दमनकारी और बर्बर कार्रवाई से मनोहरलाल खट्टर सरकार ने अंग्रेजी शासन की याद ताजा कर दी है, इस पर किसान कतई चुप नहीं बैठेंगे



जय जवान, जय किसान, जायज हक मांगना हम सबका काम, हम सबका भारत देश है महान



चौधरी शौकत अली चेची

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देशवासी हो जाओ होशियार, जब किसानों पर हुआ अत्याचार, ऊपर वाले ने भी किसानों के दर्द को महसूस किया हैं। सरकारें अन्नदाता की आवाज को दबाना चाहती हैं। हरियाणा को ही ले लीजिए। हरियाणा की मनोहरलाल खट्टर सरकार द्वारा किसानों पर की गई बर्बरता का भाकियू  ’’बलराज’’ कडा  विरोध करती है। हरियाणा सरकार कोरोना महामारी के नाम पर आंदोलन को दबाना चाहती है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पीपली मंडी परिसर में आयोजित रैली पर हरियाणा पुलिस द्वारा की गई दमनकारी कार्रवाई को भारतीय किसान यूनियन बलराज दमनकारी और बर्बर कार्रवाई मानती है। मनोहरलाल खट्टर सरकार ने अंग्रेजी शासन को ताजा कर दिया है। इस पर किसान कतई चुप नहीं बैठेंगे और सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। किसानों की आय दुगनी हुई नहीं, पिछले कई सालों से किसानों पर लगभग 40 प्रतिशत का भार बढ़ा है। झूठ, गुमराह, नफरत का सहारा लेकर सरकार सत्ता में आई है। इस तरह की किसान व मजदूर विरोधी सरकारों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जायज हक मांगना भारत के संविधान ने सभी को दिया है। नफरत, बर्बादी, तानाशाही सरकार के रवैए को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों और नौजवानों पर सरकार की दमनकारी नीतियां देश को को बर्बादी की तरफ धकेल रही हैं। यह नहीं भूलना चाहिए सभी को किसान हमारे देश की रीढ़ है, जायज हक मांगना कोई अपराध नहीं है। देश की पुलिस को भी समझना चाहिए जो किसान अपने खून पसीने की कमाई से परिवार को पालकर ईमानदारी के साथ देश का पेट भरता है और साथ ही देश की आर्थिक स्थिति को अपने कंधों पर संभाले हुए हैं, उन पर लाठी चार्ज करना और संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज करना सबसे बड़ा पाप है। भारत का किसान न्यायकारी, परोपकारी, ईमानदार, सहनशील, आशावादी और सब्रदार है, लेकिन खट्टर सरकार ने सारी सीमाएं लांग कर घोर अपराध किया है, जिसका खामियाजा भाजपा की केंद्र व राज्य की इस सरकार को आने वाले चुनाव में भुगतना ही पड़ेगा। फसल बीमा योजनाएं, घोषणाएं, महंगाई, भ्रष्टाचार इन सभी झूठी बातों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को नाजुक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। सरकारों की तरफ से दी गई यातनाएं देश के कोने कोने में किसानों के कानों में गूंज रही हैं, जिस दर्द को लेकर किसान सोता है, उसी दर्द को लेकर जागता है। उम्मीद की किरण खोजता है सोचते हुए शाम ढल जाती है, आशा निराशा में बदल जाती है, लेकिन किसान कमजोर नहीं है,ं भूखे पेट जी तोड़ मेहनत करता है, अपने खून पसीने की कमाई से अपने परिवार की परवरिश कर देश की चमत्कारी में चार चांद लगाता है। सरकारों के पाप का घड़ा फूटने वाला है। देश का किसान जाग गया है, किसी भी जुर्म को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जय जवान, जय किसान, जायज हक मांगना हम सबका काम, हम सबका भारत देश है महान।

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज  ) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।