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आयुष मंत्री डॉ दया शंकर मिश्र ‘दयालु’ द्वारा अंतरराष्ट्रीय समारोह का उद्घाटन


विजन लाइव/ गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय
मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित स्वास्थ्य मनोविज्ञान के भारतीय संघ का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 22 दिसंबर से 24 दिसंबर, 2022 तक आयोजित होने जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय है "मानसिक स्वास्थ्य और पोस्ट कोविड परिदृश्य में कल्याण: ए वैश्विक परिप्रेक्ष्य। ६०० से अधिक लोग समारोह का हिस्सा बनने जा रहे हैं। 
समारोह के प्रथम दिन पर माननीय मंत्री, डॉ. दया शंकर मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री ने भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी के 7वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन का उद्घाटन किया, जो कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले भारत के जी20 प्रेसीडेंसी इवेंट्स के तहत सूचीबद्ध है।
उनके साथ मंच की शोभा बढ़ाने के लिए कांफ्रेंस के अध्यक्ष, प्रोफेसर आनंद कुमार; प्रो. रवींद्र
कुमार सिन्हा माननीय कुलपति; श्री धीरेन्द्र
सिंह माननीय विधायक, जेवर विधान सभा; प्रो आनंद कुमार
त्यागी माननीय कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,
वाराणसी; डॉ बंदना पांडे, डीन; डॉ. विश्वास त्रिपाठी, रजिस्ट्रार, जीबीयू; सम्मेलन निदेशक, डॉ आनंद प्रताप सिंह; और डॉ. अहोक राय, महासचिव ICIAHP उपस्थित रहे।
डॉ दया शंकर मिश्रा ने कोरोना काल में आयुर्वेद की प्राचीन औषधियों के प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मेलन स्वास्थ्य के पहलू से जुड़ा है। 
डॉक्टर आर के सिन्हा, कुलपति जीबीयू, ने वर्तमान में चिकित्सा पद्धति में तकनीकी इस्तेमाल पर जोर दिया। आनंद कुमार त्यागी  ने मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग पर जोर दिया  की कैसे मानसिक स्वास्थ लाभ कई लोगों को पहुंचाया जा सकता है। बंदना पांडे, अधिष्ठाता, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज ने मनोविज्ञान एवम मानसिक स्वास्थ विभाग, जीबीयू की पहल की तारीफ की एवम विभाग के सभी छात्र छात्राओं एवम संकाय का मनोबल बढ़ाया।


और मानसिक स्वास्थ्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आनंद प्रताप सिंह ने स्वागत भाषण दिया और सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और मुख्य अतिथियों का सम्मान किया। डॉ विश्वास त्रिपाठी, रजिस्ट्रार, जीबीयू ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया और सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का समारोह में हिस्सा लेने के लिए धन्यवाद दिया। यह सम्मेलन भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, कनाडा और फ्रांस जैसे 5 से अधिक देशों के युवा सोच को एक साथ लाने कि पहल है जो मानवता के सामने आने वाली कठिन समस्याओं के लिए नवीन मनो-सामाजिक-आधारित समाधानों की संकल्पना करने और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करेगी।