घोटाले के दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही न होने पर यूपी सरकार की छवि को बंदनाम किए जाने की अफसरों की साजिश मालूम प्रतीत होती हैः राधेश्याम प्रजापति





शिकायती पत्र लगाया था, आरोपः- प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभ पाने वाले गरीब लोगों के सत्यापन में अफसरों ने हेरा फैरी की







मौहम्मद इल्यास-’’दनकौरी’’/गौतमबुद्धनगर

दनकौर में ऐसे लोग जो वाकई प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के पात्र हो सकते थे, आज भी अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना सत्यापन घोटाला की जांच रिपोर्ट एसडीएम सदर की ओर से डीएम को सौंपी दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए इन शिकायकर्ताओं ने वर्ष 2019 में आवेदन किए थे। अधिकारियों ने पहले तो इन लोगों को पात्रता की सूची में डाल दिया और फिर इन्हें सूची से हटा दिया, तब से यह बराबर अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में पहले भी जांचें हुई और फिर ठंडे बस्ते में जा पडी। एक बार फिर इस मामले में जांच शुरू हुई हैं। अब प्रधानमंत्री सत्यापन घोटाले का यह मामला सीधे सीएम दरबार में पहुंच गया है। इस मामले में राष्ट्रीय हिन्दू संघ ने गौतमबुद्धनगर में तैनात अधिकारियों की शिकायत सीधे सीएम योगी आदित्यनाथ से की है। राष्ट्रीय हिन्दू संघ के मेरठ मंडल अध्यक्ष राधेश्याम प्रजापति ने सीएम आवास पर पहुंंच कर शिकायत की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना सत्यापन घोटाले की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करते हुए वंचित को योजना का लाभ दिलाने की मांग की गई हैं मगर जांच के नाम पर इस पूरे मामले को अफसरों ने शायद ठंडे बस्ते में ही डाल दिया है। इससे घोटाले के दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही न होने पर यूपी सरकार की छवि को बंदनाम किए जाने की अफसरों की साजिश मालूम प्रतीत होती है।

दनकौर कसबा निवासी सुनीता देवी पत्नी राधेश्याम,मंजूरानी पत्नी कुलदीप, संजय पुत्र इकराम, सीताराम पुत्र इंद्रजीत सिंह, शशि पत्नी देशराज, ओमपाल पुत्र भगवानदास, कृष्ण पुत्र जयप्रकाश ने संयुक्त रूप से शिकायती पत्र भेज कर अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जनपद के दनकौर कसबा निवासीगण प्रार्थीगणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। गौतमबुद्धनगर प्रशासन के संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना सत्यापन घोटाला शुरू कर दिया गया। जब प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पात्र लोगों को नही मिल पाया तो दिनांक 21-06-2019 को अपर जिलाधिकारी ( प्रशासन ) गौतमबुद्धनगर को शिकायती पत्र लिखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की गई। इससे तहसील प्रशासन हरकत में आया और प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन कर चुके लोगों के सत्यापन का कार्य किया जाना लगा। इस क्रम में गौतमबुद्धनगर तहसील से आकर संबंधित अधिकारियों ने प्रार्थीगणों/ अवासविहीन गरीब लोगों से सत्यापन किए जाने के नाम पर रकम एेंठनी शुरू कर दी। आखिर सांठगांठ में जो लोग गौतमबुद्धनगर तहसील के संबंधित अधिकारियों को संतुष्ट कर पाए उन सभी को पात्रता की सूची में डाल दिया गया। जब कि ऐसे लोग जो गौतमबुद्धनगर तहसील के संबंधित अधिकारियों को संतुष्ट नही कर पाए उन्हें अपात्र सूची में डाल दिया गया। इस प्रकार दनकौर कसबा निवासी कुल 85 आवेदकों में से पहले सिर्फ 67 को ही सत्यापन में सही दर्शाया गया, जब कि अन्य पात्र लोगों के खिलाफ संस्तुति भेजी गई। इस बात की जब शिकायत की गई तो पुनः सत्यापन किया गया और 67 लोगों में से सिर्फ 51 लोगों को ही पात्रता की सूची में दर्शाया गया। शिकायती पत्र में गौतमबुद्धनगर सदर तहसील की तत्कालीन नायब तहसीलदार पर भी आरोप लगाते हुए कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना सत्यापन घोटाले में गौतमबुद्धनगर सदर तहसील की तत्कालीन नायब तहसीलदार आरती यादव और उनके अधीनस्थ लेखपालों व कानूनगों की खास भूमिका रही है। सदर तहसील के संबंधित अधिकारियों ने गरीब और आवासविहीन जो किराए के मकानों में किसी तरह गुजर बसर कर रहे थे, किराए के मकान को ही उनका अपना मकान तक सूची में दर्शाया दिया। वहीं कई ऐसे लोगों को देहात की सीमा का दर्शा कर पात्रता सूची से बाहर कर दिया। जब कि इस तरह के सभी लोग नगर पंचायत को बराबर टैक्स देते चले आ रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के इन आवेदकों ने शिकायत पत्र में यह कहा कि 1ः-मंजूरानी पत्नी कुलदीप निवासी मुहल्ला प्र्रेमपुरी, दनकौर का जांच में मकान बना हुआ दर्शाया गया है, मगर मौके पर प्रार्थिया का सिर्फ एक खाली प्लाट है और प्रार्थिया कसबे में ही एक किराए के मकान में किसी तरह से गुजर बसर करने के लिए मजबूर है। 2ः- संजय पुत्र इकराम निवासी झाझर रोड दनकौर की जांच में दुकान बनी दर्शाई गई है, मगर मौके पर प्रार्थी का घर जर्जर अवस्था में है। 3ः- सुनीता देवी पत्नी राधेश्याम निवासी तुलसीनगर दनकौर को देहात की सीमा से बाहर दर्शा दिया गया है। मगर हकीकत में नगर पंचायत खुद टैक्स वसूलती है। प्रार्थिया का मकान नगर पंचायत के तहत जर्जर अवस्था में हैं। 4ः- सीताराम पुत्र इंद्रजीत सिंह निवासी मुहल्ला तुलसीनगर, दनकौर देहात को भी सीमा से बाहर दर्शा दिया गया है। मगर हकीकत में नगर पंचायत खुद टैक्स वसूलती है। लेकिन प्रार्थीं का कोई मकान नही है बल्कि मौके पर सिर्फ एक खाली प्लाट ही है।  5ः- शशि पत्नी देशराज निवासी मुहल्ला प्रेमपुरी दनकौर जांच में दो मकान बने दर्शाए गए हैं, लेकिन प्रार्थियां का कोई मकान नही है बल्कि मौके पर सिर्फ एक खाली प्लाट ही है।


6ः- ओमपाल पुत्र भगवानदास निवासी झाझर रोड दनकौर, जांच में मकान बना हुआ दर्शाया गया है, मगर मौके पर प्रार्थी का सिर्फ एक खाली प्लाट है और प्रार्थी एक किराए के मकान में किसी तरह से गुजर बसर करने के लिए मजबूर है। 7ः-कृष्ण पुत्र जयप्रकाश निवासी मुहल्ला प्रेमपुरी दनकौर, का जांच में अपना मकान दर्शाया गया है, जब कि प्रार्थी किसी तरह से एक किराए के मकान में गुजर बसर करने के लिए मजबूर है। शिकायती पत्र मे प्रधानमंत्री आवास योजना के इन आवेदकों ने मांग की है कि चूंकि प्रार्थीगण आवासविहीन/जर्जर अवस्था/ किराए के मकानों में किसी तरह से गुजर बसर करने के लिए मजबूर हैं। इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए इस सत्यापन घोटाले की जांच करवाते हुए दोषी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही कराते हुए प्रार्थीगणों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलवाने की कृपा करें। इन शिकायती पत्रों की प्रतियां संयुक्त रूप से दिनांक 30-10-2021 को प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली, केंद्रीय मंत्री शहरी आवास योजना भारत सरकार नई दिल्ली, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश,मंडलायुक्त मेरठ, उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर, मुख्य विकास अधिकारी गौतबुद्धनगर, उपजिलाधिकारी सदर तहसील गौतमबुद्धनगर को पंजीकृत डाक से प्रेषित की गई थीं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल और मुख्यमंत्री जनसनुवाई शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत की प्रतियां भेजी गई थीं। अब राष्ट्रीय हिन्दू संघ के मेरठ मंडल अध्यक्ष राधेश्याम प्रजापति ने सीएम आवास पर पहुंंच कर शिकायत करते हुए पत्र मेंं अवगत कराया है कि डाक के माध्यम से तथा ऑनलाईन तरीके से गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और उपजिलाधिकारी समेत सभी आला अधिकारियों को शिकायती पत्र भेज कर प्रधानमंत्री आवास योजना सत्यापन घोटाले की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करते हुए वंचित को योजना का लाभ दिलाने की मांग की गई हैं मगर जांच के नाम पर इस पूरे मामले को अफसरों ने शायद ठंडे बस्ते में ही डाल दिया है। इससे घोटाले के दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही न होने पर यूपी सरकार की छवि को बंदनाम किए जाने की अफसरों की साजिश मालूम प्रतीत होती है। आशा है कि गौतमबुद्धनगर मेंं तैनात ऐसे अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्यवाही अमल में लाने की कृपा करेंगे जो जानबूझ कर जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ की राह में रोडा साबित हो रहे हैं और जिससे सरकार की छवि को लगातार नुकसान पहुंच रहा हैं। इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए इस सत्यापन घोटाले की जांच करवाते हुए दोषी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही कराते हुए प्रार्थीगणों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलवाने की कृपा करें।