खुलासाः-अलीगढ मेंं राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की तर्ज पर सम्राट मिहिर भोज के नाम पर स्थापित महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाए जाने का गुर्जर विद्या सभा को प्रस्ताव माकूल लगा और मुख्यमंत्री के यहां आने का कार्यक्रम तय हो गया

 





पुलिस की नाकेबंदी के बावजूद भी इस महांपचायत में शामिल होने के लिए मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, कैराना, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक से गुर्जर बिरादरी के लोग पहुंचे

 



 


कार्यक्रम में करीब 10 लाख रूपये तक गुर्जर विद्या सभा के खर्च हो गए और न विश्वविद्यालय मिल पाया और गुर्जर शब्द पर सियासत शुरू हो जाने से स्वाभिमान गिरा सो अलग

 



दादरी में गुर्जर समाज के अक्रोश को देखते हुए और साथ ही सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ट्वीट से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और भाजपा चौतरफा गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के प्रतिमा अनवारण मुद्दे पर घिर गई


 

 







मौहम्मद इल्यास-’’दनकौरी’’/गौतमबुद्धनगर

 गुर्जरों की आर्थिक राजधानी के तौर पर समझी जानी वाली गौतमबुद्धनगर की दादरी में अब गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा अनावरण से शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसमें एक ओर ठाकुर बिरादरी के लोग सम्राट मिहिर भोज को राजपूत बिरादरी से जुडा होने दावा कर रहे हैं, वहीं गुर्जर बिरादरी हमेशा से ही गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर सम्राट मानती चली आ रही है। इससे पहले भी कई स्थानों पर गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगाई जा चुकी है। साथ ही स्वंय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रेटर नोएडा में पर्यटन संस्कृति संस्थान में गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज के नाम से संग्राहलय का उद्घाटन कर चुके हैं। फिर भी दादरी में ही यह गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के मुद्दे पर दोनों ओर से तलावरें खिंची हुई हैं। यह विवाद भी ऐसी जगह पर हुआ जहां गुर्जर बिरादरी का गौरवमयी इतिहास देखने को मिलता है। दादरी रियासत के राजा राव उमराव सिंह समेत सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों को न केवल क्रांतिकारियो ंने लोहे चने चबा दिए थे बल्कि इस पूरे क्षेत्र में यह क्रांति गांव गांव तक पहुंची थी और न जाने कितने ही आजादी के मतवालों को बुलंदशहर के काला आम पर फांसी दे दी गई थी। हैरत यह भी रही कि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा अनावरण में गुर्जर समाज का अपमान भी खुद अपने ही घर में हुआ। गुर्जरों की आर्थिक राजधानी समझी जानी वाली दादरी में राजा मिहिर भोज के नाम पर महाविद्यालय करीब 50 वर्ष से स्थापित है। इस मिहिर भोज महाविद्यालय में गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की भव्य प्रतिमा स्थापित की जानी थी। मिहिर भोज महाविद्यालय संचालन समिति गुर्जर विद्या सभा ने इसकी पूरी तैयारियां कर ली थी। किंतु इसी बीच गुर्जर विद्या सभा से संपर्क कर सरकार से जुडे लोगों ने बताया कि गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण का कार्यक्रम मुख्यमंत्री का दिलवा देते हैं, जैसे अलीगढ मेंं राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से विश्वविद्यालय का शिलान्यास हुआ है, यहां भी इस सम्राट मिहिर भोज के नाम पर स्थापित महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा मिल सकता है। गुर्जर विद्या सभा को यह प्रस्ताव माकूल लगा और मुख्यमंत्री के यहां आने का कार्यक्रम तय हो गया। किंतु मूर्ति अनावरण कार्यक्रम से ऐन वक्त पहले ही यह मामला गुर्जर सग्राट और राजपूत बिरादरी से जुडा होने को लेकर इतना तूल पकड गया कि स्थापित की गई गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के शिलापट से गुंर्जर शब्द को हटाया और फिर चिट लगाई। 


सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे ही प्रतिमा का अनावरण कर चले गए वहीं पुलिस ने प्रतिमा के इर्द गिर्द इतना सख्त पहरा बिठा दिया कि देखना तो दूर की बात वहां किसी को खडे होने तक की अनुमति तक नही थी। कुछ देर बार पुलिस प्रशासन ने उक्त शिलापट को पर्दे से ढक ही दिया गया। यह कार्यक्रम व सब कुछ भाजपा नेताओं की मौजूदगी मेंं हुआ जिसमें खासतौर पर प्रतिमा अनवारण कार्यक्रम में राज्य सभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर, दादरी विधायक मास्टर तेजपाल नागर, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय भाटी, लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर और साथ ही सासंद डा0 महेश शर्मा, जेवर विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह, नोएडा विधायक पंकज सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी आदि दर्जनों भाजपा नेता उपस्थित रहे। प्रतिमा अनावरण समारोह के बाद गुर्जर विद्या सभा ने मीडिया में खुलासा किया है कि चंद नेताओं ने यह प्रतिमा अनवारण कार्यक्रम हाईजैक कर लिया, जब कि इस कार्यक्रम में करीब 10 लाख रूपये तक गुर्जर विद्या सभा के खर्च हो गए और न विश्वविद्यालय मिल पाया और गुर्जर शब्द पर सियासत शुरू हो जाने से स्वाभिमान गिरा सो अलग। गुर्जर विद्या सभा, मिहिर भोज डिग्री कॉलेज प्रंबधकारणी सदस्य महेश भाटी ने बताया कि घर में गुर्जर बिरादरी का स्वाभिमान गिरा है जिसे कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा। जब तक उक्त शिलापट पर गुर्जर शब्द नही लिख दिया जाता है और प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ इस घटना के लिए जिम्मेदार नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से माफी नही मांग लेते हैं तब यह लडाई जारी रहेंगी। रविवार को गुर्जर विद्या सभा और कई गुर्जर बिरादरी संगठनों ने मिहिर भोज डिग्री कॉलेज में महापंचात किए जाने का ऐलान किया था। किंतु पुलिस प्रशासन ने धारा-144 लागू होने और साथ धारा-188 कोविड-19 प्रोटोकाल के मद्देनजर महापंचायत किए जाने की अनुमति नही दी, साथ ही दादरी कसबे का छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया। किंतु इन सबके बावजूद दादरी के चिटहेड़ा गांव के मंदिर में रविवार को गुर्जर महापंचायत के लिए इकट्ठा हुए लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। खास बात यह रही कि पुलिस की नाकेबंदी के बावजूद भी इस महांपचायत में शामिल होने के लिए मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, कैराना, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक से गुर्जर बिरादरी के लोग पहुंचे। महापंचायत में शामिल होने पहुंचे सपा नेता राजकुमार भाटी ने जब पुलिस की कार्रवाई के विरोध में दादरी में जाम लगाने का प्रयास किया, तो पुलिस ने राजकुमार भाटी और कई अन्य सपा नेताओं को भी हिरासत में लिया। वहीं, पूर्व सांसद व मीरापुर सीट से भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना और पथिक सेना के अध्यक्ष व भाजपा पिछडा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यकारणी सदस्य मुखिया गुंर्जर ने चिटहेरा में हुई महापंचायत में हिस्सा लिया। मीरापुर विधायक अवतार सिंह भड़ाना कहा कि यह सरकार जनता और जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाना चाहती है। उधर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सम्राट मिहिर भोज की जाति को लेकर उपजे विवाद में दखल देते हुए भी रविवार को भारतीय जनता पार्टी  पर निशाना साधा और कहा कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर.प्रतिहार थे, लेकिन पार्टी के नेताओं ने उनकी जाति ही बदल दी, यह निंदनीय है। अखिलेश ने आज ट्वीट कर कहा, कि ये इतिहास में पढ़ाया जाता रहा है कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर.प्रतिहार थे पर भाजपाइयों ने उनकी जाति ही बदल दी है, जो निंदनीय है। छलवश भाजपा स्थापित ऐतिहासिक तथ्यों से जान.बूझकर छेड़छाड़ व सामाजिक विघटन करके किसी एक पक्ष को अपनी तरफ करती रही है। हम हर समाज के मान.सम्मान के साथ हैं। दादरी में गुर्जर समाज के अक्रोश को देखते हुए और साथ ही सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ट्वीट से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और भाजपा चौतरफा गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के प्रतिमा अनवारण मुद्दे पर घिर गई हैं। फिलहाल दादरी का यह रण थमता दिखाई नही दे रहा है कि यदि सब कुछ ऐसा ही चलता रहा तो आगामी विधानसभा-2022 चुनावों में इसका खमियाजा भाजपा को गौतमबुद्धनगर ही नही बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में भुगतना पड सकता है। गौतमबुद्धनगर की बात करें तो यहां गुर्जर बिरादरी के अलावा ठाकुर बिरादरी की एकजुटता भी निर्णायक रही है। नोएडा और दादरी विधानसभाएं बेशक गुर्जर बाहुल्य रही हों किंतु जिले की 3 विधानसभाओं में से 2 पर आज भी ठाकुर बिरादरी के विधायक हैं। दादरी और जेवर विधानसभा की बात करें तो यहां भी गुर्जर बिरादरी के साथ साथ ठाकुर बिरादरी भी निर्णायक रही है। दादरी में साठा चौरासी का इलाका ठकुर बिरादरी का मजबूत दुर्ग माना जाता है। ठाकुर बिरादरी तो पहले से ही भाजपा का पंरापरागत वोट बैंक मानी जाती रही हैं। किंतु जिले में सासंद से लेकर तीनों विधानसभाओं और यहां तक ही जिला ंपंचायत अध्यक्ष समेत तमाम सदनों में भाजपा का दबदबा कायम हैं गुर्जर बिरादरी ने भी जरूर भाजपा का साथ दिया है। कहना ये है कि यदि दादरी में गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा अनवारण से शुरू हुआ यह रण यहीं नही थमता है तो भाजपा की उलटी गिनती शुरू होनी तय है।