यूपी की भाजपा सरकार अब रिपोर्ट कार्ड पेश कर अपनी उपलब्धियों का खूब ढिंढोरा पीट रही है, मगर क्या यह 4 साल बेमिसाल एक झूठ का पुलिंदा नही ?

 




चौधरी शौकत अली चेची


-----------------------------उत्तर प्रदेश की महंत योगी आदित्यनाथ सरकार को गत 19 मार्च 2021 को पूरे 4 साल हो गए। यूपी की भाजपा सरकार अब रिपोर्ट कार्ड पेश कर अपनी उपलब्धियों का खूब ढिंढोरा पीट रही है। मगर क्या यह 4 साल बेमिसाल एक झूठ का पुलिंदा नही है? योगी सरकार का 4 साल का रिपोर्ट कार्ड सिर्फ भ्रष्टाचार, अत्याचार, बलात्कार, बेरोजगारी, महंगाई आदि का जंजाल है। यदि ऐसा नही होता तो गौतमबुद्धनगर जिले के ही मोहम्मद अखलाख हत्याकांड के लिए सुखियों में रहे बिसाहड़ा गांव 21 मार्च-2021 को भाजपा नेताओं का विरोध हुआ। आइए एक नजर डालते हैं कि योगी सरकार के 4 साल बेमसिल रिपोर्ट कार्ड पर। कोविड-19 काल में लगातार धारा 144 लागू रही और जांच के नाम पर करीब 500 प्रोजेक्ट न केवल रोक दिए गए बल्कि खूब लूटपाट हुई। रोमियो एस्कॉर्ट बनाकर परिवार के लोगों को पुलिस ने टॉर्चर किया और खूब पैसा कमाया। गौ रक्षा के नाम उपद्रवियों ने कई लोगों को निशाना बनाया और बेचोरी बेजुबान गौमाता का भूखे मरने के लिए सडकों पर छोड दिया। आखिर यह कैसा गोभक्त सीएम जो खुद तो ऐश ओ आराम से जीए और बेचारी गौ माता भूखी मारी मारी फिरती रही। आखिर पेट का सवाल जो होता है ये भूखे प्यासे गौवंशों ने खेतों की ओर रूख करना शुरू किया मगर वहीं अन्नदाता किसान की फसलों पर जो बन आई। इन भूखे प्यासी गौ माताओं की वजह से किसानों के खेत के खेत बर्बाद हो गए। क्या मुख्यमत्री योगी आदित्यनाथ के खजाने कुछ कमी है, इन भुखी प्यासे गौवंशों के चारे पानी के लिए सरकार कुछ क्यों नही कर सकती थी। जब दीपावली आदि त्यौहारों के मौके पर अयोध्या जाकर सीएम योगी दीपोत्सव के नाम पर करोडों बहा सकते हैं तो फिर गाय के नाम पर चल रही सरकार फिर गौवंशों का पेट क्यों नही भर सकती है। इसका जवाब तो इस सूबे की भाजपा सरकार को देना ही पडेगा। भाजपा सरकार ने  किसानों और पशुओं को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया। इन भूखे प्यासे गौवंशों से आपसी लड़ाई झगड़े तथा किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं साथ ही सड़कों पर काफी लोगों की जान चली गई। अब तो गौशालाओं में गायों का बुरा हाल है। हिंदुत्व को खुश करने के लिए योगी सरकार मुस्लिमों को निशाने पर लेती रही। सपा सांसद आजम खां पर बदले की भावना से कार्यवाही की गई। मीट की दुकान खोलने पर 9 शर्तें लागू कर दी। बूचड़खाने के नाम पर पुलिस ने जमकर लोगों को परेशान किया। हत्या जैसे मामलों में आरोपी रहे लोगों का माला पहना मंच पर स्वागत तक किया गया। बुलंदशहर इज्तमा में जब इंस्पेक्टर ने खून खराबे को रोक दिया तो उस साहसी और जाबांज की हत्या कर दी गई। आखिर वो हत्यारोपी बाद में भाजपा में शामिल नही हुआ था क्या इसी प्रकार बिसहाडा अखलाक कांड में देखने को मिला। मुस्लिम ही नही बल्कि हिंदुओं की भी इस योगी सरकार में हत्या नही हुई है क्या? दूसरी तरफ योगी सरकार में कहा जा रहा है कि नारी सम्मान और बेटी बचाओ बेटी पढाओं इस बात के लिए हाथरस कांड जगजहिर है। मातृ शक्ति, जगत जगनी, शक्ति स्वरूपा नामों से ानी जाने वाली बेटी की अस्मत लूटी गई और फिर आधी रात के बाद पुलिस ने एक क्रूर अपराधी की तरह से दाह संस्कार तक कर दिया गया। आखिर कहां चली गई थी उस समय सीएम योगी और उनकी सरकार की संवेदनशीलता? साथ में बालात्कार के बढे हुए मामले नारी सम्मान के लिए र्प्याप्त तथ्य हैं। रोजगार की बात करें तो पता चलता है कि करोडों़ रुपए नौकरी फार्म भरने के नाम पर कमा लिए गए मगर मिली कितने लोगों को नौकरी? कोविड-19 काल में 50 प्रतिशत लोगों की नौकरी चली गई बाकी बचे लोग 50 प्रशित कम सैलरी में नौकरी करने पर मजबूर हैं। सरकारी मुलाजिमों की सैलरी में कटौती कर दी गई और वहीं कर्मचारियों की समय पर सैलरी नहीं मिल रही है। यूपी में गौतमबुद्धनगर,कानपुर और गाजियाबाद ऐसे जनपद हैं जहां नौकरियों की भरमार रहती हैं। मगर कोविड-19 में आज तक आंकडा उठा कर देख लीजिए इन जिलों में बेरोजगार हुए लोगों ने डिप्रेशसन में आकर मौत को गले लगा लिया। आए दिन पुलिस के रिकार्ड में आनी वाली सुसायड खबरें इस बात का गवाह है। अन्नदाता किसान की बात करें तो  खाद बीज खरीदने पर और फसल बेचने पर आधार कार्ड को अनिवार्य कर लिमिट तय कर दी। किसानों की फसल का माल लगभग 9 प्रतिशत ही एमएसपी पर खरीददारी की है और किसानों के माल की धनराशि देना सीधा लखनऊ सचिवालय से किया जा रहा है तुरंत भुगतान पर 3 प्रतिशत की कटौती किसानों का बोनस समाप्त कर दिया। किसानों का गन्ने का भुगतान लगभग 15000 करोड रुपए यूपी सरकार पर आज भी बकाया है किसानों का गन्ना बकाया सपा सरकार  लगभग 700 करोड रुपए छोड़ कर गई थी। करप्शन की बानगी के लिए गाजियाबाद के मुरादनगर शमशान घाट का हादसा सबके सामने हैं। यदि शमशान घाट के शैड् में घटिया साग्रमी नही लगाई जाती तो छत गिरने से दर्जनों लोग काल के गाल में नही समा जाते। योगी सरकार में पहली बार शमशान से घर की तरफ लाशें जाती हुई देखी गईं। एनकांउटर के नाम पर खूब बेकसूर लोगों को खून बह गया। ग्रेटर नोएडा में सुमित एनकांउटर इस बात का खुला गवाह है। सुमित इतना बडा बदमाश नही था कि रातो रात इनामी बनाया गया फिर अगले दिन शूटआउट? कई बडे बदमाश आज यूपी की भोली भाली जनता के लिए सिर दर्द बने हुए हैं। कोरानाकाल में छात्र.छात्राओं की फीस माफी का कोई ब्लू प्रिंट तैयार नहीं किया गया। स्कूल कॉलेज विद्यालयों में छात्र.छात्राओं पर लगभग 30 प्रतिशत महंगाई का बोझ बढ़ा कोराना में ही लगभग 15 साल पुराने बिजली बिल बकाया जुर्माना लगाकर वसूल रहे हैं। इन स्कूल मालिकों की गुंडई पर योगी की सरकार मेहरबान है। आखिर  जिसके नहीं होता घर परिवार उसे कहते हैं भाजपा की योगी सरकार।

लेखकः. चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज)  के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।