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57 वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला - स्प्रिंग 2024 ,का चौथा दिन


उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई, निवेश प्रोत्साहन, नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी'ने मेला का दौरा कर प्रदर्शकों से संवाद किया और प्रदर्शित उत्पादों की विविधता और सुरुचिपूर्ण ढंग से उनके प्रदर्शन और आकर्षण की सराहना की
Mohammad Ilyas-Dankauri/Greater Noida 
आईएचजीएफ दिल्ली मेला- स्प्रिंग 2024 का 57वां संस्करण 6 से 10 फरवरी 2024 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन अपने अंतिम दो दिनों में व्यवसायिक पूछताछ को गति देने, ऑर्डर को अंतिम रूप देने और नमूना संग्रह की दिशा में पूरी गति से आगे बढ़ रहा है।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के अध्यक्ष दिलीप बैद ने इस असर पर साझा किया, “उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई मामले, निवेश प्रोत्साहन मामलों के कैबिनेट मंत्री  नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' की आज आईएचजीएफ दिल्ली मेले में गरिमामयी उपस्थिति रही। उपस्थिति के साथ ही उन्होंने हस्तशिल्प क्षेत्र की ताकत को प्रदर्शित करने वाली असाधारण प्रस्तुति के लिए ईपीसीएच को हार्दिक बधाई दी। प्रदर्शकों के साथ बातचीत करते हुए, उन्होंने प्रदर्शित उत्पादों की विविध श्रृंखला की तारीफ की। उन्होंने नवाचार के हिसाब से बने उत्पादों को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया क्योंकि वे मैन्यूफैक्चरिंग में भारत की दक्षता का प्रदर्शन करते है। साथ ही ये उत्पाद त्रुटिहीन होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय रुझानों से मेल खाते हैं।
आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, “पहले तीन दिनों के दौरान अच्छी संख्या में खरीदारों ने मेले का दौरा किया और मेले में अपने नियमित और नए आपूर्तिकर्ताओं के साथ ऑर्डर देने में अपनी रुचि साझा की। कई पुराने और नए खरीदार हमारे आयोजन का हिस्सा बने हैं। यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि हमारे क्रेताओं और संरक्षकों की अगली पीढ़ी आईएचजीएफ दिल्ली मेले के साथ अपनी सोर्सिंग यात्रा शुरू कर रही है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट हमारे हस्तशिल्प उद्योग के दूसरी और तीसरी पीढ़ी के निर्यातकों के साथ इन युवा खरीदारों के बीच नए व्यापारिक संबंधों की शुरुआत का गवाह है। इस तरह हमारा वैश्विक परिवार बढ़ रहा है।"
ईपीसीएच मेलों को इसके पहले संस्करण से ही समर्थन और संरक्षण देते आ रहे इयान स्नो के प्रतिनिधि के तौर पर मेले में यू.के. से आए डेज़ी स्नो और स्कॉट हिरोन ने कहा कि इस मेले में आना उनके लिए 'घर' आने जैसा है और वे इससे बहुत खुश हैं। वह कहती हैं, “मैंने अपने पिता के साथ खुद को भारत के होम वेयर और फ़र्नीचर उद्योग में डुबो दिया है, जिसकी जड़ें मेरी अंग्रेजी विरासत में हैं। कारीगरों के साथ काम करते हुए, मैंने उन्हें रीसाइकल्ड कच्चे माल का उपयोग को प्रोत्साहित किया। ऐसा करके मैंने पारंपरिक शिल्प को स्थायी रूप से संरक्षित किया है। विश्व स्तर पर काम करते हुए, मैंने सचेत उपभोग की वकालत करते हुए भारतीय शिल्प कौशल की सुंदरता को साझा किया है।" 
अमेरिका से आए खरीदार मारिया और डेविड,  शिल्प कौशल की समझने और उसके मूल्य को पहचानने वाले अपने ग्राहक आधार की मांग को पूरा करनेके लिए उच्च-स्तरीय और प्रीमियम टेबल लिनेन और रजाई की तलाश कर रहे थे। उन्होंने बताया,"हम व्यक्तिगत कनेक्शन के मूल्य में विश्वास करते हैं, यही कारण है कि हम अपने आपूर्तिकर्ताओं और उनकी टीमों के साथ संबंध स्थापित करने के लिए यहां मौजूद हैं।" 
अमरीका से ही आए एक अन्य खरीदार, टिम ओ हर्न ने कहा, “मेरी कंपनी सुंदरता गुणवत्ता, शिल्प कौशल और स्थायी शैली के साथ ईमानदार लक्जरी को परिभाषित करने का काम करती है। यही कारण है कि मैं यहां खूबसूरत साज-सज्जा वाले उत्पादों लिए आया हूं। मैं कुछ बैगों के लिए डील फाइनल कर रहा हूं। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है”। जर्मनी से आए क्रेता जूलिया और डैनियल मेले के नेविगेशन और डिस्प्ले के प्रसार से काफी खुश दिखे, उन्होंने साझा किया, “हम हस्तनिर्मित कश्मीरी उत्पादों का व्यापार करते हैं और इस श्रेणी में नए भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की तलाश करते हैं। भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और हाथ से बुनी गई तकनीकों से प्रभावित होकर, हम अपने ग्राहकों के लिए अपनी पेशकशों को बढ़ाते हुए साझेदारी बनाने के लिए उत्सुक हैं।
ईपीसीएच के वाइस चेयरमैन (द्वितीय) डॉ. नीरज खन्ना ने बताया, “इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट के 16 बड़े हॉलों में 14 विविध उत्पाद श्रेणियों की विशेषता वाला यह मेला नियमित संरक्षकों और पहली बार व्यापार करने आए आगंतुकों दोनों के लिए प्रेरणा और उत्साह का स्रोत बना हुआ है। यहां, शिरकत कर रहे लोगों को निर्माताओं के साथ जुड़ने, उनसे प्रेरणा लेने और भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले निर्माताओं के व्यापक स्पेक्ट्रम से शिल्पों और उत्पादों को खरीदने का अवसर मिलता है। कई लोगों के लिए, यह मेला नवीनता और कलात्मकता के एक जीवंत केंद्र के रूप में कार्य करता है। यह आयोजन सदाबहार क्लासिक्स और समकालीन प्रभावों का एक सहज मिश्रण प्रदर्शित करता है। संक्रमणकालीन तत्वों से लेकर सुंदर सरल लेकिन अप्रत्याशित रूप से प्रकृति और रोजमर्रा के अनुभवों से प्रेरित डिजाइनों तक, मेला शिल्प कौशल और रचनात्मकता के क्षेत्र के माध्यम से एक मनोरम यात्रा की पेशकश कर रहा है।
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक,  आर. के वर्मा ने इस मौके पर साझा किया "आज 'क्रिएटिंग ऑनलाइन प्रेजेंस थ्रू इफेक्टिव डिजिटल मार्केटिंग टेक्नीक्स' और 'एमर्जिंग ट्रेंड्स ऑफ सायबर सिक्योरिटी चैलेंजेस एंड सिक्योरिटी सर्विसेज इन डिजिटल एरा' विषयक सेमिनारों में वरिष्ठ उद्योग विशेषज्ञों ने मार्केटिंग, डिजिटल मार्केटिंग और कॉर्पोरेट संचार, डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा के अनुप्रयोग, शीर्ष 7 साइबर सुरक्षा कार्रवाइयां, कार्यस्थल पर साइबर सुरक्षा, कानूनी और नियामक अनुपालन,आदि को समझाने के साथ-साथ उपायों के बारे में जानकारी साझा की। ”
आईएचजीएफ दिल्ली मेला-स्प्रिंग 2024 की मेला अध्यक्ष, श्रीमती प्रिया अग्रवाल ने इस विषय को विस्तार देते हुए कहा, “सचित्र प्रस्तुतियों और बातचीत के साथ इन इंटरैक्टिव सत्रों में कई उपस्थित लोग थे जिन्होंने दी जाने वाली सूचना और अपडेट से लाभ उठाया। वहीं दूसरी ओर आयोजन के स्पेक्ट्रम को पूरा करते रैंप शो ने विभिन्न उत्पादों जैसे बैग, सामान, रिसॉर्ट/लाउंज वियर, शॉल और स्टोल और आभूषण के लिए व्यावहारिक और उपभोक्ता के हिसाब से कई शानदार कॉन्सेप्ट पेश किए। 
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक  आर.के वर्मा ने बताया कि ईपीसीएच दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में  विदेशों में भारत की छवि और होम,जीवनशैली,कपड़ा, फर्नीचर और फैशन आभूषण और सहायक उपकरण के उत्पादन में लगे क्राफ्ट क्लस्टर के लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभाशाली हाथों के जादू की ब्रांड इमेज बनाने के लिए जिम्मेदार एक नोडल संस्थान है। इस अवसर पर ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री आर के वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 30,019.24 करोड़ रुपये (3,728.47 मिलियन डॉलर) रहा।