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शोध से नवाचार तक: GNIOT में फैकल्टी और छात्रों को R&D की नई दिशा


गुणवत्तापूर्ण शोध, प्रकाशन, पेटेंट और AI के जिम्मेदार उपयोग पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन; 100 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण
 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से GNIOT Engineering Institute में फैकल्टी एवं स्टूडेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। संस्थान के ग्राउंड फ्लोर स्थित सेमिनार हॉल में आयोजित इस विशेष सत्र में 100 से अधिक छात्रों एवं फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम GNIOT Business Incubation Centre द्वारा सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभागों के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को शोध की मूल अवधारणाओं से लेकर गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन, पेटेंट, अनुसंधान फंडिंग और अकादमिक पहचान तक की प्रक्रिया से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना था।
शोध की पूरी प्रक्रिया को समझने पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित गुप्ता रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को शोध की समस्या की पहचान से लेकर शोध के प्रभाव और उसके अकादमिक एवं औद्योगिक उपयोग तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध केवल शोध-पत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध की उपयोगिता, विश्वसनीयता, नैतिकता और समाज एवं उद्योग पर उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
बेहतर शोध-पत्र तैयार करने की बारीकियां
सत्र में एक प्रभावी शोध-पत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को मजबूत शीर्षक, प्रभावी सारांश, उचित कार्यप्रणाली, प्रमाण-आधारित परिणाम और स्पष्ट निष्कर्ष तैयार करने के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।
साथ ही शोधकर्ताओं को यह समझाया गया कि किसी शोध-पत्र के लिए जर्नल का चयन करते समय केवल प्रकाशन के अवसर को नहीं, बल्कि जर्नल के स्कोप, इंडेक्सिंग, गुणवत्ता मानकों और लागत जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
Scopus, SCIE और अन्य इंडेक्सिंग की जानकारी
ओरिएंटेशन के दौरान प्रतिभागियों को SCIE, ESCI और Scopus जैसी इंडेक्सिंग सेवाओं की उपयोगिता एवं सत्यापन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही Impact Factor, CiteScore, SJR, SNIP, h-index, i10-index और DOI जैसे प्रमुख शोध संकेतकों को समझाया गया।
शोधकर्ताओं को विशेष रूप से सलाह दी गई कि किसी जर्नल या कॉन्फ्रेंस की विश्वसनीयता जांचे बिना प्रकाशन अथवा पंजीकरण का निर्णय न लें।
प्रीडेटरी जर्नल और फर्जी सम्मेलनों से सावधान रहने की सलाह
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Predatory Journals और भ्रामक सम्मेलनों की पहचान से संबंधित रहा। प्रतिभागियों को ऐसे प्रकाशनों एवं आयोजनों के संभावित चेतावनी संकेतों के बारे में बताया गया, ताकि शोधकर्ता अपने समय, संसाधनों और शोध की विश्वसनीयता को नुकसान से बचा सकें।
पेटेंट और बौद्धिक संपदा पर विशेष फोकस
सत्र में Intellectual Property (IP) के विभिन्न स्वरूपों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसमें पेटेंट, कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन, ट्रेडमार्क और ट्रेड सीक्रेट्स जैसे विषय शामिल रहे।
प्रतिभागियों को Prior-Art Search, Patent Filing और Patent Examination जैसी प्रक्रियाओं की प्रारंभिक जानकारी भी दी गई। इस पहल का उद्देश्य छात्रों एवं फैकल्टी को अपने शोध एवं नवाचारों की बौद्धिक संपदा सुरक्षा के प्रति जागरूक करना रहा।
AI के उपयोग में जिम्मेदारी जरूरी
वर्तमान दौर में शोध के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग को देखते हुए कार्यक्रम में AI-assisted research पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों को साहित्य खोज, लेखन और डेटा विश्लेषण जैसे कार्यों में AI टूल्स के जिम्मेदार उपयोग के बारे में बताया गया।
साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि AI का उपयोग करते समय गढ़े हुए डेटा, असत्यापित तथ्यों अथवा बिना जांचे निष्कर्षों को शोध का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। शोध की मौलिकता, पारदर्शिता और सत्यापन को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया।
90 दिनों की कार्ययोजना से शोध को परिणाम तक पहुंचाने की पहल
कार्यक्रम में प्रतिभागियों के लिए 90-दिवसीय रिसर्च एक्शन प्लान की अवधारणा भी प्रस्तुत की गई। इसका उद्देश्य शोध के विचार को चरणबद्ध तरीके से विकसित करते हुए उसे विश्वसनीय अकादमिक आउटपुट में बदलने के लिए व्यावहारिक दिशा प्रदान करना था।
इस दौरान समस्या चयन, साहित्य समीक्षा, शोध पद्धति, डेटा एवं विश्लेषण, लेखन, प्रकाशन तथा बौद्धिक संपदा से जुड़े कार्यों को चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
आयोजन में संस्थान का सहयोग
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए GNIOT Group of Institutions के प्रबंधन, निदेशक, इनोवेशन एंड आंत्रप्रेन्योरशिप के प्रोफेसर एवं डीन प्रो. (डॉ.) धीरज गुप्ता तथा डॉ. अनुराग मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजन को सफल बनाने में उनके सहयोग एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समन्वय  सुशांत कमल,  दिव्यांशु देव और  मुकुल अत्रि द्वारा किया गया।
शोध संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में पहल
GNIOT में आयोजित यह R&D ओरिएंटेशन कार्यक्रम छात्रों और शिक्षकों को केवल शोध की तकनीकी जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें रिसर्च आइडिया से लेकर प्रकाशन, पेटेंट और अकादमिक प्रभाव तक की पूरी यात्रा को समझने का अवसर प्रदान करता दिखाई दिया। कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान में शोध एवं नवाचार की संस्कृति को और मजबूत करने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की अकादमिक एवं औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में प्रयास किया गया।


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