगा: मुकेश शर्मा

जिला संगठन प्रभारी उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा ने कहा कि

"आज हम सिर्फ श्रद्धांजलि देने नहीं आए हैं, बल्कि यह संकल्प लेने आए हैं कि तानाशाही, अन्याय और दमन के विरुद्ध संघर्ष करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।"


👥 उपस्थित रहे गणमान्य कार्यकर्ता

कार्यक्रम में विजय नागर, निशा शर्मा, मुकेश शर्मा, सुबोध भट्ट, रन सिंह प्रधान, भूमेश नागर, सरजीत मैनेजर, चौधरी रूमाल, राजे नागर, ईश्वर चंद, हंसराज एडवोकेट, राजे मुखिया, रामबीर वकील, महिपाल, भोला प्रधान, पप्पू प्रधान, रतन हवलदार, सुमित, रामपाल सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता व स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।



🔻 नवयुवकों को क्रांति के मूल्यों से जोड़ने का प्रयास

कार्यक्रम का उद्देश्य न सिर्फ श्रद्धांजलि देना था, बल्कि मंगल पांडे जैसे क्रांतिकारियों के मूल्यों और बलिदानों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना भी था, ताकि आज़ादी की भावना को जीवित रखा जा सके।