विजन लाइव/ दनकौर
बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में अनुभूति/हैप्पीनेस कार्यक्रम पर आधारित पाठ्यक्रम  विकसित करने हेतु राज्य परियोजना कार्यालय,समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश द्वारा 6दिवसीय कार्यशाला दिनांक 13 से 18दिसंबर 2021 तक सीमैट, प्रयागराज में आयोजित की गई। गौतमबुद्धनगर से नामित प्रतिभागी , पम्मी मलिक उच्च प्राथमिक विद्यालय तालडा (कंपोजिट स्कूल), ने बताया कि  इस कार्यशाला का लक्ष्य प्रारंभिक शिक्षा में अनुभूति पाठ्यचर्या की आवश्यकता एवं इसके महत्व तथा एक विषय के परिप्रेक्ष्य के रूप में  चर्चा- परिचर्चा कराना था । इस संवाद में  32 प्रतिभागियों का चयन किया गया था। इस कार्यक्रम में 24विभिन्न सत्रों के माध्यम से खुशी/सुख का आशय, संकल्पना,चाहत को पाठ्यक्रम के रूप में मान्यता व इसका आकलन व मूल्यांकन,मानव की आवश्यकताएं (भौतिक व भाव यानी मूल्य), छत्तीसगढ़ के चेतना विकास मूल्य शिक्षा और दिल्ली के हैप्पीनेस पाठ्यचर्या की समीक्षा भी किया गया। कार्यशाला के प्रमुख विशेषज्ञ श्रवण कुमार शुक्ला  द्वारा इसके पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क पर आधारित पाठ्यक्रम के लेखन हेतु 4बिंदुओं - माइंडफुलनेस (सजगता व ध्यान हेतु), कहानी (चिंतन प्रधान), गतिविधियां (विचार प्रधान) और अभिव्यक्ति भाग (भाव प्रधान) के बारे में दृष्टांतों के माध्यम से समझ का विकास किया गया। इस कार्यक्रम में निदेशक ,सीमैट, प्रयागराज डॉ सुत्ता सिंह, डॉ सौरभ मालवीय जी , विशेषज्ञ गुणवत्ता ,समग्र शिक्षा (हैप्पीनेस कार्यक्रम समन्वयक), संदर्भ व्यक्ति  जयप्रकाश ओझा, मदन पांडेय व पवन कुमार श्रीवास्तव , डॉ.अमित खन्ना, प्रभात कुमार मिश्रा और मुख्य अतिथि डॉ ईश्वर शरण विश्वकर्मा (अध्यक्ष, उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग)तथा हरेश कुमार सिंह (सदस्य,लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश) तथा डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी (सदस्य,मा.शि‌क्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश)ने बचपन से ही बच्चों को ममता,स्नेह,सम्मान व कृतज्ञता जैसे मूल्यों के साथ ही साथ हैप्पीनेस पाठ्यचर्या विकास के फ्रेमवर्क में समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी व भागीदारी को शामिल करते हुए पाठ्यक्रम निर्माण पर जोर देने के सुझाव दिए।