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शारदा विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस पर सतत पोषण और खाद्य सुरक्षा पर मंथन, नवाचार से भविष्य संवारने पर जोर

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/  ग्रेटर नोएडा
 सुरक्षित भोजन, बेहतर पोषण और सतत खाद्य प्रणाली के निर्माण को लेकर शारदा विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के आहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कृषि ज्ञान के समन्वय से भविष्य की खाद्य चुनौतियों का समाधान तलाशने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम की थीम ‘आज नवाचार, कल पोषण’ के माध्यम से विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में AFSTI दिल्ली चैप्टर की ट्रेजरर एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. विपाशा तनेजा ने विद्यार्थियों के साथ खाद्य सुरक्षा, पोषण और तकनीकी नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल खाद्य उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भोजन की गुणवत्ता, उपलब्धता, सुरक्षित भंडारण और खाद्य अपव्यय को कम करने पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
AI और आधुनिक तकनीक से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा
कार्यक्रम के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा आधारित तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से खाद्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और पर्यावरण के अनुकूल खाद्य प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
डॉ. विपाशा तनेजा ने युवाओं और शोधकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नवाचार, विज्ञान और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करके ही आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, भोजन की बर्बादी रोकने और बेहतर भंडारण एवं पैकेजिंग तकनीकों को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन केवल बुनियादी आवश्यकता नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की नींव है।
पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान का समन्वय जरूरी
शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अमित कुमार सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल किसानों या खाद्य उद्योग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिकों, शैक्षणिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और आम लोगों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से ऐसी खाद्य प्रणालियों का विकास किया जा सकता है, जो वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की पीढ़ियों के हितों की भी रक्षा करें।
कार्यक्रम में स्थानीय कृषि परंपराओं और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया गया। इस दिशा में प्रयास किसानों के लिए लाभकारी होने के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी सहायक हो सकते हैं।
पोस्टर और रंगोली के जरिए दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग और रंगोली के माध्यम से पौष्टिक भोजन के महत्व, खाद्य सुरक्षा और भोजन की बर्बादी रोकने का संदेश दिया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारी और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक प्रो. पीतम चंद्र, सह-संयोजक डॉ. रंजना पांडे और डॉ. दिनकर बी. कांबले सहित आयोजन समिति के सदस्यों की भूमिका रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रयासों की सराहना की।
विश्व खाद्य दिवस का यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि सुरक्षित भोजन, संतुलित पोषण और पर्यावरण के अनुकूल खाद्य प्रणालियों का विकास केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।


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