कृष्णा हॉस्पिटल एवं जच्चा बच्चा केंद्र दनकौर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डा0 अनिता खुराना चौहान से स्त्रियों मे होने वाली कई तरह की बीमारियों के कारण, बचाव के उपाय और इलाज के बारे में ’’विजन लाइव’’ डिजिटल मीडिया की खास बातचीत


मौहम्मद इल्यास/गौतमबुद्धनगर


----------------------------------- डा0 अनिता खुराना चौहान जानी मानी कॉस्मेटोलॉजिस्ट और हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और फेशियल सौंदर्य विशेषज्ञ हैं और साथ में जनरल फिजिशियन भी हैं। डा0 अनिता खुराना चौहान ने  लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली से एम¬.बी.बी.एस¬ किया है। साथ ही क्लिनिकल कॉस्मेटोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया है। जब कि डी.जी.ओ. जे.एन.यू महाराष्ट्र   नागपुर से किया और एम.डी. यू.एस.ए.आई.एम. से किया है। डा0 अनिता खुराना चौहान को स्त्री रोगों के बारे में भी खासी महारत हासिल हैं और उन्होंने हाल मेंं दनकौर स्थित कृष्णा हॉस्पिटल एवं जच्चा बच्चा केंद्र में बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में ज्वाइन किया है। विजन लाइवडिजिटल मीडिया ने स्त्री रोग विशेषज्ञ डा0 अनिता खुराना चौहान से स्त्रियों मे होने वाली कई तरह की बीमारियों के कारण, बचाव के उपाय और इलाज के बारे में चर्चा की, आइए रूबरू कराते हैं इन तमाम सवाले के बारे में।





सवालः-महिलाओं में होने वाले रोग कौन कौन से हैं?

जवाबः- पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज यानी पीआईडी से महिलाएं ज्यादा ग्रस्त हैं। मोटे तौर पर कहा जाए तो पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज पेडू में सूजन होती है। यह अब मेट्रो शहरों की महिलाओं में इन्फर्टिलिटी का बड़ा कारण बन रही है। वैसे तो यह समस्या सभी उम्र की महिलाओं में हो जाती है मगर 15-.24 साल तक की लड़कियांं में यह दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है। इसका असर उनके मां बनने पर पड़ सकता है। यह हार्मोनल डिसऑर्डर है जिसमें रोगी महिला के गर्भाशय, फेलोपियन ट्यूब व प्रजनन से जुड़े अंगों में सूजन आती है।

सवालः- पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज को कैसे पहचाना जा सकता है, लक्षण क्या होते हैं?

जवाबः- कुछ मामलों में पीआईडी बिना किसी लक्षण के भी हो सकता है जैसे क्लैमाइडिया के कारण होने वाला पीआईडी। वहीं, इसके कुछ आम लक्षण जैसे बुखार आना,पेल्विक एरिया, निचले पेट या निचली पीठ में दर्द होना,योनि से असामान्य रंग, टेक्सचर या गंध का स्त्राव होना। यही नहीं पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के कुछ और लक्षण भी हो सकते हैं जिनमें यौन संबंध के बाद रक्तस्त्राव होना,ठंड लगना या कंपकंपी होना, थकान महसूस होना,बार.बार पेशाब आना,माहवारी के समय सामान्य से अधिक दर्द होना और माहवारी में असामान्य रूप से रक्तस्त्राव होना,भूख न लगना,उल्टी या मतली आना,हर महीने समय से पीरियड न होना,शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द होना यदि ये सब दिक्कतें दिखाई पडे तो समझ लिजिए पीआईडी हो चुकी है।

 सवालः पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज होने का मुख्य कारण किसे माना जाता है?

जवाबः-पीआईडी एक तरह का संक्रमण है। यह संक्रमण बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। जब बैक्टीरिया योनि से होते हुए प्रजनन अंगों में पहुंच जाते हैं, तो संक्रमण का कारण बन सकते हैं। ये बैक्टीरिया किसी यौन संचारित संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति के साथ असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। कुछ अन्य माध्यमों से भी बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जैसे प्रसव के दौरान,एंडोमेट्रियल बायोप्सी,कैंसर के परीक्षण के लिए गर्भ के छोटे टिश्यू को निकालन के चलते,अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण  लगवाने के दौरान,गर्भपात के बाद,एबॉर्शन करवाने के बाद भी इस तरह की दिक्कत अक्सर देखने में आती है।

सवालः- पीआईडी में संभावित जटिलताएं क्या हो सकती है?

जवाबः- श्रोणि में सूजन के कारण पेल्विक अंगों में घाव हो सकता है। इस अवस्था में ऑपरेशन की जरुरत भी पड़ सकती है। इसके अलावा कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे पेल्विक में क्रोनिक दर्द यानी लंबे समय तक चलने वाला दर्द,एकटोपिक प्रेगनेंसी यानी ऐसी गर्भावस्था जिसमें गर्भ गर्भाशय से बाहर बढ़ने लगता है,  साथ बांझपन यानी इनफर्टिलिटी का खतरा भी बढ जाता है। फैलोपियन ट्यूब और ओवरी में फोड़ा और पस बन सकता है। अपेंडिक्स या आंत का संक्रमण भी हो सकता है।

सवालः-पीआईडी को कैसे रोका जा सकता है?

जवाबः-श्रोणि में सूजन का कारण हमेशा यौन संचारित संक्रमण नहीं होते। इसके कई अन्य कारण भी हैं जैसा कि ऊपर बताया गया है। फिर भी कुछ बातों को ध्यान में रखने से इसके होने की आशंका को कम किया जा सकता है। जैसे यौन संबंध बनाते समय कंडोम का उपयोग करें। इससे यौन संचारित संक्रमण होने की संभावना कम हो जाती है। शारीरिक संबंध बनाने से पहले अपनी और अपने साथी की यौन संचारित संक्रमण की जांच करवाएं और परिणाम एक दूसरे को बताएं। एक से अधिक व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से बचें। इससे यौन संचारित संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। साबुन या एंटिसेपटिक का इस्तेमाल श्रोणि पर ना करें। पानी की तेज धार जैसे स्प्रे आदि से न धोएं। ऐसा करने से वो अच्छे बैक्टीरिया भी धुल सकते हैं, जो श्रोणि को सुरक्षित रखने में मद्द करते हैं। साथ ही पानी के प्रेशर से बुरे बैक्टीरिया योनि मार्ग से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। शराब और अन्य नशे का सेवन न करें।

सवालः- पीआईडी के लिए डॉक्टर से परामर्श कब करना चाहिए?

जवाबः- इस तरह की परिस्थितियों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने जरूरत होती है। पीआईडी के लक्षण महसूस होने पर यानी यौन संचारित संक्रमण होने की आशंका पर तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है? अगर किसी को पहले पीआईडी हुआ है, तो उसे दोबारा होने की आशंका बढ़ जाती है। वैसे इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका इलाज संभव है। इसलिए अगर किसी भी महिला को इस समस्या के लक्षण महसूस हों, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

सवालः-पीआईडी का उपचार क्या है और किन सावधानियों की जरूरत होती है?

जवाबः-पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज एक तरह का बैक्टीरियल संक्रमण है और इस कारण इसका सबसे पहला उपचार एंटीबायोटिक देकर करने की कोशिश की जा सकती है। सिंड्रोम एप्रोच के द्वारा कई तरह की कारगर दवाईयां दी जाती है। इसके अलावा पीआईडी का उपचार अन्य तरीकों से भी किया जा सकता है। जब कि माइल्ड पीआईडी होने पर क्लिनिक में एंटीबायोटिक का एक शॉट दिया जा सकता है। इसके बाद लगभग दो हफ्ते तक एंटीबायोटिक लेने की सलाह देकर घर भेज दिया जाता है। विशेष परिस्थिति में रोगी को डॉक्टर के देखरेख में रहने की भी सलाह दी जाती है।

सवालः-पीआईडी के गंभीर रूप से ग्रसित होने पर रोगी की किस तरह से चिकित्सा की जाती है?

जवाबः- ऐसी स्थिति में रोगी को अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए और ड्रिप से एंटीबायोटिक चढ़ाया जाता है। इसके बाद एंटीबायोटिक की गोली भी दी जा सकती है। अगर श्रोणि में सूजन यौन संचारित संक्रमण के कारण हुई है, तो उसका अलग ट्रीटमेंट करवाना जरूरी है। यहां तक कि महिला के पार्टनर को भी इलाज की जरूरत होती है। वहीं, एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करने के बाद अपने डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी होता है। इससे यह जांचा जा सकता है कि शरीर में और बैक्टीरिया न बचे हों।