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गैलंट्री अवॉर्ड विनर कर्नल डॉक्टर जेपी सिंह ने विद्यालय में विद्यार्थियों से मिल कर उन्हे सम्बोधित किया

विजन लाइव/ ग्रेटर नोएडा 
आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत सीबीएस के अभियान  द्वारा चलाए जा रहे अभियान वीरगाथा के द्वितीय एडिशन के अंतर्गत सरदार पटेल विद्यालय में
गैलंट्री अवॉर्ड विनर कर्नल डॉक्टर जेपी सिंह ने विद्यालय में विद्यार्थियों से मिल कर उन्हे सम्बोधित किया। बच्चों को संबोधित करते हुए डॉ सिंह ने सशस्त्र बलों तथा अर्धसैनिक बल में अंतर समझाया और अपनी सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर हाशिमारा में आठ डोगरा में अपनी पहली पोस्टिंग  से लेकर के कर्नल तक के अपने 37 साल के विशाल अनुभव तथा विभिन्न तैनातियों पर चुनौतियों से भरे अपने सफर को बच्चों के साथ साझा किया। अपने संबोधन में उन्होंने जम्मू और कश्मीर में अपनी पोस्टिंग की एक घटना का भी जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने एक आतंकवादी द्वारा एक बस को बम का निशाना बनने से बचाया। पकडे गए आतंकवादी  द्वारा आत्मघाती हमले में उनके रेजिमेंट के एक हवलदार ठाकुरदास वीरगति को प्राप्त हो गए तथा वो खुद भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
उनके संबोधन के बाद बच्चों ने रूचि दिखाते उनके दिए गए ब्योरे पर उनसे कई सवाल किए जिनका की जवाब डॉ सिंह ने बड़े ही मनोभाव से दिया।
इसके बाद कर्नल डॉक्टर जेपी सिंह ने बच्चों को एक प्रेजेंटेशन के जरिए सेना में भर्ती होने के जरूरी नियमों और जरूरतों के बारे में अवगत कराया और अनुशासित जीवन को जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा सेना में भर्ती हो कर देश सेवा करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा विद्यालय और प्रधानाचार्या की कार्यक्रम 
सेशन के अंत में प्रधानाचार्या हरविंदर कौर ने कर्नल डॉक्टर जेपी सिंह को सरदार पटेल विद्यालय के बच्चों के साथ अपने अनुभव साझा कर प्रेरित करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद दिया तथा कहा की एक सैनिक की पत्नी होने के कारण वो ये बात अच्छे से समझ सकती हैं कि एक सैनिक को अपनी तैनातियों के दौरान किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है तथा कैसे वो अपनी जान की परवाह किये बिना देश की रक्षा करते हैं और हमेशा देश के लिए बलिदान देने को तत्पर रहते हैं। देश के सभी नागरिक सैनिकों के इन बलिदानों के लिए हमेशा आभारी रहेंगे।
साथ ही प्रधानाचार्या हरविंदर कौर ने सीबीएसई के वीर गाथा प्रोजेक्ट की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि सीबीएसई के इस प्रयास की वजह से बच्चों को सैनिकों  के जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों को पास से जानने का मौका मिला जिससे उनमे देश भक्ति और देश के लिए कुछ करगुजरने की भावना का संचार हुआ।