विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम गौतमबुद्धनगर वेदप्रकाश वर्मा ने सुनाया फैसला

 




सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता(दाण्डिक)गौतमबुद्धनगर धर्मेंद्र जैन्त ने बताया कि बबीता हत्याकांड में मामले के तथ्यों, परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम गौतमबुद्धनगर वेदप्रकाश वर्मा ने अभियुक्त परविन्दर को आजीवन कारावास एवं 60000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।

 




मौहम्मद इल्यास/गौतमबुद्धनगर

----------------------------------गौतमबुद्धनगर न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में अभियुक्त परविंद्र को आजीवन कारावास एवम 60000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। मुकदमा अपराध संख्या 552 सन् 2015 धारा.452, 302/34, 201 भारतीय दण्ड संहिता व 3(2)5 अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, थाना.बिसरख, जिलाः-गौतमबुद्धनगर में सत्र परीक्षण के दौरान यह दण्डादेश दिया गया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता(दाण्डिक)गौतमबुद्धनगर

धर्मेंद्र जैन्त ने बताया कि सत्र परीक्षण संख्या
197 सन् 2016 0 प्र0 राज्य प्रति अभियोजन पक्ष परविन्दर चौधरी पुत्र अजय सिंह जाट,विमला पत्नी अजब सिंह जाट,.विनीता पत्नी नीरज चौधरी,निवासीगण ग्राम चिपियाना बुजुर्ग, थाना.बिसरख, जिलाः- गौतमबुद्धनगर विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर द्वारा पारित आदेश दिनांकित 20/01/2015 के अधीन विचारण हेतु माननीय सत्र न्यायाधीश, गौतमबुद्धनगर के समक्ष उपार्पित किया गया जहां से स्थानांतरित होकर पत्रावली इस न्यायालय में विचारण हेतु प्राप्त हुई। वादी राजकुमार ने इस आशय की प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत कराई कि प्रार्थी अनुसूचित जाति ( कोरी ) से है। दिनांक 16/12/2015 को वह अपनी ड्यूटी पर गया था तथा दोनों बच्चे स्कूल गए थे। घर पर उसकी पत्नी बबीता अकेली थी। दोपहर 12.15 बजे उसे उसके भतीजे मुकेश ने फोन से सूचना दी कि घर में घुसकर धारदार हथियार से बबीता की हत्या कर दी गई है। वह तुरंत घर आ रहा था, रास्ते में ही उसे सूचना मिली कि बबीता को यशोदा अस्पताल लेकर आ गए है, वह यशोदा अस्पताल पहुंचा जहां पर उसकी पत्नी को मृत घोषित कर दिया गया। आखिर उसे जानकारी मिली है कि उनके ही मौहल्ले का परविंदर चौधरी घायल अवस्था मे उसके घर से चिल्लाता हुआ बाहर निकला। उसे पूरा शक है कि परविंदर चौधरी ने ही उसकी पत्नी की हत्या की है। उसकी पत्नी का शव यशोदा अस्पताल में रखा है। वादी की उक्त तहरीर रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 552 सन् 2015 अंतर्गत धारा 452, 302/34, 201 भारतीय दण्ड संहिता, 3(2)5 अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम थाना.बिसरख, जिलाः-गौतमबुद्धनगर में पंजीकृत हुआ। इस मामले में विवेचक द्वारा विवेचना के उपरांत अभियुक्तगण परविन्दर चौधरी, विमला तथा विनीता के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने के आधार पर आरोप पत्र विचारण हेतु न्यायालय में प्रेषित किया गया जहां से दण्ड वाद सत्र न्यायालय, गौतमबुद्धनगर दिनांक 09/03/2016 को विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर द्वारा उपार्पित किया गया। गौतमबुद्धनगर न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में विचारण किया गया और अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष की ओर से कई अलग अलग प्रकार से गवाह, सुबूत, बयान प्रस्तुत किए गए। साथ ही संबंधित पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं ने अलग अलग प्रकार से तर्क भी प्रस्तुत किए।.अभियोजन पक्ष की साक्ष्य समाप्त होने के उपरान्त अभियुक्तगण के बयान अन्तर्गत धारा 313 दण्ड प्रक्रिया संहिता लिपिबद्ध किया गया जिसमें अभियुक्तगण द्वारा प्रस्तुत प्रकरण की घटना से इन्कार करते हुए कथन किया गया है कि उनके विरुद्ध यह मुकदमा गलत चला है तथा उनकी झूठा फंसाया गया है। जब कि विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दाण्डिक तथा विद्वान अधिवक्ता अभियुक्त के तर्को को सविस्तार सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवम् प्रलेखीय साक्ष्य का परिशीलन किया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता(दाण्डिक)गौतमबुद्धनगर धर्मेंद्र जैन्त ने बताया कि बबीता हत्याकांड में मामले के तथ्यों, परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम गौतमबुद्धनगर वेदप्रकाश वर्मा ने अभियुक्त परविन्दर को आजीवन कारावास एवं 60000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। दोष सिद्ध अभियुक्त उपरोक्त परविन्दर को अपराध अंतर्गत धारा 452 भारतीय दण्ड संहिता के आरोप हेतु चार वर्ष के कारावास तथा दस हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। अर्थदण्ड अदा न किए जाने की स्थिति में 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही अपराध अंतर्गत धारा 302 भारतीय दण्ड संहिता के आरोप हेतु आजीवन कारावास व 20 हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। अर्थदण्ड अदा न किए जाने की स्थिति में 1 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अपराध अंतर्गत धारा 3(2)5 अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के आरोप हेतु आजीवन कारावास व 30 हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। अर्थदण्ड अदा न किए जाने की स्थिति में डेढ़ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। ये सभी सजाएं साथ.साथ चलेंगी और अभियुक्त द्वारा पूर्व में कारागार में व्यतीत की गई अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी।