कृषि बिल रद्द करने की घोषणा से रणनीति तो साफ नजर आती है, भाजपा को सत्ता से बेदखल होने का डर दिखाई दे रहा है

 



जय जवान, जय किसान, तिरंगा देश की शान, हम सबका भारत दुनिया में महान  हिम्मतवाला, हमारा किसान

 



अनेकता में एकता  के सहयोगियों से भाईचारे की महक समाप्त नहीं होती है, इसीलिए हिंद,ू मुस्लिम, सिख, इसाई सभी भारतवासी आपस में भाई.-भाई

 


चौधरी शौकत अली चेची


----------------------------देश की जनता करे विचार, किसका कितना है किरदार, कोई नहीं है किसी का, सब अपने.अपने मोर्चे पर खड़े हैं, जो सच और हक की आवाज उठाएं स्वार्थी लोग उनके पीछे पड़े हैं, जिन्होंने कदर करी सबकी, वह भी तो किसी कोने में खड़े हैं। जब भाजपा विपक्ष में थी तो किसान हितैषी थी, कांग्रेस सत्ता में थी तो किसान विरोधी थी, अब सत्ता में भाजपा है, किसान अपने हक के लिए अड़ा है, घर छोड़कर सड़कों पर दौड़ रहा है। किसान भाजपा, गोदी मीडिया और अंध भक्तों की नजरों में आतंकवादी, खालिस्तानी, पाकिस्तानी, अलगाववादी आंदोलन जीवी, परजीवी, गुंडे मवाली बन गया। जब भाजपा की वोट लगे घटने, जीएसटी में संशोधन, डीजल, पेट्रोल के दाम लगे घटने, कृषि बिल अध्यादेश के विरोध से वोट घटे तो अन्नदाता दिखाई देने लगे। कृषि बिल रद्द करने की घोषणा से रणनीति तो साफ नजर आती है, भाजपा को सत्ता से बेदखल होने का डर दिखाई दे रहा है। किसानों की मुख्य मांग जब देश में एमआरपी कानून है,तो  मैक्सिमम सपोर्ट प्राइस सभी फसलों की कीमत व लागत का उचित मूल्य गारंटी कानून बनना चाहिए, हजारों किसानों पर आंदोलन में मुकदमे दर्ज बिना शर्त वापिस हो,  700 से ज्यादा आंदोलन में शहीद हुए किसानों को समान मिले, लखीमपुर में सत्ता की हनक से अन्नदाता का रौंदा गया उन किसानों को सम्मान और कानूनी इंसाफ मिले। ट्यूबेल रेंट कम हो, पराली तुरा नहीं जलाने का समाधान हो, ज्यादा पशु पालने पर कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन अनिवार्य प्रतिबंध रद्द हो, कृषि यंत्रों पर जीएसटी टैक्स हटाया जाए, 15 साल पुराने ट्रैक्टरों पर प्रतिबंध हटाया जाए, किसानों से संबंधित वस्तुओं पर सब्सिडी दी जाए, फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, किसान आयोग का गठन किया जाए, बकाया गन्ने का भुगतान समय पर और साथ ही उचित मूल्य मिले। कृषि बिल रद्द करने का सराहनीय कदम है किसानों के लिए राहत भरी खबर तो जरूर है। समझना यह भी होगा की प्रधानमंत्री मोदी की बिल रद्द करने की घोषणा से कोई नई खिचड़ी पकाने की रणनीति तैयार करने की योजना तो नही बनाई गई है? क्योंकि किसान आंदोलन में अत्याचार, भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, बलात्कार, हत्या, आत्महत्या, जाति धर्म की द्वेष भावना इन सभी मुद्दों पर भी भाषण बयानों से भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज रही थी और किसान आंदोलन से आपसी भाईचारा मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा था।  भाजपा की समस्या थी, 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा, पांच राज्यों के चुनावों में मुश्किल खड़ी कर सकता था, इसीलिए मौका मिल गया कि हम तीन कृषि बिल, किसानों की आय दोगुनी करने के हक में लाए थे, अब कुछ किसानों की नाराजगी से कृषि बिल वापसी करने पड़े विपक्षी पार्टियां किसानों का भला करना नहीं चाहती। भाजपा हमेशा किसानो के साथ खडी रहती है, पांच राज्यों में भाजपा की सरकार बनने के बाद 2024 से पहले किसानों की आय दुगनी करने का कानून लागू हो जाएगा और हर साल चार करोड़ रोजगार 30. 30 लाख रुपए सब के खाते में भेज दिए जाएंगे। उद्योगपतियों की तरह सब के दिन अच्छे आ जाएंगें। इन बातों को सुनने के बाद सही गलत की समझ करने में थोड़ा वक्त लगता है लेकिन बिल रद्द करने से भाजपा की मुश्किल कम नहीं होंगी थोड़ी राहत मिल सकती है। भाजपा सरकार की नाकामिया जनता के बीच कुछ प्रतिशत कम पहुंच पाएंगी। गोदी मीडिया को चापलूसी करने में मशक्कत कम करनी पड़ेगी। कृषि  कानून को  रद्द करने में कानूनी प्रक्रिया से महीनों लग जाएंगे।  तब तक विपक्षी पार्टियां  किसान नेता, बुद्धिजीवी लोग, भाजपा की रणनीति को समझने में सफल हो जाएंगे। सत्ता पक्ष को नहीं भूलना चाहिए गहरे दर्द की कराहट, आसानी से नहीं भूलाई जाती है तथा भूलने की स्थिति से पहले पांच राज्यों के चुनाव हो जाएंगे। झूठ, गुमराह, नफरत के किले धराशाही हो जाएंगे। हमें याद रखना होगा भारत देश अनेक तरह के फूलों की बगिया जैसा दिखाई देता है, जिससे रोशनी की किरण बनकर खुशबू से देश के कोने.कोने महक रहे है, अनेकता में एकता  के सहयोगियों से भाईचारे की महक समाप्त नहीं होती है, इसीलिए हिंद,ू मुस्लिम, सिख, इसाई सभी भारतवासी आपस में भाई.-भाई, जय जवान, जय किसान, तिरंगा देश की शान, हम सबका भारत दुनिया में महान  हिम्मतवाला, हमारा किसान।

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन (बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं।

 

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