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गौतमबुद्धनगर के भाईपुर ब्राह्मण आयुर्वेदिक चिकित्सालय को पंचकर्म केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी



प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने किया निरीक्षण, पंचकर्म हट और औषधीय पौधों से आयुष वाटिका विकसित करने के दिए निर्देश
    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर
उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आयुष विभाग ने पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में गौतमबुद्धनगर के भाईपुर ब्राह्मण स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय को पंचकर्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इस योजना के तहत चिकित्सालय में पंचकर्म चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ आधारभूत सुविधाओं, आवश्यक उपकरणों, औषधियों और प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश शासन के आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार, आईएएस ने 10 अक्टूबर 2026 को सुबह आठ बजे राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, भाईपुर ब्राह्मण का निरीक्षण किया। उन्होंने चिकित्सालय में संचालित पंचकर्म इकाई की व्यवस्थाओं, उपचार प्रक्रिया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं चिकित्सकों से चिकित्सा सेवाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पंचकर्म हट और आयुष वाटिका विकसित करने पर जोर
प्रमुख सचिव आयुष ने चिकित्सालय परिसर में पंचकर्म हट स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही परिसर में औषधीय पौधों का रोपण कर आयुष वाटिका विकसित करने पर बल दिया, जिससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति, औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके।
उन्होंने कहा कि पंचकर्म चिकित्सा सेवाओं को प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए केवल इकाई स्थापित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना, मानक उपकरण, उपयुक्त औषधियां और प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में काम किया जाए।
200 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में स्थापित हो रहीं पंचकर्म यूनिट
आयुष विभाग की ओर से प्रदेश के 200 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में आधुनिक मानकों के अनुरूप पंचकर्म यूनिट स्थापित की जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करना और मरीजों को उनके नजदीकी सरकारी चिकित्सालयों में बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित गौतमबुद्धनगर के भाईपुर ब्राह्मण चिकित्सालय को पंचकर्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे क्षेत्र में आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने और पंचकर्म सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की संभावनाएं बनेंगी।
मधुमेह, गठिया और कमर दर्द जैसी समस्याओं पर विशेष ध्यान
निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित प्रदेश के विभिन्न पंचकर्म केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं का समुचित उपयोग किया जाए। उन्होंने मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, मोटापा और अन्य दीर्घकालिक एवं जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान मरीजों को आवश्यकतानुसार आयुर्वेदिक उपचार और उचित चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप उपचार संबंधी सलाह मिलनी चाहिए। पंचकर्म सहित आयुर्वेद की विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का उपयोग निर्धारित मानकों और चिकित्सकीय मार्गदर्शन के अनुसार किया जाए, ताकि मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
औषधियों की उपलब्धता और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा
प्रमुख सचिव आयुष ने चिकित्सालय में औषधियों की उपलब्धता और उनके वितरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्देशित किया कि मरीजों को आवश्यक औषधियां उपलब्ध कराने के साथ सभी चिकित्सा सेवाओं का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया जाए।
उन्होंने चिकित्सालय परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने, मरीजों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकारी चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार के साथ सम्मानजनक व्यवहार और सुविधाजनक वातावरण भी मिले।
आयुष वेलनेस और चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी
प्रमुख सचिव ने आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं और पंचकर्म के प्रभावी एकीकरण के माध्यम से आयुष वेलनेस, चिकित्सा पर्यटन और जनस्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश को आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता बताई।
भाईपुर ब्राह्मण स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का निरीक्षण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब चिकित्सालय को पंचकर्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना के तहत आधारभूत सुविधाओं, औषधियों, उपकरणों और मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना अहम होगा। इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र के लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा।


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