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UPI MDR के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शनUPI पर प्रस्तावित 0.4% MDR के विरोध में कांग्रेस का जनजागरण मार्च

विशेष स्टोरी — कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, जिला अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने व्यापारियों पर संभावित आर्थिक प्रभाव का मुद्दा उठाया
      मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
यूपीआई के माध्यम से होने वाले ₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के निर्णय के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर द्वारा जनजागरण मार्च निकाला गया। जिला अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को स्थानीय व्यापारियों, छोटे एवं मध्यम कारोबारियों तथा डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े लोगों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
व्यापारियों पर लागत बढ़ने की आशंका का मुद्दा उठाया
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में यूपीआई रोजमर्रा के लेन-देन और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी, जेवर तथा ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में व्यापारी और उपभोक्ता डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, फर्नीचर, ऑटोमोबाइल, मेडिकल स्टोर, रेस्टोरेंट, होटल, सर्विस सेंटर और अन्य प्रतिष्ठानों में भी बड़े मूल्य के भुगतान डिजिटल माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर MDR की व्यवस्था का असर केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रहने की आशंका है।
दीपक चोटीवाला ने कहा कि सरकार का कहना है कि MDR सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारियों की लागत पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार, सीमित मार्जिन पर कारोबार करने वाले छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए भुगतान संबंधी अतिरिक्त लागत महत्वपूर्ण विषय हो सकती है।
कांग्रेस ने राहुल गांधी के उठाए सवालों का किया उल्लेख
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस निर्णय को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस व्यवस्था के आर्थिक प्रभाव और इसके पीछे लिए गए नीतिगत निर्णयों पर सरकार से स्पष्टता चाहती है।
उन्होंने विदेशी भुगतान कंपनियों के कथित दबाव से जुड़े सवालों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को इस संबंध में अपनी स्थिति और नीतिगत निर्णय की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।
हालांकि, केंद्र सरकार ने विदेशी प्रभाव से जुड़े इन आरोपों को खारिज किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार नया MDR ढांचा UPI पारिस्थितिकी तंत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसका निर्धारण भारत में नीतिगत प्रक्रिया के तहत हुआ है।
सरकार के अनुसार ग्राहकों पर MDR नहीं डाला जाएगा
केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और पात्र छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि लगभग 96 प्रतिशत P2M यानी person-to-merchant लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे। ₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जबकि ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए प्रति लेन-देन ₹300 की अधिकतम सीमा निर्धारित है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI लेन-देन पर कोई MDR नहीं लगेगा। साथ ही, सरकार के अनुसार MDR ग्राहक से वसूलने के लिए शुल्क नहीं है और बैंकों तथा भुगतान सेवा प्रदाताओं को इसे ग्राहक पर डालने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
गौतमबुद्ध नगर के व्यापारिक क्षेत्र का हवाला
दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के आधुनिक बाजारों से लेकर दादरी और जेवर के स्थानीय बाजारों तक बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर, स्वरोजगार करने वाले लोग और छोटे उद्यमी डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को नीति बनाते समय व्यापारियों के वास्तविक खर्च, व्यापारिक मार्जिन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर संभावित प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि इस व्यवस्था के प्रभावों पर व्यापक विचार किया जाए और व्यापारियों की चिंताओं का समाधान किया जाए।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के बाद सौंपा ज्ञापन
जनजागरण मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने UPI MDR व्यवस्था के विरोध में नारे लगाए और केंद्र सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
कार्यक्रम में गौतम अवाना, मुकेश शर्मा, महाराज सिंह नागर, अशोक पंडित, मौहम्मद तकी, धर्मबीर प्रधान, निशा शर्मा, किशन शर्मा, के.के. भाटी एडवोकेट, रमेश यादव, रघुराज शर्मा, रूबी चौहान, नरेश शर्मा, आर.के. प्रथम, सुरेंद्र प्रताप सिंह, अरुण गुर्जर, मोहित भाटी एडवोकेट, नितीश चौधरी, अरविन्द रेक्सवाल, सुबोध भट्ट, सचिन शर्मा, विपिन त्यागी, तनवीर अहमद, नीरज शर्मा, सचिन जीनवाल, गजन प्रधान, ओमकार राणा, मेहरचंद वाल्मीकि, जातां सिन्हा, दुर्गेश एडवोकेट, अनीस, उपेंद्र, सुनील भाटी, ऋतिक सिंह, मनोज चौधरी, मुन्ना, योगेश मिश्रा, गिरीश शर्मा, रवि भाटी, अरविन्द कुमार, अनुज भाटी और नितिन कुमार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि व्यापारियों और आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े। वहीं केंद्र सरकार का पक्ष है कि नया ढांचा UPI के संचालन और विस्तार की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए है तथा अधिकांश छोटे व्यापारी और सामान्य UPI उपयोगकर्ता इससे प्रभावित नहीं होंगे।


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