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बिहार में सामाजिक न्याय की बहस फिर गरमाई, आरक्षण की पुनर्रचना की मांग


"2015 में अतिपिछड़ा सूची में शामिल की गई जातियों को बाहर करे सरकार" — RPI प्रदेश अध्यक्ष श्याम नंदन ठाकुर

    असलम परवेज/ (पटना) बिहार
राष्ट्रीय रिपब्लिकन पार्टी (RPI) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष श्याम नंदन ठाकुर ने शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य सरकार से मांग की कि 2015 में अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) की सूची में शामिल की गई जातियों को सूची से बाहर किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि इससे वास्तविक रूप से वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है।

ठाकुर ने कहा, “अति पिछड़ा वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुसार शासन और प्रशासन में भागीदारी मिलनी चाहिए। लेकिन 2015 में जिन जातियों को सूची में जोड़ा गया, उन्होंने इस वर्ग का प्रतिनिधित्व कमजोर कर दिया है और आरक्षण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।”

उन्होंने 1978 में कर्पूरी ठाकुर द्वारा प्रस्तावित आरक्षण नीति को याद करते हुए कहा कि "कर्पूरी जी ने सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी थी — जिसमें पिछड़ा वर्ग को 8%, अति पिछड़ा वर्ग को 12%, सर्वण गरीबों को 3% और महिलाओं को 3% आरक्षण देने का प्रस्ताव था। कुल मिलाकर यह 26% का आरक्षण कोटा था, जिसे जनसंघ और आरएसएस ने कभी स्वीकार नहीं किया।”

श्याम नंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में ‘अति पिछड़ा वर्ग’ की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और मुलायम सिंह यादव को कभी ‘जिन्न’ कहा गया था, लेकिन इन नेताओं ने अति पिछड़ों की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया।”

उन्होंने मंडल आयोग की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1979 में जब मंडल आयोग गठित हुआ और 1989 में जब राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी, तो 1990 में 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया गया — यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ी जीत थी।

लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस ने मंडल कमीशन की नीतियों को रोकने का प्रयास किया, जब लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथ यात्रा निकालकर मंडल की राजनीति को "कमंडल" में बदलने का प्रयास किया। इससे न केवल मंडल आयोग के प्रभाव को कमजोर किया गया, बल्कि सामाजिक न्याय की राजनीति भी प्रभावित हुई।

ठाकुर ने दोहराया कि आज जरूरत है सटीक जातिगत जनगणना और आरक्षण की पुनर्व्यवस्था की, ताकि वास्तविक वंचित वर्गों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अति पिछड़ा वर्ग अपनी हक की लड़ाई को लेकर पूरी एकजुटता से खड़ा होगा और "बिहार की राजनीति में उसकी मजबूत भागीदारी बनी रहेगी।”

पत्रकार वार्ता का उद्देश्य स्पष्ट था — सामाजिक न्याय की लड़ाई को फिर से धार देना और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को मजबूती से रखना।