"एक सफल वकील या न्यायाधीश वही बनता है, जो हर तथ्य को ध्यान से सुनता और समझता है" – जस्टिस बिंदल
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ग्रेटर नोएडा
शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में शुक्रवार को ‘श्री आनंद स्वरुप गुप्ता मेमोरियल लॉ लेक्चर सीरीज’ की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल के प्रेरणादायी भाषण के साथ हुई। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक मूट कोर्ट का उद्घाटन भी किया।
छात्रों को संबोधित करते हुए जस्टिस बिंदल ने कहा, “एक अच्छा वकील या न्यायाधीश बनने के लिए हर तथ्य को ध्यान से सुनना, समझना और उस पर तार्किक सोच विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने युवाओं में घटते एकाग्रता स्तर पर चिंता व्यक्त की और डिजिटल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी।
उन्होंने छात्रों से पढ़ने की आदत विकसित करने और वैचारिक स्पष्टता को बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता जताते हुए एक ऐसा ढांचा तैयार करने की बात कही जो प्रतिभा पलायन को रोके और विदेशी छात्रों को भारत की ओर आकर्षित करे।
जस्टिस बिंदल ने कानूनी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा, “AI से बदलाव तो आ रहे हैं लेकिन यह मानव विवेक और न्यायिक निर्णय का विकल्प नहीं हो सकता, खासकर न्यायिक फैसलों के मामले में।”
उन्होंने शारदा विश्वविद्यालय के मूट कोर्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसा कोर्ट उन्होंने देश के किसी और विश्वविद्यालय में नहीं देखा। साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों की चर्चा करते हुए छात्रों को अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में उपस्थित शारदा विश्वविद्यालय के चांसलर पी.के. गुप्ता ने छात्रों से कहा, “आप सिर्फ वकील नहीं, देश के प्रहरी और रक्षक हैं। वकील कभी रिटायर नहीं होता, वह जीवन भर समाज सेवा करता है।” उन्होंने तुलनात्मक विधियों के अध्ययन से वैश्विक सोच विकसित करने और बहुआयामी कानूनी दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
इस अवसर पर प्रो चांसलर वाई.के. गुप्ता, वाइस चांसलर सिबाराम खारा, प्रो वाइस चांसलर डॉ. परमानंद, डीन डॉ. ऋषिकेश दवे, डीन रिसर्च डॉ. भुवनेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के डीन, एचओडी, शिक्षाविद एवं छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने जस्टिस बिंदल से प्रश्न पूछकर संवाद स्थापित किया, जिस पर उन्होंने खुलकर मार्गदर्शन दिया।