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चार राज्यों के चुनाव परिणाम:- पानी में गई भैंस

चौधरी शौकत अली चेची
राजस्थान समेत चार राज्यों के चुनाव परिणाम को देखकर साफ हो गया कि कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष का सुपड़ा ही साफ हो गया यानी कहें कि गई भैंस पानी में। चार राज्यों के चुनाव परिणाम के आंकड़ों के मोटे तौर पर देख ले तो पता चलता है कि कांग्रेस के कुल 4,90,69,462 वोट,   भाजपा के कुल 4,81,29,325 वोट, मध्यप्रदेश कांग्रेस - 1,75,64,353 भाजपा - 2,11,13,278, राजस्थान:कांग्रेस -1,56,66,731,भाजपा - 1,65,23,568,तेलंगाना:कांग्रेस - 92,35,792,भाजपा -32,57,511,छत्तीसगढ़:कांग्रेस - 66,02,586,भाजपा - 72,34,968, छत्तीसगढ़:कांग्रेस 42.23%,भाजपा 46.27% ,मध्यप्रदेश: कांग्रेस 40.40%, भाजपा 48.55% ,राजस्थान:कांग्रेस 39.53%,भाजपा 41.69% ,तेलंगाना:कांग्रेस 39.40%,भाजपा 13.90%
कांग्रेस की तीन राज्यों में हार  मगर बीजेपी से लगभग 10 लाख वोट ज्यादा ,राजस्थान 2% छत्तीसगढ़  4% का अंतर
मध्यप्रदेश में भाजपा 48% वोट  कांग्रेस  40.5% वोट कहां हुई चूक। बीजेपी ने सबसे ज्यादा ओबीसी को टिकट दिया। क्षेत्रीय पार्टियों ने वोटो में सेंध लगा दी। शिक्षा, चिकित्सा, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, जाति धर्म, विशेष की द्वेष भावना ,जहरीले बयान, पुराने जख्मों को ताज़ा करना, धार्मिक मुद्दे, अंधभक्ति एवं गोदी मीडिया ,ईवीएम मशीन आदि मुद्दों से अलग हटकर  मुख्य बिंदु  बीजेपी एवं आरएसएस के देश में लगभग 14 करोड सक्रिय सदस्य कार्यकर्ता बताए जाते हैं । कांग्रेस के लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य कार्यकर्ता बताए जाते हैं। बीजेपी का हर जाति ,धर्म का पदाधिकारी हर गली मोहल्ले गांव शहर में तथा देश में हर जगह  आसानी से नजर आ जाएगा, लेकिन कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता पदाधिकारी बहुत कम मात्रा में दिखाई देते हैं। क्षेत्रीय पार्टियों का भी यही हाल है । समझना बड़ा आसान है  बीजेपी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी  ,नेता ग्राउंड पर हर जगह नजर आते हैं ।  बीजेपी का लगभग 30% वोट फिक्स है। विपक्षी पार्टियों का एक साथ चुनाव नहीं लड़ने से बीजेपी को लाभ मिल रहा है।  उदाहरण के तौर पर 14 करोड़ बीजेपी आरएसएस के सक्रिय सदस्य या पदाधिकारी सीधा सा फार्मूला है पति-पत्नी दोनों का वोट शेयर  28 करोड़ इसके बावजूद 10% से 15% न्यूट्रल वोटर जो दारू की बोतल चंद रुपए सूट साड़ी में अपने वोट को कहीं भी डाल देता है। उसको पकड़ने में बीजेपी का जमीनी कैडर मजबूत है 
देश की लगभग 50% जनता जागरुक नहीं होने के कारण निजी स्वार्थ एवं अज्ञानता या अंधभक्ति में अपने वोट को बिखेर देती है और अपनी ही बर्बादी पर खुशी होकर नाच रही है। जागरूक चतुर चालाक देश की लगभग 15% आवाम मौज मस्ती से गुजर बसर कर रही है ।
झूठ गुमराह नफरत के दलदल में फसकर वोट देने वाली जनता अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर ठोकर खा रही है। उम्मीद रखने वालों को बुरा भला कह रही है।  देश की लगभग 70% जनता गलत मानी जाए तो कोई बुराई नहीं जो अपने असल अधिकारों एवं जागरूकता से भटक रही है राजनीतिक पार्टियों को गलत कहना ही समझदारी मान रही है। सत्ता में आने के लिए नेता वोट के लिए जनता पर जाल बिछाते  है और छूरी खरबूजे जैसा हाल जनता का हो रहा है । टैक्स, वेट ,जीएसटी आदि से सरकारी खजाना भरा जाता है जिसमें सभी देशवासियों की भागीदारी होती है। संविधान ने सभी को सम्मान अधिकार दिया है ,लेकिन जिसे हम चुनते हैं, वही हमें धुनते है ।  नेता का कान जनता के हाथ में होता है लेकिन जनता का कान नेता के हाथ में है। अच्छे लोगों की कोई कदर नहीं और बुरे लोगों को सबर नहीं । अंधभक्ति मैं लीन लोगों को खबर नहीं । एससी एसटी ओबीसी एवं किसानो जागो भारत देश एवं सम्मान अधिकार सभी का है (जय हिंद)। 
लेखक:-चौधरी शौकत अली चेची,राष्ट्रीय महासचिव भाकियू (बलराज) है।