जय जवान, जय किसान, सबका हक एक समान, भारत देश में हो सबका सम्मान, सभी मिलकर कर लो ध्यान

 



चौधरी शौकत अली चेची


--------------------------बिहार में सरकारी मंडियां समाप्त हो गई, किसानों की आय लगभग 4500 है। उत्तर प्रदेश में लगभग 8500 है। हरियाणा और पंजाब में लगभग 18500 किसानों की आय है, वहां एमएसपी पर 90 प्रतिशत धान, गेहूं आदि खरीदा जाता है। मध्यप्रदेश में लगभग 50 सरकारी मंडियां समाप्त हो गई तथा लगभग 7 करोड़ का माल किसानों का व्यापारी लेकर फरार हो गए। देश में लगभग 7000 मंडियां हैं जबकि 40000 मंडियों की आवश्यकता है बताया जा रहा है 9000 गोदामों की परमिशन अदानी अंबानी को मिल चुकी है। देश में अदानी अंबानी के 8 गोदाम बन चुके हैं। तीन कृषि काले कानून आने से अन्नदाता ने नरेंद्र मोदी सरकार की पोल खोल कर रख दी है। किसान अपने हक की लड़ाई ईमानदारी के साथ लड़ रहा है। आंदोलनरत किसानों को कई महीने हो चुके हैं और 300 से ज्यादा किसानों ने धरने में शहादत दे दी है। मोदी सरकार समझ रही है किसान कुछ दिन बाद हार कर बैठ जाएंगे। 24 घंटे मेहनत, भूख, प्यास और गर्मी सर्दी को सहन करने वाला लगभग 70 प्रतिशत देश की जनता की पूर्ति करने वाला देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए जवान तैयार करने वाला अन्नदात मोदी सरकार के लिए कांटे की तरह चुभ रहा है, जो हार मानने वाला नहीं है। किसान केवल अपने लिए नहीं लड़ रहा पूरे देश के लिए संघर्ष कर रहा है। अन्नदाता अपने माल की कीमत व लागत मांग रहा है। सरकार देना नहीं चाह रही। दिलचस्प यह भी है किसान अपनी मजदूरी नहीं मांग रहा देश आजादी के बाद नेता व सरकारी व प्राइवेट कर्मचारी की सैलरी लगभग 1000 प्रतिशत तक बढ़ी है, लेकिन किसान के माल की कीमत 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। डीजल, पेट्रोल 90 से 98 प्रतिशत तक बढ़ा है। बिजली बिल लगभग 400 प्रतिशत बढ़ा है। किसान की मेहनत मजदूरी को जोड़ा जाए तो 0 प्रतिशत लाभ है। किसान का हक नहीं मिलने के कारण हर वर्ष हजारों किसान आत्महत्या कर लेते हैं। उम्मीद की किरण के साथ सरकार बदलते हैं, लेकिन मायूसी के सिवा कुछ नहीं मिलता। देश में लगभग 60 प्रतिशत किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं, जिसके हजारों उदाहरण हैं। तीन कृषि बिल लाकर मोदी सरकार कृषि प्रधान देश भारत की कृषि संरचना को समाप्त करना चाह रही है। किसानों के लिए देखना बाकी है कि आर्थिक स्थिति के हिसाब से भारत देश बर्बादी के कगार पर खड़ा है। समझना यह भी है अगर देश तरक्की करता है तो जिन वस्तुओं की कीमत केंद्र सरकार लगाती है, उनकी कीमत में इजाफा होता है, तो समझो देश कर्ज में डूब रहा है। असल सवाल यह भी है सब कुछ बेच दिया अन्नदाता बाकी है। फकीर आदमी हैं, झोला उठाकर चल पड़ेंगे, जो देश छोड़कर भाग गए, विदेश में जाकर दोस्ती कर लेंगे। समझना होगा सभी फसलों के लिए एमएसपी पर गारंटी कानून बनेगा। फसलों का वाजिब दाम मिलेगा।  सरकार गिरेगी या ईवीएम गोदी मीडिया उद्योगपति भारी रहेंगे। अजीब विडंबना है सरकार बनाने वाला वोटर कानून का विरोध या उल्लंघन करें तो अपराधी, कानून बनाने व पालन कराने वाले कानून का उल्लंघन या दुरुपयोग करने पर भी सत्यवादी। जय जवान, जय किसान, सबका हक एक समान, भारत देश में हो सबका सम्मान, सभी मिलकर कर लो ध्यान।

लेखकः. चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।