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गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित संगोष्ठी का आयोजन


— महाविद्यालय प्रांगण में गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत


Vision Live/ Dankaur 
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाविद्यालय प्रांगण में एक संक्षिप्त, किंतु विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. राजीव उर्फ पिंटू के नेतृत्व में, महाविद्यालय के सचिव रजनीकांत अग्रवाल और प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय परिसर स्थित गुरु द्रोणाचार्य जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से की गई। सचिव रजनीकांत अग्रवाल और प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने शुभारंभ किया।

डॉ. राजीव ने गुरु के मानसिक व आध्यात्मिक पक्ष पर डाला प्रकाश

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. राजीव उर्फ पिंटू ने भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान के प्रदाता नहीं, बल्कि शिष्य की चेतना को जाग्रत करने वाले पथप्रदर्शक होते हैं।

रामायण व महाभारत के संदर्भों से प्राचार्य ने गुरु की भूमिका को किया स्पष्ट

प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने रामायण कालीन गुरु परंपरा तथा महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरु का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि नैतिक, राजनीतिक व सामाजिक मार्गदर्शन भी होता है।

उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता ने गुरु को बताया अंधकार में प्रकाश की किरण

उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता ने गुरु की समाज में भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु वह दीप हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर समाज को उजास प्रदान करते हैं।

छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की उपस्थिति से कार्यक्रम रहा सफल

संगोष्ठी में महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. देवानंद सिंह, डॉ. शिखा रानी, डॉ. कोकिल, डॉ. संगीता रावल, डॉ. सूर्य प्रताप राघव, अमित नागर, शशि नागर, काजल कपासिया, डॉ. अनुज कुमार भड़ाना, डॉ. रेशा, डॉ. नाज परवीन, डॉ. प्रशांत, डॉ. अजमत आरा, डॉ. रश्मि जहां, डॉ. प्रीति रानी सेन, महिपाल सिंह, चारु कुमारी, रश्मि शर्मा, रुचि शर्मा, अखिल कुमार, डॉ. निशा शर्मा, प्रीति शर्मा आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का समापन गुरु परंपरा के सम्मान और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ किया गया।