छुरी खरबूजे के ऊपर गिर जाए या खरबूजा छुरी के ऊपर गिर जाए, सत्यानाश तो खरबूजे का ही होता है, छूरी का कुछ नहीं बिगड़ता

 






जब चुनाव आते हैं, अक्सर उठा पटक का दौर शुरू हो जाता हैं। राजनीतिक पार्टियां जहरीले बयान देकर गंदी राजनीति में उतर जाती हैं

 


चौधरी शौकत अली चेची


जब चुनाव आते हैं, अक्सर उठा पटक का दौर शुरू हो जाता हैं। राजनीतिक पार्टियां जहरीले बयान देकर गंदी राजनीति में उतर जाती है। कुछ नेता तो दिखावटी पूजा कर जनता को आकर्षित करते हैं जबकि भजन और भोजन दान गुप्त बताया जाता है। ऐसा पूरे विश्व में भारत के सिवा कहीं नहीं दिखाई देता। भाजपा की बात करें तो सत्ता में होते हुए इस कदम से कतई पीछे नही रह रही है। जाति धर्म के नाम से नफरत फैला सिर्फ अपना उल्लू साधना ही इनका मुख्य धर्म रह गया है। देशवासियों को समझने की जरूरत है हर मोड़ पर हर परिस्थिति में सभी समुदाय के लोग एक दूसरे के सहयोग से ही सफल होते हैं तो हम भारतवासी नफरत को अपने कंधे पर लेकर क्यों बर्बादी की तरफ दौड़ रहे हैं। भाजपा ही नही सभी राजनीतिक दल लोगों को बांट कर कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं। गोदी मीडिया की बात करें तो अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए भारतवासियों में जाति धर्म के नाम से नफरत फैला रही है। भारतवासी नेता मोमबत्ती टॉर्च दिए जलाने से भी नहीं दिखाई देते हैं जनता का रुख देखकर मलाई खाने वाले नेता पाला बदल लेते हैं। इस समय हमारे देश की राजनीतिक विचार देश और जनता को बर्बादी के रास्ते पर ले जा रही है। ज्यादातर नेताओं की जुबान में शालीनता समाप्त होकर देश की भोली.भाली जनता को कुआं और खाई जैसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर रही है। अब तो अनजान और बुद्धिहीन लोग जाति धर्म विशेष की दलदल में फंस कर अपनी बर्बादी के लिए खुशी होकर तालियां बजा रहे हैं। सत्ता में बैठे लोग वोट किस तरह बढे, कानून बनाते है, कोई बर्बाद हो उससे इन्हें कोई लेना.देना नहीं। देश में लाखों लोगों पर हर रोज मुसीबतें आती हैं,लेकिन अपने निजी स्वार्थ में मुद्दा उछालने के लिए जाति धर्म विशेष का चश्मा चढ़ा देते हैं, यह समझने की जहमत नहीं करते कि लगी चोट वाला दर्द से गंभीर परेशान हैं। सत्ता में आने के लिए सभी पार्टियां लुभावनी रेवड़ी बांटती हैं। सत्ता पर काबिज होने के बाद भूल जाती हैं कि हमने कोई वादा किया था। आरोप दूसरों पर लगाते हैं हजारों साल पुराने दबे हुए मुद्दों को उठाकर देशवासियों में नफरत पैदा करते हैं। बड़ी बड़ी रैलियों में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जीतने के बाद उसी पैसे को अनजान जनता की खाल से भी वसूल किया जाता है। मीडिया द्वारा अपने फेवर में आकर्षित दृश्य से जनता को बेवकूफ बनाया जाता है, मुंह में राम बगल में छुरी या यूं कहें कि हाथी के दांत खाने के ओर दिखाने के ओर।  देशवासी जागरूक होकर डॉक्टर और बीमार को देखें, गाड़ी ठीक करने वाले मकैनिक को देखें, देश की रक्षा करने वाले सीमा के जवानों को देखें,  परोपकारी अन्नदाता को देखे जो


बगैर भेदभाव के अपना कर्म मानवता का धर्म निभाते चले आ रहे हैं। देश की आजादी के दीवानों को याद करने की जरुरत है जिन्होंने हंसते.हंसते देश आजादी के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे दी। जिंदगी के वह फल भी याद कर लो जब कोई मुसीबत आई अनजान या पड़ोसी ने बगैर भेदभाव के मदद करने में सहयोग किया। जाति धर्म के चश्मे से नहीं  केवल समझा कि इंसानियत का धर्म सबसे बड़ा कर्म है। सच्चाई उजागर करने वाले या अपने हक की आवाज उठाने वाले अपराधी बना दिए जाते हैं। सरकारी मुलाजिम, बिजनेसमैन, सामाजिक संस्थाएं, धर्मगुरु आदि सभी नेता बनने की होड़ में लगे हुए हैं और जो नेता बन गया समझो उसका बेड़ा पार हो गया। सत्ता में आने के बाद चारों तरफ से लूट मचा कर मालामाल हो जाता है और माननीय बनकर अपनी लोकप्रियता को इतिहास में दर्ज करा देता है। टैक्स जीएसटी वोट देने वाला जिंदगी भर गालियां और ठोकर, डंडे खाता ही रहता है। बुद्धिहीन नासमझ लोगों को समझना चाहिए छुरी खरबूजे के ऊपर गिर जाए या खरबूजा छुरी के ऊपर गिर जाए, सत्यानाश तो खरबूजे का ही होता है। छूरी का कुछ नहीं बिगड़ता। नफरत की लाठी तोड़ो लालच का खंजर फेंको आपस में प्रेम करो सभी देश प्रेमियों। एकता जागरुकता मानवता भाईचारा जिंदाबाद, जय हिंद।

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन (बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं।