वैलेंटाईन-डे पाश्चत्य संस्कृति की देन है, इसे छोड कर मातृ पितृ पूजन दिवस मनाना चाहिएः श्री गोपाल दास जी महाराज



मौहम्मद इल्यास/बिलासपुर

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बिलासपुर क्षेत्र के ग्राम रामपुर मांजरा में नो वैलेंटार्डन-डे और मातृ पितृ पूजन कार्यक्रम हिदुं युवा वाहिनी के तत्वाधान में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा जयकरण सिंह ने की। समारोह को संबोधित करते हुए हिदुं युवा वाहिनी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष व श्री श्री 1008 महामंडेलश्वर श्री गोपाल दास जी महाराज ने कहा कि हिंदु समाज को एकजुट किए जाने का अब समय गया है। हिदुं समाज बिखरा हुआ है यही कारण है कि भारत में हिंदु विकास की दौड में पिछड गया है। उन्होंने कहा कि वैलेंटाईन-डे पाश्चत्य संस्कृति की देन है। इसे छोड कर मातृ पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाना चाहिए। सनातन संस्कृति में उल्लेख आता है कि भगवान भोले शंकर और मां पार्वती के दो पुत्र कार्तिक और गणेश थे। दोनों ही अपने गुणों में निपुण और एक से बढकर एक थे। एक दिन दोनों भाइयों में इस बात को लेकर बहस हो गई कि बड़ा कौन। अपनी बुद्धि और पराक्रम से दोनों एक.दूसरे के तर्क और ताकत को काटते जा रहे थे। देवों ने यह देखा तो उन्हें लगा कि इस झगड़े का तो कोई अंत ही नहीं। उन्होंने दोंनो भाईयों से अनुरोध किया कि वह अपने माता.पिता, शिव और पार्वती जी के पास जाएंए वही इस समस्या का समाधान कर सकेंगे। देवों का यह सुझाव मानकर कार्तिक और गणेश जी अपने माता.पिता के पास चल दिए। जब भगवान भोले शंकर और  मां पार्वती ने इस दुविधा को सुना कि कार्तिक और गणेश में बड़ा कौन है, तो पहले मुस्कुराए। फिर दोनों भाइयों के बीच में एक प्रतियोगिता रखी। उन्होंने कहा कि जो इस ब्रह्माण्ड के तीन चक्कर लगाकर सबसे पहले वापस आएगा, वही दोनों में से बड़ा होगा। दोनों भाइयों ने इस शर्त को माना और चक्कर लगाने गए। कार्तिक अपनी सवारी मोर पर विराजमान हुए और तेज गति से उड़ चले। रास्ते में उन्होंने पवित्र स्थानों को नमस्कार किया और प्रार्थना अर्पण किए। उधर गणेश जी भी अपनी सवारी चूहे पर सवार होकर चल दिए ब्रह्माण्ड भ्रमण के लिए, पर कहां मोर की उड़ान और कहां चूहे की चाल। गणेश जी को लगा कि वह कितनी भी तत्पर कोशिश कर लें पर वे कार्तिक को परास्त नहीं कर पाएंगे। तभी उनके मन में एक विचार आया। उन्होंने माता पार्वती और पिता शिव का बहुत मन से ध्यान किया और उनके ही तीन चक्कर लगा लिए। जब माता.पिता ने इसका अर्थ पूछा तो उन्होंने कहा कि सारा ब्रह्माण्ड तो महादेव और माता पार्वती में ही समाया हुआ है, अतः अगर सच्चे मन से ध्यान करके उनका ही चक्कर लगा लिया जाए तो वह पूरे ब्रह्माण्ड के चक्कर के बराबर है। जब कार्तिक लौटे तो गणेश जी को वहां पाकर आश्चर्यचकित रह गए। परंतु जब उन्होंने गणेश जी का तर्क सुना तो उन्होंने भी अपनी हार मान ली। इसलिए माता पिता से बढ कर कोई नही है। माता पिता और आचार्य यही परम गुरू हैं। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री विक्रम राठौर ने कहा कि हिदुं समाज एकजुट नही है और इसी बिखराव के चलते हुए लव जिहाद जैसे मामले प्रकाश में आ रहे हैं। हिदुं युवा वाहिनी हिंदू समाज को एकजुट किए जाने के लिए दिन रात एक किए हुए है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई रिंकू शर्मा हत्याकांड मामले में हिदुं युवा वाहिनी पीडित परिवार के साथ तन मन और धन से है। जब तक रिंकू शर्मा के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा नही मिल जाती जब हिदुं युवा वाहिनी के कार्यकर्ता चैन से नही बैठेंगे। राष्ट्रीय महासचिव सुनील शास्त्री, प्रदेश महामंत्री विकास भारद्वाज, क्षेत्रीय प्रभारी राजीव अहलावत, क्षेत्रीय अध्यक्ष अंकुल चौधरी, बाबा भूतनाथ, बाबा किरनपाल दास जी, मेरठ मंडल प्रभारी रविंद्र नागर और मंडल महामंत्री सुजित भाटी, आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री आदि वक्ताओं ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। हिदुं युवा वाहिनी मेरठ मंडल अध्यक्ष व मातृ पितृ पूजन कार्यक्रम संयोजक विपिन भाटी ने आंगुतकों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर कार्यक्रम में बलराज प्रधान, प्रीतम, प्रिंस कुमार, मदन, बिजेंद्र, आजाद, ज्ञानचंद, सतपाल, अमित मावी और अशोक आदि पदाधिकारी, कार्यकर्तागण तथा गणमान्यजन उपस्थित रहे।