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गांधी-शास्त्री जयंती पर नन्हक फाउंडेशन के बच्चों ने दी महान सपूतों को अनूठी श्रद्धांजलि


गीत, कविता, वक्तव्य और चित्रकला के जरिए बच्चों ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री को किया याद, 8 वर्षीय रोहन की गांधी जी की स्केच ने खींचा सभी का ध्यान

  मौहम्मद इल्यास-" दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर ग्रेटर नोएडा के इटा-1 स्थित बिगनिंग मिशन एजुकेशन सेंटर में नन्हक फाउंडेशन के बच्चों ने दोनों महान नेताओं को अनूठे अंदाज में याद किया। कार्यक्रम में बच्चों ने गीत, कविताओं, वक्तव्यों और चित्रकला के माध्यम से गांधी जी एवं शास्त्री जी के जीवन, विचारों और व्यक्तित्व को सामने रखा।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को देश के महान सपूतों के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराने के साथ-साथ उनमें छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना भी रहा।

छह वर्षों से जरूरतमंद बच्चों के लिए काम कर रहा फाउंडेशन

नन्हक फाउंडेशन के अनुसार संस्था पिछले करीब छह वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर, दलित एवं वंचित परिवारों के बच्चों को निःस्वार्थ एवं निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है।

फाउंडेशन की ओर से बच्चों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें नृत्य, संगीत, कला तथा स्वरोजगार से जुड़े कौशलों के लिए भी तैयार किया जाता है। इसके लिए संस्था की ओर से बच्चों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

बच्चों को पहनने के लिए ड्रेस, जूते, मौसम के अनुसार गर्म कपड़े, पाठ्य सामग्री, कलात्मक गतिविधियों से संबंधित सामग्री तथा पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है।

संस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा और प्रतिभा के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक परिस्थितियां उनकी प्रतिभा के विकास में बाधा न बनें।

विशेष एवं दिव्यांग बच्चों को भी मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

नन्हक फाउंडेशन सामान्य बच्चों के साथ-साथ विशेष एवं दिव्यांग बच्चों के लिए भी कार्य कर रहा है। संस्था का प्रयास है कि विशेष जरूरत वाले बच्चों को भी ऐसा वातावरण मिले, जहां वे दूसरे बच्चों के साथ सीख सकें, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि कई विशेष जरूरत वाले बच्चों में प्रतिभा मौजूद होती है, लेकिन उचित अवसर और प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण उनकी क्षमता सामने नहीं आ पाती।

संस्था का मानना है कि यदि ऐसे बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ सीखने और आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए तथा उनकी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहयोग एवं मेहनत की जाए, तो उनकी प्रतिभा को निखारा जा सकता है और वे समाज एवं परिवार में सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

बच्चों ने गांधी और शास्त्री के जीवन पर रखे विचार

गांधी-शास्त्री जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में फाउंडेशन के बच्चों ने दोनों महान नेताओं के जीवन और उनके विचारों पर अपने-अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए।

बच्चों ने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण आंदोलन के विचारों के साथ-साथ लाल बहादुर शास्त्री के सरल व्यक्तित्व, सादगी और दृढ़ इच्छाशक्ति से जुड़े प्रसंगों को अपने शब्दों में प्रस्तुत किया।

कुछ बच्चों ने गीत और कविताएं भी प्रस्तुत कीं। बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और बच्चों के आत्मविश्वास एवं प्रतिभा की झलक देखने को मिली।

रजनी ने समझाया गांधी जी के तीन बंदरों का संदेश

कार्यक्रम में छात्रा रजनी की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। रजनी ने महात्मा गांधी के तीन बंदरों से जुड़े संदेश को विस्तार से समझाया।

उसने बताया कि तीन बंदरों के माध्यम से बुरा न देखने, बुरा न सुनने और बुरा न बोलने का संदेश दिया जाता है। रजनी ने इसे अपने अंदाज में प्रस्तुत करते हुए बच्चों को गांधी जी के विचारों से जोड़ने का प्रयास किया।

उसकी प्रस्तुति को कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सराहा।

साधना सिंहा ने बच्चों को बताया गांधी और शास्त्री का महत्व

नन्हक फाउंडेशन की फाउंडर प्रेसिडेंट साधना सिंहा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलनों और उनके विचारों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि गांधी जी ने अहिंसा और सत्य को अपने संघर्ष का आधार बनाया तथा शांतिपूर्ण तरीके से लोगों को आंदोलनों से जोड़ने का प्रयास किया।

साधना सिंहा ने लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने शास्त्री जी की सादगी, सरल जीवनशैली और दृढ़ इच्छाशक्ति से बच्चों को परिचित कराया तथा उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

8 वर्षीय रोहन ने बिना हाथ उठाए बना दी गांधी जी की खूबसूरत स्केच

कार्यक्रम की सबसे खास और भावुक कर देने वाली घटना उस समय सामने आई, जब सभा के दौरान 8 वर्षीय रोहन तन्मय होकर महात्मा गांधी की स्केच बनाने में जुटा रहा।

रोहन ने सामने रखी गांधी जी की तस्वीर को ध्यान से देखते हुए बिना एक बार भी अपना हाथ उठाए लगातार स्केच बनानी शुरू की। कुछ समय बाद जब उसने चित्र पूरा किया तो उसकी बनाई गांधी जी की खूबसूरत स्केच देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग हैरान रह गए।

रोहन की चित्रकला ने यह संदेश भी दिया कि बच्चों के भीतर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने, प्रोत्साहित करने और अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराने की है।

‘प्रतिभाओं की कमी नहीं, जरूरत है उन्हें अवसर देने की’

फाउंडेशन की फाउंडर प्रेसिडेंट साधना सिंहा ने कहा कि यदि हम अपने आसपास देखें तो प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियों या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण किसी बच्चे की प्रतिभा दबनी नहीं चाहिए। यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन, संसाधन और मंच मिले तो वे अपनी प्रतिभा के माध्यम से न केवल अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नन्हक फाउंडेशन लगातार ऐसी अज्ञात प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें सामने लाने का प्रयास कर रहा है।

समाज से सहयोग की अपील

साधना सिंहा ने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने स्तर पर देश के विकास और बच्चों के भविष्य के लिए योगदान देना चाहिए। उन्होंने लोगों से फाउंडेशन के प्रयासों में सहयोग करने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद और प्रतिभावान बच्चों तक शिक्षा एवं आवश्यक संसाधन पहुंचाए जा सकें।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतिभावान बच्चे की प्रतिभा व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। उसे ऐसा अवसर मिलना चाहिए, जिससे वह अपनी क्षमता का उपयोग अपने भविष्य और देश के विकास के लिए कर सके।

उन्होंने कहा कि सम्मानित जीवन जीना हर नागरिक का अधिकार है और बच्चों को शिक्षा, प्रतिभा तथा आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

गांधी-शास्त्री जयंती पर बच्चों ने दिया प्रतिभा और समान अवसर का संदेश

नन्हक फाउंडेशन के बच्चों द्वारा आयोजित गांधी-शास्त्री जयंती कार्यक्रम केवल महान नेताओं को याद करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बच्चों की प्रतिभा, शिक्षा, समान अवसर और समावेशी विकास का संदेश भी दिया।

गीत, कविता, वक्तव्य और चित्रकला के माध्यम से बच्चों ने जहां गांधी जी और शास्त्री जी के विचारों को याद किया, वहीं 8 वर्षीय रोहन की स्केच और रजनी की प्रस्तुति ने यह दिखाया कि सही अवसर मिलने पर बच्चे अपनी प्रतिभा से सभी का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।



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