विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम गौतमबुद्धनगर, दिनेश सिंह का कफील हत्याकांड में फैसला

 


सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (दाण्डिक) गौतमबुद्धनगर रोहताश शर्मा ने बताया कि विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम गौतमबुद्धनगर दिनेश सिंह ने हत्या के मामले में अभियुक्त मौहम्मद सईद उर्फ शहीद पुत्र अब्दुल महबुल्ला, मुरसलीम पुत्र मोहम्मद सईद,मुस्तकीम पुत्र मोहम्मद सईद निवासीगण मोहल्ला आजाद नगर करवा व थाना रबूपुरा, जिला गौतमबुद्धनगर को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5-5 हजार रुपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड न अदा किए जाने की दशा में प्रत्येक को 1-1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


मौहम्मद इल्यास-’’दनकौरी’’/गौतमबुद्धनगर

गौतमबुद्धनगर, विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम, दिनेश सिंह ने कफील हत्याकांड में अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम गौतमबुद्धनगर दिनेश सिंह ने हत्या के मामले में अभियुक्त मौहम्मद सईद उर्फ शहीद पुत्र अब्दुल महबुल्ला, मुरसलीम पुत्र मोहम्मद सईद,मुस्तकीम पुत्र मोहम्मद सईद निवासीगण मोहल्ला आजाद नगर करवा व थाना रबूपुरा, जिला गौतमबुद्धनगर को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5-5 हजार रुपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड न अदा किए जाने की दशा में प्रत्येक को 1-1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सत्र परीक्षण सं०.622/10, राज्य बनाम मौहम्मद सईद उर्फ शहीद पुत्र अब्दुल महबुल्ला, मुरसलीम पुत्र मोहम्मद सईद, मुस्तकीम पुत्र मोहम्मद सईद निवासीगण मोहल्ला आजादनगर करवा व थाना रबूपुरा, जिला गौतमबुद्धनगर, अपराध स०.85/10, अ० धारा 323 452/34. 308, 304, 307,504, 506 भा०द०सं० थाना रबूपुरा जिलाः- गौतमबुद्धनगर व सत्र परीक्षण सं०. 623/10 राज्य प्रति मौहम्मद सईद उर्फ शहीद पुत्र अब्दुल महबुल्ला निवासी मोहल्ला आजाद नगर कस्बा व थाना रबूपुरा, जिला गौतमबुद्धनगर अ० धारा.4/25 आयुध अधिनियम अपराध सं०.107/10 थाना. रबूपुरा, गौतमबुद्धनगर मामले में सुबूतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए फैसला सुनाया है। वादिनी मुकदमा गुलिस्ता पत्नी कफील करवा एवं थाना रबूपुरा जिला गौतमबुद्धनगर दिनांक 10-04-2010 समय प्रातः 9.30 बजे उसके पड़ौसी मौहम्मद सईद, मुरसलीम, मुस्तकीम और आसिफ हाथ में हॉकी अंडा लेकर एक राय होकर घर में घुस गए और उसके पति कफील के सिर पर हथियारों से प्रहार किए,ा जिससे उसके पति घायल होकर बेहोश हो गए। उक्त अभियुक्तगणों नें वादिनी के जेठ रफीक, देवर वकील और ससुर कलुआ को भी हाकियों से मार कर घायल किया। मुरसलीम मौहम्मद सईद ने वादिनी के पति पर ताबड़.तोड़ हाकी से मारा। शोर पर पडौसी आ गए और नूर मौहम्मद के घर जमील व रहीस आदि ने बचाया। अभियुक्तगण जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। उधर गंभीर हालत में कफिल को इलाज के लिए लोक नायक अस्पताल नई दिल्ली ले जाया गया और जहां बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं ने भी अलग अलग तर्क प्रस्तुत किए कि घटना कदापि साबित नहीं होती है,अतः अभियुक्तगण दोष मुक्त किए जाने योग्य है। जब कि सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (दाण्डिक) गौतमबुद्धनगर रोहताश शर्मा ने दलील दी कि दिनांक 10-4-2010 को समय सुबह करीब साढ़े नौ बजे घर पर मौहम्मद सईद पुत्र


महबुल्ला, मुरसलीम, मुस्तकीम और आसिफ आये। जिनमें मुरसलीम के हाथ में हॉकी, मुस्तकीम के हाथ में गोल डण्डा, आसिफ के हाथ में भी गोल डण्डा और मौहम्मद सईद के हाथ में चाकू था। कफील को दबोचते हुए अपने.अपने हथियारों से मारपीट कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शी ने जब इन लोगों से कहा कि ऐसा क्यों कर रहे हो तो इन लोगों ने उसके ऊपर भी जान लेवा हमला कर दिया। उसके पिताजी कलुआ जब बचाने आये तो उनके साथ भी इन लोगों ने मार.पीट कर चोटें पहुंचायी तथा मौहम्मद सईद ने उसके पिताजी की छाती में चाकू मारा। कफील चोटों के कारण बेहोश होकर गिर गया था। उसके भाई वकील पर भी इन्होंने जान लेवा हमला किया। कफील के भाई और उसके पिताजी उसे बुलन्दशहर अस्पताल ले गए। डॉक्टर साहब ने कफील की नाजुक हालत देखते हुए दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। आखिर जयप्रकाश नारायण अस्पताल दिल्ली इलाज के दौरान कफील की मृत्यु हो गई। अभियोजन की ओर से मृतक की पत्नी गुलिस्ता भी प्रस्तुत हुई और घटना की पुष्टि की। कफील हत्याकांड में संबंधित पक्षों के सुनने और सुबूतों गवाहांं की मौजूदगी में विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम गौतमबुद्धनगर दिनेश सिंह  अभियुक्त मौहम्मद सईद उर्फ शहीद पुत्र अब्दुल महबुल्ला, मुरसलीम पुत्र मोहम्मद सईद,मुस्तकीम पुत्र मोहम्मद सईद निवासीगण मोहल्ला आजाद नगर करवा व थाना रबूपुरा, जिला गौतमबुद्धनगर को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5-5 हजार रुपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड न अदा किए जाने की दशा में प्रत्येक को 1-1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।