>

गौतमबुद्धनगर की अदालत ने घरेलू हिंसा की शिकार महिला और दो बच्चियों के हक में दिया आदेश  

सिविल जज (जूनियर डिविजन ) @(एफटीसी ) गौतमबुद्धनगर महिमा जैन ने अंतरिम निवास आदेश देने की अर्जी को मंजूर करते हुए सिविल जज (जूनियर डिविजन ) की अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वह उसे मकान नं. ए.114] सेक्टर 55 नोएडा एक कमरे के शौचालय] रसोई में शेयरधारित संपत्ति में रहने दें और उसे शेयर होल्ड या उसके किसी भी हिस्से से जबरदस्ती बेदखल न करें।  अदालत ने साथ ही पीडिता और उसकी दोनो बेटियों को जरूरी सुरक्षा प्रदान किए जाने का आदेश पुलिस को दिया है-- याचिकाकर्ता के वकील अजित चौधरी एडवोकेट

 

>

मौहम्मद इल्यास-**दनकौरी**@गौतमबुद्धनगर

गौतमबुद्धनगर की अदालत ने घरेलू हिंसा की शिकार महिला और उसकी दो बच्चियों के हक में आदेश दिया है। अंतरिम निवास आदेश देने की अर्जी को मंजूर करते हुए सिविल जज (जूनियर डिविजन ) की अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वह उसे मकान नं. ए.114] सेक्टर 55 नोएडा एक कमरे के शौचालय] रसोई में शेयरधारित संपत्ति में रहने दें और उसे शेयर होल्ड या उसके किसी भी हिस्से से जबरदस्ती बेदखल न करें।  अदालत ने साथ ही पीडिता और उसकी दोनो बेटियों को जरूरी सुरक्षा प्रदान किए जाने का आदेश पुलिस को दिया है। याचिकाकर्ता नसीम जैदी पत्नी अली इमरान मिर्जा निवासी मकान न.ए 114 सेक्टर-55 नोएडा ने प्रतिवादियों के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 12 के तहत एक याचिका दायर की थी] याचिका के लंबित रहने के दौरान] उक्त अधिनियम की धारा 23 (2) के तहत एक आवेदन था। शिकायतकर्ता द्वारा 11@04@2022 को उसे अंतरिम निवास आदेश@ शेयर हाउस संपत्ति में प्रवेश करने का अधिकार देने के लिए हाउस नंबर 1 में प्रतिवादियों के खिलाफ स्थानांतरित किया गया। याचिकाकर्ता नसीम जैदी ने याचिका में कहा कि उसकी शादी प्रतिवादी से 09.10.2011 को मुस्लिम रीति-रिवाजों और रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के समय दहेज के रूप में तरह-तरह का सामान और नकद दिया जाता था। शादी के बाद से ही उत्तरदाताओं ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और दहेज की मांग करने लगे। शिकायतकर्ता को पति ने बुरी तरह पीटा। शिकायतकर्ता अपनी दो बेटियों के साथ एक दिन अपनी मां के घर गई और उत्तरदाताओं ने ताला बदल दिया और वे उसे अपने ससुराल में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। उत्तरदाताओं को नोटिस भेजा गया। लेकिन प्रतिवादी पेश हुआ और मध्यस्थता हुई। 

>
उन्हें 22/7/2022 तक साथ रहने के लिए घर भेज दिया गया। 11/07/2022 को शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए अनुसार प्रतिवादी द्वारा प्रतिवादी और बच्चों द्वारा प्रतिवादी द्वारा लगातार प्रताड़ित किया गया था। प्रतिवादी ने शिकायतकर्ता और बच्चों को कोई भोजन नहीं दिया। इसलिए मामले के गुण-दोष में प्रवेश किए बिना, घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 23(2) के तहत अंतरिम निवास आदेश देने के लिए आवेदन स्वीकार किया। अदालत ने माना कि तथ्यों और अभिलेख में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ऐसा लगता है कि शिकायतकर्ता को तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। शिकायतकर्ता के आवेदन से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि उत्तरदाताडेंट्स ने शिकायतकर्ता पर घरेलू हिंसा का कृत्य किया है। शिकायतकर्ता प्रतिवादी की पत्नी है और इस प्रकार वह शिकायतकर्ता को आवास और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। याचिकाकर्ता के वकील अजित चौधरी एडवोकेट ने प्रभा त्यागी बनाम कमलेश देवी, SC474 / CrA 511 2022 मामले की नजीर पेश करते हुए कहा कि  यह माना गया कि पीड़ित व्यक्ति के लिए वास्तव में उन व्यक्तियों के साथ रहना या रहना अनिवार्य नहीं है ।

>

यदि एक महिला को साझा घर में रहने का अधिकार है, तो वह तदनुसार डी.वी. की धारा 17(1) के तहत अपने अधिकार को लागू कर सकती है। यदि कोई महिला पीड़ित व्यक्ति या घरेलू हिंसा की शिकार होती है, तो वह डी.वी. के प्रावधानों के तहत राहत की मांग कर सकती है। डी.वी. की धारा 19 के साथ पठित धारा 17 के तहत साझा घर में रहने या रहने के उसके अधिकार सहित अधिनियम कार्यवाही करना। पीड़ित व्यक्ति और जिस व्यक्ति के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोप में राहत का दावा किया गया है, उसके बीच एक स्थायी घरेलू संबंध होना चाहिए। तथापि, यह आवश्यक नहीं है कि पीड़ित व्यक्ति द्वारा आवेदन दाखिल करते समय, घरेलू संबंध कायम रहना चाहिए, भले ही पीड़ित व्यक्ति दाखिल करने के समय साझा परिवार में प्रतिवादी के साथ घरेलू संबंध में न हो। लेकिन किसी भी समय ऐसा रहता है या जीने का अधिकार था और घरेलू हिंसा के अधीन रहा है या बाद में घरेलू संबंधों के कारण घरेलू हिंसा के अधीन है, डी.वी. की धारा 12 के तहत एक आवेदन दायर करने का हकदार है।

>

 घरेलू रिश्ते में प्रत्येक महिला को प्रतिवादी द्वारा घरेलू हिंसा के किसी भी कृत्य के अभाव में भी साझा घर में रहने का अधिकार है - उसे ऐसे घर से बेदखल, बहिष्कृत या बाहर नहीं किया जा सकता है, यहां तक ​​​​कि उसके अभाव में भी घरेलू हिंसा का कोई भी रूप - वह तदनुसार डी.वी. की धारा 17(1) के तहत अपने अधिकार को लागू कर सकती है। सिविल जज (जूनियर डिविजन ) @(एफटीसी ) गौतमबुद्धनगर महिमा जैन ने अंतरिम निवास आदेश देने की अर्जी को मंजूर करते हुए सिविल जज (जूनियर डिविजन ) की अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वह उसे मकान नं. ए.114] सेक्टर 55 नोएडा एक कमरे के शौचालय] रसोई में शेयरधारित संपत्ति में रहने दें और उसे शेयर होल्ड या उसके किसी भी हिस्से से जबरदस्ती बेदखल न करें।  अदालत ने साथ ही पीडिता और उसकी दोनो बेटियों को जरूरी सुरक्षा प्रदान किए जाने का आदेश पुलिस को दिया है।