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शिक्षक दिवस पर श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज में शिक्षकों का सम्मान

प्रबंध समिति ने किया समस्त स्टाफ का सम्मान; प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने बताया श्रेष्ठ शिक्षक के लिए 5-C सिद्धांत का महत्व
मौहम्मद इल्यास — “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा
 Vision Live News / Special Story 
“श्रेष्ठ शिक्षक ज्ञान के साथ चरित्र, संस्कार और जीवन-मूल्यों का भी निर्माण करता है।”
शिक्षक दिवस के अवसर पर श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में प्रबंध समिति की ओर से महाविद्यालय के समस्त स्टाफ के सम्मान में गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया तथा शिक्षा के क्षेत्र में अपने दायित्वों को और अधिक निष्ठा, समर्पण एवं जिम्मेदारी के साथ निभाने का संकल्प लिया गया।
समारोह के दौरान पूरे महाविद्यालय परिसर में गुरु-शिष्य परंपरा, सम्मान, प्रेरणा और शिक्षा के उच्च आदर्शों की भावना दिखाई दी।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं देश के द्वितीय राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इस अवसर पर शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. राधाकृष्णन के योगदान को याद किया और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया।
“डॉ. राधाकृष्णन का जीवन प्रत्येक शिक्षक के लिए प्रेरणास्रोत”
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन प्रत्येक शिक्षक के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन ने सादगी, उच्च आदर्शों और भारतीय संस्कृति को अपने जीवन का आधार बनाया तथा आजीवन शिक्षा एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहे।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं है, बल्कि उनके भीतर सोचने, समझने, प्रश्न करने, निर्णय लेने और बेहतर इंसान बनने की क्षमता विकसित करना भी है।
प्राचार्य ने समझाया “5-C” सिद्धांत
डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने एक श्रेष्ठ शिक्षक के व्यक्तित्व एवं कार्यक्षमता के निर्माण के लिए 5-C सिद्धांत को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने पांचों बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा—
Content — विषय-वस्तु: शिक्षक को अपने विषय का गहन एवं अद्यतन ज्ञान होना चाहिए।
Concept — अवधारणा: विषय की मूल अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझना और विद्यार्थियों तक सरल तरीके से पहुंचाना आवश्यक है।
Control — नियंत्रण: कक्षा-प्रबंधन एवं विद्यार्थियों के साथ संतुलित व्यवहार शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
Communication — संप्रेषण: ज्ञान तभी प्रभावी बनता है, जब शिक्षक उसे विद्यार्थियों तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचा सके।
Character — चरित्र: शिक्षक का आचरण ही विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी पाठशाला होता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक को इन पांचों क्षेत्रों में लगातार स्वयं को विकसित करते रहना चाहिए।
“अच्छा शिक्षक वही है, जो सदैव अच्छा शिक्षार्थी बना रहे”
प्राचार्य ने रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “एक अच्छा शिक्षक वही है, जो सदैव एक अच्छा शिक्षार्थी बना रहे।”
उन्होंने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र निरंतर परिवर्तनशील है। नई तकनीक, नई शोध और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के बीच शिक्षक को भी लगातार सीखते रहना चाहिए। जो शिक्षक स्वयं सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखता है, वही विद्यार्थियों को सीखने के लिए बेहतर ढंग से प्रेरित कर सकता है।
निरंतर प्रयास और समर्पण से बनती है उत्कृष्टता
डॉ. वत्स ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति किसी महान वैज्ञानिक की तरह नई खोज कर अल्बर्ट आइंस्टीन, उत्कृष्ट अभिनय कर अमिताभ बच्चन अथवा क्रिकेट खेलकर सचिन तेंदुलकर नहीं बन सकता।
लेकिन उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में निरंतर प्रयास, समर्पण, ईमानदारी और मेहनत के साथ कार्य करते हुए व्यक्ति एक अच्छा वैज्ञानिक, उत्कृष्ट अभिनेता या आदर्श शिक्षक अवश्य बन सकता है।
उन्होंने शिक्षकों को अपने कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करने का संदेश दिया।
प्रबंध समिति की ओर से समस्त स्टाफ का सम्मान
कार्यक्रम के अगले चरण में महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने प्रबंध समिति की ओर से महाविद्यालय के समस्त स्टाफ को सम्मानित किया।
सम्मान प्राप्त करते हुए शिक्षकों में उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण रहा। शिक्षकों ने प्रबंध समिति की इस पहल के प्रति आभार व्यक्त किया।
“शिक्षा व्यवसाय नहीं, राष्ट्र निर्माण का पवित्र दायित्व”
अपने संबोधन में सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने कहा—
“शिक्षा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का पवित्र दायित्व है। एक शिक्षक का ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब वह उसके व्यवहार, चरित्र और कर्मों में भी दिखाई दे।”
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज में सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक निभाता है, क्योंकि उसके सामने केवल वर्तमान पीढ़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के निर्माण की जिम्मेदारी भी होती है।
उन्होंने शिक्षकों से अपने चरित्र और आचरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
“ज्ञान पुस्तकों तक सीमित न रहे, व्यवहार में दिखाई दे”
रजनीकान्त अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक को अपने ज्ञान को केवल पुस्तकों और कक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे अपने व्यवहार और कर्मों में भी उतारना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षक के शब्दों से जितना सीखते हैं, उससे कहीं अधिक उसके व्यवहार और व्यक्तित्व से सीखते हैं। इसलिए शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के लिए प्रत्यक्ष उदाहरण होना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और रोजगार के लिए तैयार न करें, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील, संस्कारवान और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाने की दिशा में भी कार्य करें।
सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की उप-प्राचार्या एवं आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने प्रबंध समिति एवं सचिव रजनीकान्त अग्रवाल के प्रति समस्त महाविद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर प्राप्त सम्मान केवल प्रसन्नता का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए अपने दायित्वों के प्रति और अधिक सजग एवं समर्पित होने का संकल्प भी है।
उन्होंने सभी महाविद्यालय स्टाफ से सचिव द्वारा दिए गए प्रेरक संदेशों एवं मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि महाविद्यालय की निरंतर प्रगति और उन्नति के लिए सभी शिक्षक एवं कर्मचारी पूर्ण निष्ठा, समर्पण और कर्तव्यपरायणता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।
गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षा के मूल्यों की झलक
शिक्षक दिवस का यह आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षक और विद्यार्थी के बीच विश्वास, संस्कार और ज्ञान की उस परंपरा को भी रेखांकित किया, जो भारतीय संस्कृति में सदियों से महत्वपूर्ण रही है।
समारोह के दौरान शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता की भावना दिखाई दी। वक्ताओं ने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों से अपने दायित्वों को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाने का आह्वान किया।
निष्कर्ष
श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि एक शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, चरित्र, संस्कार और भविष्य का निर्माता होता है।
समारोह ने शिक्षकों के सम्मान के साथ-साथ उन्हें निरंतर सीखने, अपने आचरण को आदर्श बनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा दी।



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