सूरजपुर में प्राचीनकालीन ऐतिहासिक बाराही मेला-2022 का पाचवां दिन- नरेश भाटी, हरेंद्र नागर, सुषमा चौधरी, डॉली और पिंकी शर्मा, आदि कलाकारांं की रही रागनियांं की धूम





-------------------------जो देश पर मर मिट गए, वो देश दीवाने थे, झंडा लहराया था, असली मरदाने थे, रागनी प्रस्तुत कर श्रोताआेंं का दिल जीत लिया






सूरजपुर मुस्लिम समाज के लोग बाराही मेले में केवल मुख्य अतिथि और अतिथिगण की श्रंखला मेंं पहुंचे बल्कि प्राचीनकालीन माता बाराही मंदिर के लिए 51000 रूपये की धनराशि भी भेंट की


 


मौहम्मद इल्यास-दनकौरी’’/सूरजपुर 

सूरजपुर में चल रहे प्राचीन ऐतिहासिक बाराही मेला-2022 के  पाचवें दिन सोमवार को हिंदु मुस्लिम एकता की अनुठी मिशाल देखने को मिली। सूरजपुर मुस्लिम समाज के लोग बाराही मेले में केवल मुख्य अतिथि और अतिथिगण की श्रंखला मेंं पहुंचे बल्कि प्राचीनकालीन माता बाराही मंदिर के लिए 51000 रूपये की धनराशि भी भेंट की। वहीं शिव मंदिर मेला समिति ने इन सभी अतिथियों का माल्यापर्ण और स्मृति चिन्ह भेंंट कर स्वागत किया।  सूरजपुर कसबे में वैसे भी यह परांपरा रही है कि एक दूसरे समुदाय के लोग दूसरे समुदाय के लोगों के विवाह समारोह बल्कि धार्मिक समारोह में भी बढ चढ कर हिस्सा लेते रहे हैं। प्राचीनकालीन बाराही मेला-2022 के पांचवे दिन सोमवार को चौधरी असगर प्रधान, हाजी चौधरी हसनद्दीन, कपिल ननका सैफी, शरीफ ठेकेदार, सलीम खान आदि अतिथिगणांं का शिव मंदिर मेला समिति के अध्यक्ष चौधरी धर्मपाल प्रधान, सरंक्षक श्रीचंद भाटी,, महासचिव ओमवीर बैंसला, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल, मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिजेंद्र ठेकेदार और भगत सिंह आर्य, राजपाल खटाना, ब्रहम सिंह नागर आदि पदाधिकारियांं ने माल्यापर्ण और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।


मुख्य अतिथि के रूप में चौधरी असगर प्रधान ने 51000 रूपये की धनराशि बाराही मंदिर को भेंंट करते हुए कहा कि सूरजपूर में समरसता और सौहार्द की यह मिशाल पूर्व से चली रही है। बडे बुजुर्गो द्वारा शुरू की इस परंपरा को आगे बढाना हम सब की जिम्मेदारी हैं। प्राचीनकालीन ऐतिहासिक बाराही मेला-2022 सूरजपुर का नही बल्कि पूरे जिले का गौरव है।  वहीं सोमवार को भी प्रति दिन की भांति बाराही मेले के सर्वोत्तम मंच संस्कृति मंच से रात्रिकालीन कार्यक्रमों की शुरूआत सरस्वती वंदना और आरती के साथ हुई। रागनियों के रंगारंग कार्यक्रमों में नरेश भाटी, हरेंद्र नागर, सुषमा, डॉली और पिंकी शर्मा आदि कलाकारांं ने खास प्रस्तुतियां दीं। सुषमा चौधरी ने- जो देश पर मर मिट गए, वो देश दीवाने थे, झंडा लहराया था, असली मरदाने थे, रागनी प्रस्तुत कर श्रोताआेंं का दिल जीत लिया। जब कि प्रसिद्व गायक हरेंंद्र नागर ने- वाह रे जमाने बीबी हूर हो गई- जन्म देने वाली नासूर हो गई रागनी और साथ ही खासे चर्चित हो रहे- जो राम को लाएं हैं, हम उनको लगाएंगे। दुनिया में फिर से हम भगवा लहराएंगे।। भजन की प्रस्तुत दी, तो प्रांगण जय श्री के उद्घोष से गूंजयमान हो उठा। गोपाल शर्मा, नरेश भाटी, सुषमा चौधरी और पिंकी शर्मा ने एक से बढ कर एक रागनियों की प्रस्तुति दी। जब कि डॉली शर्मा और भावना भाटी ने डांस के जरिए के खूब धमाल मचाया। अतं में हरेंद्र नागर ने नरेश कौशिक द्वारा लिखे गए शिव मंदिर मेला समिति पर आधारित भजन- शिव मंदिर मेला समिति ये क्षेत्र तुम्हारा आभारी।  बाराही मैया की कृपा से जय को सदा तुम्हारी।। प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा नायक नही खलनायक हू मैं, समेत कई तरह की प्रस्तुतियां उभरते हुए कलाकारों ने दीं। मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने बताया कि दिनांक 20 अप्रैल-2022, बुद्धवार की सांय हरियाणा और राजस्थान के कलाकारों तथा विभिन्न स्कूलांं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। जब कि रात्रिकालीन रागनियों के रंगारंग कार्यक्रमों में  बलराम बैंसला, रविंद्र बैंसला, संध्या चौधरी, कंचन कविता, दीप्ती आदि कलाकार खास प्रस्तुतियां देंगे। इस मौके पर कार्यक्रम मे चौधरी धर्मपाल भाटी प्रधान, ओमवीर बैंसला, लक्ष्मण सिंघल, मूलचंद शर्मा और राजकुमार नागर, सतपाल शर्मा एडवोकेट, राजेश शर्मा, सुभाष शर्मा, सुनील शर्मा, रामौतार गर्ग, विशाल गोयल, राजवीर शर्मा आदि मेला समिति के पदाधिकारी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

विशेष आर्कषणः----पुलस्त्य मुनि ने बाराही मेला स्थल पर सैकड़ों वर्षो तक की थी, तपस्या


सूरजपुर में प्राचीनकालीन बाराही मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता-सूरजपुर में प्राचीनकालीन बाराही मंदिर है, जंहा इन दिनों बाराही मेला चल रहा है। इस बाराही मंदिर के पीछे कई तरह की किवदंतियां भी है। ऐसे भी बताया जाता है कि रावण के दादा पुलस्त्य मुनि ने मेला स्थल पर सैकड़ों वर्षो तक तपस्या की थी। वहीं लोगों को वराह और बराही माता ने भी दर्शन दिए थे। बताया जाता है कि पृथ्वी को नाश से बचाने की वजह से लोगों ने वराह और बराही माता की पूजा करनी शुरू कर दी थी। बाद में पुलस्तय ऋषि ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यह शिवलिंग आज भी विराजमान है। वहीं, रावण के पिता विश्रवा ऋषि द्वारा स्थापित शिवलिंग भी बिसरख गांव में विराजमान हैं। बिसरख को रावण का गांव माना जाता है, जिसे विश्रवा ऋषि के नाम से बसाया गया और आज बिसरख के नाम से जाना जाता है। विश्रवा ऋषि ने यहां बराही मंदिर में तप भी किया था। कहा जाता है कि भगवान शिव ने दर्शन देकर उन्हें कुल पुरोहित बनाया था। उसी समय बाराही देवी की स्थापना की थी। उन्हीं की तपस्या का फल है कि बाराही मंदिर परिसर में स्थित चमात्कारिक सरोवर में नहाने से समस्त चर्म रोग खत्म हो जाते हैं। बताया जाता है कि प्राचीनकाल से ही यहां बराही मेले का आयोजन किया जा रहा है। माना जाता है कि जो भी इस मंदिर में मन्नत मांगता है, उसकी मनौती पूरी हो जाती है। यहां तीन मंदिर हैं। इनमें एक वराह और माता बराही का, दूसरा शिव और तीसरा हनुमान जी का मंदिर है। 


मेले के दौरान देश के कोने.कोने की संस्कृति की झलक दिखाई देती है। ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपर बाराही मंदिर में कैसे पहुंचा जा सकता है? दिल्ली की तरफ से आने वाले लोग नोएडा सेक्टर .37 से बस द्वारा सूरजपुर सकते हैं। जब कि दूसरी ओर नोएडा.ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के जरिए परी चौक आइए जहां से सूरजपुर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यमुना एक्सप्रेस-वे और ईर्स्टन पेरीफैरल एक्सप्रेस-वे के जरिए ग्रेटर नोएडा पहुंचना आसान है। यदि आप जीटी रोड से रहे तो सिकंद्राबाद या फिर दादरी के रास्ते सूरजपुर तक पहुंच सकते हैं। उत्तरीय रेलवे की दिल्ली हावडा मेन लाइन पर दादरी रेलवे स्टेशन स्थित हैं, जहां से सीधा सूरजपुर के लिए पहुंचा जा सकता है।